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अगर नहीं पता एक रुपये के नोट का जन्म कैसे हुआ, तो पढ़िए यह लेख...

बाजार में ज्यादातर 10, 50, 100, 500 और दो हजार के नोट ज्यादा दिखते हैं. बाकी तो ज्यादातर 1, 2 और 5 के सिक्के चलते हैं. शादी में भी 101 का लिफाफा देना हो तो एक रुपये का सिक्का ढूंढते हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पहले के जमाने में सिक्के को हटाकर एक रुपये का नोट लाया गया था. आजकर एक रुपये का नोट ढूंढने से नहीं मिलता.

KJ Staff
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बाजार में ज्यादातर 10, 50, 100, 500 और दो हजार के नोट ज्यादा दिखते हैं. बाकी तो ज्यादातर 1, 2 और 5 के सिक्के चलते हैं. शादी में भी 101 का लिफाफा देना हो तो एक रुपये का सिक्का ढूंढते हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पहले के जमाने में सिक्के को हटाकर एक रुपये का नोट लाया गया था. 

आजकर एक रुपये का नोट ढूंढने से नहीं मिलता. किसी को दे भी दिया जाए तो बड़े सहेज के रखता है ताकी आगे बता सके कि पहले ऐसे नोट चला करते थे. आज यानी 30 नवंबर को एक रुपये के नोट को 100 साल हो गए हैं. ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं. भारत में कैसे आया था एक रुपये का नोट.

इसकी शुरुआत का इतिहास भी बड़ा दिलचस्प है. हुआ यूं कि दौर था पहले विश्वयुद्ध का और देश में हुकूमत थी अंग्रेजों की. उस दौरान एक रुपये का सिक्का चला करता था जो चांदी का हुआ करता था लेकिन युद्ध के चलते सरकार चांदी का सिक्का ढालने में असमर्थ हो गई और इस प्रकार 1917 में पहली बार एक रुपये का नोट लोगों के सामने आया. इसने उस चांदी के सिक्के का स्थान लिया. ठीक सौ साल पहले 30 नवंबर 1917 को ही यह एक रुपये का नोट सामने आया जिस पर ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम की तस्वीर छपी थी.

भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट के अनुसार इस नोट की छपाई को पहली बार 1926 में बंद किया गया क्योंकि इसकी लागत अधिक थी. इसके बाद इसे 1940 में फिर से छापना शुरु कर दिया गया जो 1994 तक अनवरत जारी रहा. बाद में इस नोट की छपाई 2015 में फिर शुरु की गई. इस नोट की सबसे खास बात यह है कि इसे अन्य भारतीय नोटों की तरह भारतीय रिजर्व बैंक जारी नहीं करता बल्कि स्वयं भारत सरकार ही इसकी छपाई करती है. इस पर रिजर्व बैंक के गवर्नर का हस्ताक्षर नहीं होता बल्कि देश के वित्त सचिव का दस्तखत होता है.

इतना ही नहीं कानूनी आधार पर यह एक मात्र वास्तविक 'मुद्रा' नोट (करेंसी नोट) है बाकी सब नोट धारीय नोट (प्रॉमिसरी नोट) होते हैं जिस पर धारक को उतनी राशि अदा करने का वचन दिया गया होता है. दादर के एक प्रमुख सिक्का संग्राहक गिरीश वीरा ने पीटीआई से कहा, ''पहले विश्वयुद्ध के दौरान चांदी की कीमतें बहुत बढ़ गईं थी. इसलिए जो पहला नोट छापा गया उस पर एक रुपये के उसी पुराने सिक्के की तस्वीर छपी. तब से यह परंपरा बन गई कि एक रुपये के नोट पर एक रुपये के सिक्के की तस्वीर भी छपी होती है.'' शायद यही कारण है कि कानूनी भाषा में इस रुपये को उस समय 'सिक्का' भी कहा जाता था.

पहले एक रुपये के नोट पर ब्रिटिश सरकार के तीन वित्त सचिवों के हस्ताक्षर थे. ये नाम एमएमएस गुब्बे, एसी मैकवाटर्स और एच. डेनिंग थे. आजादी से अब तक 18 वित्त सचिवों के हस्ताक्षर वाले एक रुपये के नोट जारी किए गए हैं. वीरा के मुताबिक एक रुपये के नोट की छपाई दो बार रोकी गई और इसके डिजाइन में भी कम से कम तीन बार आमूल-चूल बदलाव हुए लेकिन संग्राहकों के लिए यह अभी भी अमूल्य है.

English Summary: If you do not know how a note of 1 rupee was born, then read this article ... Published on: 30 November 2017, 06:57 AM IST

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