सोयाबीन की फसल के लिए साप्ताहिक सलाह

सोयाबीन की फसल की बुवाई अधिकांश क्षेत्रों में की जा चुकी है। इस दौरान जो फसल लगभग 7 से 25 दिन की अवस्था में है ऐसे में फसल की देखभाल के लिए केंद्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर द्वारा उपयोगी सलाह दी गई है।

जिस स्थान पर फसल की बुवाई के 15 से 20 दिन हो चुके हैं और वहां पर बारिश नहीं हो रही है ऐसे स्थान पर नमी संरक्षण एवं खरपतवारों के नियंत्रण के लिए डोरा/कुल्पा चलाएं।

जहां पर सोयाबीन की फसल की बुवाई 15-20 दिन की हो चुकी हो
और खरपतवारनाशक का प्रयोग नहीं किया हो, ऐसे स्थानों पर चौड़ी एवं सकरी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए सोयाबीन में अनुशंसित खरपतवारनाशक इमाझेथापायर ( 1 लि./ है.) के हिसाब से छिड़काव करें। जिन किसानों के खेतों में केवल चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार हैं वहां पर क्लोरीम्यूरान इथाइल ( 36 ग्राम/ हैक्टे.) की दर से छिड़काव करें तथा जिन किसानों के खेत में केवल सकरी पत्ती वाले खरपतवारों की संख्या अधिक हो वहां क्विजालोफाप इथाइल ( 1 लि. / है.) या क्विजालोफाप-पी-टेफूरील ( 1 लि./ है.) या फिर फेनाक्सीफॉप-पी-ईथाइल ( 0.75 लि. / है.) में से किसी एक का 500 लिटर पानी के साथ फ्लड जेट या फ्लेट फेन नोझल ( कट नोझल ) का उपयोग कर समान रूप से खेत में छिड़काव करें।

जहां पर फसल 15-20 दिन की हो चुकी हो वहां पर किसान खरपतवारनाशक के साथ अनुशंसित कीटनाशक का मिश्रित छिड़काव कर सकते हैं जिससे कि खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ 30-40 दिनों के लिए कीट नियंत्रण प्रभावी हो सके। इसके निम्नलिखित तरीके हैं- जैसे इमेझाथापायर/क्विजालोफाप इथाइल ( 1 लि./है.) + क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल ( 100 मि.ली / है.)/ इन्डोक्साकार्ब (333 मि.ली./है.) प्रयोग करें। छिड़काव के समय प्रति हैक्टेयर के लिए अनुशंसित पानी की मात्रा 500 लिटर का उपयोग करें।

जहां पर सोयाबीन अंकुरित हो चुकी है वहां पर नीला भृंग कीट के प्रकोप की संभावना है, अत: प्रकोप होने पर क्वीनालफॉस 1.5 लि./है. की दर से छिड़काव कर कीट नियंत्रण करें।

विगत वर्ष जिन स्थानों पर सोयाबीन की फसल पर व्हाइट ग्रब (सफेद सूंडी) का प्रकोप हुआ था वहां के किसान अधिक ध्यान दें- व्हाइट ग्रब के कीटों के वयस्कों को एकत्र कर नष्ट करने के लिए प्रकाश जाल एवं फेरोमैन ट्रैप का प्रयोग करें। बुवाई से पूर्व इमिडाक्लोप्रिड 48 एफ.एस ( 125 मि.लि. प्रति किलो बीज ) से बीजोपचार जरूर करें।

सोयाबीन की फसल 30 दिन की हो जाने के बाद उसमें डोरा या कुल्पा न चलाएं। 

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