मौसम की मार के कारण पान के किसानों को नुकसान

मौसम की मार के कारण पान के किसानों को नुकसान

-पान के पत्ते फंगस के कारण हो रहे है ख़राब

-लाखों की आर्थिक क्षति झेल रहे किसान आत्महत्या की करने लगे है बात

उत्तर बंगाल में चाय व अनारस के बाद अब पान की खेती करने वाले किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। हर साल की तरह इस साल भी प्रचंड ठंड के कारण पान की खेती करने वाले किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। ठंड के कारण व फंगस के कारण पत्तियों पर काले धब्बे आ गये है। टहनियाँ भी कमजोर हो रही है। इससे पूरे उत्तर बंगाल के पान किसान परेशान है।

उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर थाना इलाके के श्रीकृष्णपुर इलाके में लगभग ढ़ेठ सौ किसान के 30-40 हजार पान की क्यारियों का यही हाल है। किसानों का माने तो लाखों करोड़ रूपये के पान का नुकसान हो रहा है। मगर प्रशासन से किसी तरह की आर्थिक सहायता या मुआवजा नहीं मिला है।अधिकाश किसान कर्ज या बैंक से लोन लेकर इसकी खेती करते है। मगर इस साल भारी नुकसान के कारण उनकी रातों की नींद उड़ गयी है। वें अब आत्महत्या करने की बात करने लगे है। मगर प्रशासन के कान में तेल डाले बैठे है।

पान किसान पंकज दे, शुब्बीर दास,बाबन दास आदि किसानों ने बताया कि प्रति बीघा पर पान की खेती करने पर ढ़ाई लाख रूपया निवेश करना पड़ता है। लेकिन ठंठ के कारण एक लाख रुपया भी उठाना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा हर साल 40-50 रूपया रखरखाव पर खर्च होता है। एक पान बगान की आयु तीन साल होती है। पान की खेती ताटी-बेड़ा व ऊपर में छावनी बनाकर की जाती है। इस पर भी लाखों रूपया का खर्च आता है। किसानों का माने तो इस्लामपुर की पान पश्चिम बंगाल ही नहीं पड़ोसी राज्य बिहार व पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में भी बाग्ला पान की माग है। लेकिन इस बार उत्पादन नहीं होने से निर्यात करना भी मुश्किल हो रहा है। स्थानीय माग को भी हम पूरा नहीं कर पा रहे है। ऐसे में बाहर कैसे निर्यात करे। पान को लेकर हुए नुकसान के कारण किसान अब आदोलन करने का मूड बना रहे है। किसान इसे लेकर सड़क पर उतरेंगे।

कैप्शन : पान के पत्ते पर काले धब्बे

 

साभार

दैनिक जागरण

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