1. बागवानी

बागवानी से ज्यादा आमदनी के लिए अपनाएं अल्ट्रा हाई डेंसिटी और हाई डेंसिटी तकनीक

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य
Gardening

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पुराने समय से किसान पारम्परिक खेती करते आ रहे हैं, लेकिन अब उससे किसानों को ज्यादा अच्छी कमाई नहीं हो पाती है. इस कारण बहुत से किसान आज के समय में पारम्परिक खेती छोड़ रहे हैं और इसके बदले ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल और तकनीक की तलाश में हैं.

किसान भाई चाहते हैं कि वो कम से कम लागत में ज्यादा कमाई कर सकें. इसके चलते ही कई किसान बागवानी करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है, इसलिए उन्हें नुकसान झेलना पड़ता है. मगर आज हम आपको बागवानी का सबसे बढ़िया तरीका बताने जा रहे हैं. इससे किसान भाई कई गुना अधिक पैदावार ले सकते हैं. यह उनकी आमदनी को बहुत ज्यादा बढ़ा सकती है- दरसल, आज हम अल्ट्रा हाई डेंसिटी और हाई डेंसिटी तकनीक से बागवानी करने की जानकारी देने वाले हैं. आप इस तकनीक से बागवानी करके ज्यादा पैदावार और मुनाफा ले सकते हैं.

क्या है अल्ट्रा हाई डेंसिटी और हाई डेंसिटी तकनीक

इस तकनीक में लगभग 5-5 फ़ीट की दूरी पर पेड़ लगाए जाते हैं, जोकि बागवानी करने के लिए एक तकनीक है, जिसे शायद आपने देखा या सुना होगा. इस तकनीक से आप अमरुद, आम और सेब समेत कई फलों की बागवानी कर सकते हैं. इसी तरह थोड़ी-थोड़ी ज़मीन में धान और मक्के की खेती भी कर सकते हैं. हाई डेंसिटी और अल्ट्रा हाई डेंसिटी बागवानी तकनीक से कई गुना उत्पादन लिया जा सकता है, तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि इस तकनीक से बागवानी करने में कितनी लागत आती है? कितनी कमाई की जा सकती है? इसके साथ ही आने वाली दिक्कतों और उनको हल करने का तरीका भी बताएंगे.

अल्ट्रा-हाई डेंसिटी प्लांटेशन से लाभ

  • यह तकनीक स्वाद और ताजगी को बनाए रखते हुए फलों का एक समान आकार और रंग सुनिश्चित करती है.

  • उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ उच्च निर्यात भी होता है.

  • किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देती है.

आम की बागवानी में अल्ट्रा-हाई डेंसिटी प्लांटेशन कैसे मदद करता है?

खेती के पारंपरिक तरीके से देखा जाए, तो एक आम का पेड़ 100 फीट तक बढ़ता है. यूडीएचपी तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि पेड़ नियमित रूप से छंटाई करके 7 फीट से अधिक ऊंचाई पर नहीं बढ़ता है. इस तकनीक के लिए व्यावसायिक किस्मों के आम ग्राफ्ट को एक दूसरे के करीब लगाए जाने की आवश्यकता होती है. एक एकड़ में 60 पेड़ लगाने की पारंपरिक प्रक्रिया की जगह एक एकड़ में लगभग 700 पेड़ लगाए जाते हैं. यूएचडीपी विधि, प्रति एकड़ उत्पादकता में सुधार के साथ-साथ पानी के उपयोग को कम करती है. छंटाई के बाद फलों का बागों में फलने के दौरान सिंचाई महत्वपूर्ण है. इसके लिए ड्रिप सिंचाई अच्छी है. इस तकनीक से प्रूनिंग, प्रजनन और सिंचाई के अनूठे तरीकों से बागों का संतुलित विकास हो सकता है.

अमरूद की बागवानी में अल्ट्रा-हाई डेंसिटी प्लांटेशन कैसे मदद करता है?

अमरूद की परम्परागत दूरी 6 से 8 मी के मुकाबले कम दूरी पर पौधे लगाए जाते हैं. आज हमारे देश के कई अलग-अलग भागों में बड़ी संख्या में अमरूद के बागवान इस पद्धति को अपनाकर लाभ कमा रहे हैं. बता दें कि अमरूद को लगभग हर प्रकार की भूमि में उगा सकते हैं. मगर ऊसर और रेतीली भूमि के लिए बहुत अच्छा फल वृक्ष है. अमरूद को उष्ण और उपोष्ण, दोनों तरह की जलवायु में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है.

अल्ट्रा-हाई डेंसिटी प्लांटेशन (UHDP) एक नए युग की तकनीक है, जिसका उपयोग दुनियाभर में बागवानी के लिए किया जा रहा है.  यूएचडीपी, अन्य स्थायी कृषि तकनीकों के साथ तालमेल में, खेती की पारंपरिक विधि की तुलना में 200 प्रतिशत अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं.

English Summary: gardening with ultra high density and high density techniques

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