भारत में कई फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और इस समय किसान भाई खरीफ सीजन की फसलों की तैयारी कर रहे हैं. इन्हीं में से कुछ ऐसे किसान भाई है, जिनको तलाश है ऐसी फसलों की जिनकी बाजारों में बड़े पैमाने पर मांग हो. अगर इस खरीफ सीजन किसान भाई मक्का की इन किस्मों की खेती करते हैं तो वह अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.
मक्का की टॉप 3 किस्में
1. पूसा विवेक क्यूपीएम उन्नत
पूसा विवेक क्यूपीएम उन्नत देश का पहला प्रो-विटामिन-ए युक्त संकर मक्का है. इसे वर्ष 2017 में विकसित किया गया और यह उत्तर पहाड़ी तथा प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिए अनुशंसित है. इसकी खेती खरीफ मौसम में सिंचित परिस्थितियों में की जा सकती है. साथ ही अगर किसान इस किस्म की खेती करते हैं तो वह इस किस्म से 55.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तथा प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 59.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते है लगभग 93 दिनों के भीतर.
इसके अलावा, इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता इसमें मौजूद 8.15 पीपीएम प्रो-विटामिन-ए है. इसके अलावा इसमें 2.67 प्रतिशत लाइसिन और 0.74 प्रतिशत ट्रिप्टोफैन पाया जाता है. ये दोनों आवश्यक अमीनो अम्ल शरीर के विकास और पोषण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं.
पूसा एचएम-4
पूसा एचएम-4 को विशेष रूप से उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है. यह भी वर्ष 2017 में जारी की गई उन्नत संकर किस्म है. यह खरीफ मौसम में सिंचित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त किस्म है जो किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. इस किस्म से किसान लगभग 87 दिनों में औसत उत्पादन 64.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त कर सकते हैं.
साथ ही इस किस्म में 3.62 प्रतिशत लाइसिन और 0.91 प्रतिशत ट्रिप्टोफैन पाया जाता है. उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन की मौजूदगी इसे मानव उपभोग के साथ-साथ पशु आहार और पोल्ट्री उद्योग के लिए भी उपयोगी बनाती है. कम समय में अधिक उत्पादन मिलने से किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहती है.
पूसा एचएम-8
पूसा एचएम-8 को प्रायद्वीपीय क्षेत्रों की जलवायु और कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है. यह खरीफ मौसम में सिंचित खेती के लिए मक्का की बेहतरीन किस्मों में से एक है, जिससे किसान भाई लगभग 95 दिनों में औसतन 62.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं.
इसके अलावा, इस किस्म में 4.18 प्रतिशत लाइसिन और 1.06 प्रतिशत ट्रिप्टोफैन पाया जाता है, जो इसे पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है. बेहतर गुणवत्ता और स्थिर उत्पादन के कारण यह किसानों के साथ-साथ खाद्य एवं पशु आहार उद्योग के लिए भी उपयोगी विकल्प साबित होे सकती है.
लेखक: रवीना सिंह
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