अगर आप इस खरीफ सीजन मुनाफे फसल की पैदावार करने की सोच रहे हैं तो इस गर्मी के सीजन में आपके लिए मिल्की मशरूम (Milky Mushroom) की खेती अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. यह मशरुम की किस्म एक उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) मशरूम है, जिसे 28°C से 38°C तक के तापमान में भी आसानी से उगाया जा सकता है. साथ ही इस किस्म की यह खास बात है कि इस किस्म को एसी प्लांट की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है. यानी की अगर तापमान और नमी का संतुलन बनाए रखा जाए, तो किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.
मिल्की मशरुम की खेती के लिए कितना तापमान होना चाहिए?
अगर आप मिल्की मशरुम की खेती करने की सोच रहे हैं तो इस बात का विशेष रुप से ख्याल रखें की मशरुम की खेती करने के लिए तापमान की अहम भूमिका होती है. ऐसे में किसान भाई बुवाई के बाद जब माइसेलियम (कवक जाल) विकसित होता है, तब 25°C से 35°C तापमान रखें. इस दौरान मशरूम बैग को अंधेरे कमरे में रखना चाहिए ताकि कवक तेजी से फैल सके. इसके बाद जब फ्रूटिंग यानी मशरूम निकलने की प्रक्रिया शुरू होती है, तब 30°C से 35°C तापमान बेहतर उत्पादन देने में मदद करता है.
कहां कर सकते हैं इसकी खेती?
मिल्की मशरूम की खेती के लिए किसी बड़े या महंगे ढांचे की आवश्यकता नहीं होती. इसे सामान्य कमरे, बेसमेंट, शेड या फूस की झोपड़ी में भी आसानी से उगाया जा सकता है. केवल इतना ध्यान रखना होता है कि कमरे में पर्याप्त नमी बनी रहे और सीधी धूप न पहुंचे. यदि वेंटिलेशन और स्वच्छता का ध्यान रखा जाए, तो छोटे स्तर पर भी अच्छी खेती की जा सकती है.
भूसे की तैयारी है पहला कदम
इस मशरूम की खेती में गेहूं या धान का सूखा भूसा सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है. भूसे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर गर्म पानी में उबालकर या भाप से उपचारित किया जाता है, ताकि उसमें मौजूद हानिकारक जीवाणु और फफूंद नष्ट हो जाएं. उपचार के बाद भूसे को ठंडा करके उसमें अतिरिक्त पानी निकाल दिया जाता है.
इसके बाद तैयार भूसे की परतों के बीच मशरूम स्पॉन (बीज) डालकर पॉलीबैग में भर दिया जाता है. बैग को बंद कर अंधेरे स्थान पर रखा जाता है, जहां कुछ दिनों में माइसेलियम पूरे बैग में फैल जाता है.
फ्रूटिंग के लिए केसिंग जरूरी
जब बैग पूरी तरह सफेद दिखाई देने लगे, तब उस पर केसिंग लेयर लगाई जाती है. यह परत आमतौर पर मिट्टी और अन्य उपयुक्त सामग्री के मिश्रण से तैयार की जाती है. केसिंग लगाने के बाद कमरे में पर्याप्त नमी और हवा का प्रबंध किया जाता है. कुछ दिनों के भीतर छोटे-छोटे मशरूम निकलने लगते हैं, जो धीरे-धीरे बड़े होकर कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं.
मिल्की मशरूम कितनी देगा पैदावार?
देश के कई राज्यों में विशेष रुप से मशरुम की खेती ठंडे मौसम यानी की ठंडे तापमान में ही की जाती है, वहीं मिल्की मशरुम ऐसी किस्म है, जो किसानों को गर्म जलवायु में भी अच्छी उपज देने में सक्षम किस्मों में से एक है. यही वजह है कि दक्षिण भारत के साथ-साथ उत्तर भारत के कई राज्यों में इसकी खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. ऐसे में किसान इस खरीफ सीजन मशरुम की इस किस्म की पैदावार करते हैं, तो वह इससे प्रति बैंग उपज से 40 से 60 दिनों की फसल अवधि में लगभग 800 ग्राम से 1 किलो उपज प्राप्त कर सकते हैं.
लेखक: रवीना सिंह
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