देश में इस वर्ष अल नीनो (El Niño) के प्रभाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो का प्रभाव अधिक रहता है, तो कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा, बारिश का असमान वितरण और लंबे ड्राई स्पेल (बारिश के बीच लंबे अंतराल) की स्थिति देखने को मिल सकती है. ऐसी परिस्थितियों का सबसे अधिक असर खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है, क्योंकि भारत की अधिकांश खेती आज भी मानसूनी बारिश पर निर्भर है.
गौरतलब है कि यदि समय पर बारिश नहीं होती या दो बारिश के बीच लंबा अंतराल आ जाता है, तो खेतों की नमी तेजी से कम होने लगती है. नमी की कमी के कारण पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है, फूल और फल झड़ने लगते हैं तथा उत्पादन में गिरावट का खतरा बढ़ जाता है. बढ़ते तापमान और लगातार घटती जल उपलब्धता के बीच किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती फसल को स्वस्थ बनाए रखने की होती है.
ऐसे समय में कृषि वैज्ञानिक भी केवल सिंचाई बढ़ाने के बजाय ऐसी तकनीकों को अपनाने पर जोर देते हैं, जो पौधों को उपलब्ध नमी का अधिकतम उपयोग करने में सक्षम बनाएं और प्रतिकूल मौसम में भी उनकी वृद्धि को बनाए रखने में मदद करें. इसी दिशा में जायडेक्स कंपनी द्वारा विकसित जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पाद किसानों के लिए एक संभावित समाधान के रूप में सामने आए हैं. जायटॉनिक टेक्नोलॉजी एक पेटेंटेड, बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर आधारित तकनीक है, जिसे पौधों की प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है.
कंपनी के अनुसार, यदि मानसून कमजोर रहता है या सूखे जैसी परिस्थितियां बनती हैं, तो यह तकनीक पौधों को उपलब्ध प्राकृतिक नमी के बेहतर उपयोग में सहायता कर सकती है, जिससे फसल को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने और उत्पादन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
क्या है जायटॉनिक टेक्नोलॉजी?
जायटॉनिक टेक्नोलॉजी एक नई, पेटेंटेड और विशिष्ट तकनीक है, जो बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर पर आधारित है. इस तकनीक के आधार पर कंपनी ने कई कृषि उत्पाद विकसित किए हैं. हालांकि, मौजूदा खरीफ सीजन और मानसून की अनिश्चित परिस्थितियों को देखते हुए कंपनी के दो प्रमुख उत्पाद- जायटॉनिक सुरक्षा और जायटॉनिक एक्टिव किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माने जा रहे हैं. ये दोनों उत्पाद अलग-अलग तरीके से कार्य करते हैं, लेकिन इनका मुख्य उद्देश्य पौधों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना, सीमित जल उपलब्धता की स्थिति में फसल को सहारा देना, खेती की लागत कम करने में मदद करना और प्रतिकूल मौसम के दौरान फसल के बेहतर विकास में सहयोग करना है.
कम बारिश में कैसे काम करता है जायटॉनिक सुरक्षा?
जायटॉनिक सुरक्षा एक आधुनिक बायो-फर्टिलाइज़र है, जो छिड़काव के बाद पौधों की पत्तियों पर एक बेहद पतली परत बनाता है. सामान्य परिस्थितियों में रात के समय जो ओस गिरती है, वह आमतौर पर सूरज निकलते ही उड़ जाती है या नीचे गिर जाती है. जायटॉनिक सुरक्षा इस ओस को पकड़कर पत्तियों पर लंबे समय तक रोक कर रखता है और उनके सूक्ष्म छिद्रों (Stomata) के माध्यम से पौधे को उपलब्ध कराता है. इससे सूखे की स्थिति में भी पौधे को आवश्यक नमी मिलती रहती है. इसके अलावा, ओस में घुली कार्बन डाइऑक्साइड पौधों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचती है, जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को गति मिलती है. इसके परिणामस्वरूप पौधों में अधिक ऊर्जा का निर्माण होता है और उनकी बढ़वार सामान्य बनी रहती है.
गर्मी और सूखे की स्थिति में क्यों माना जा रहा है उपयोगी?
जब तापमान लगातार बढ़ता है और खेतों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होता, तब पौधों पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है. ऐसे समय में पौधे तेजी से मुरझाने लगते हैं और उनकी वृद्धि प्रभावित होती है. जायटॉनिक सुरक्षा ऐसी परिस्थितियों में पौधों को उपलब्ध प्राकृतिक नमी का बेहतर उपयोग करने में सहायता करता है. इससे पौधे अधिक समय तक हरे-भरे बने रहते हैं, नई पत्तियों का विकास जारी रहता है और सूखे के कारण होने वाला नुकसान कम किया जा सकता है. विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां बारिश का अंतराल अधिक होता है या सिंचाई की सुविधा सीमित है, वहां यह तकनीक किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है.
पौधों की सेहत और उत्पादन पर क्या पड़ता है असर?
प्रकाश संश्लेषण किसी भी पौधे के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. जब यह प्रक्रिया बेहतर ढंग से होती है तो पौधों में अधिक मात्रा में शर्करा और कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है. यही तत्व पौधों को ऊर्जा प्रदान करते हैं और उनकी जड़ों, तनों, पत्तियों, फूलों तथा फलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जायटॉनिक सुरक्षा इस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाकर पौधों को मजबूत, स्वस्थ और अधिक उत्पादक बनाने में सहायता करता है. इसका सकारात्मक प्रभाव फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर देखा जा सकता है.
10 से 15 दिनों तक बना रह सकता है प्रभाव
एक बार छिड़काव करने के बाद जायटॉनिक सुरक्षा का प्रभाव लगभग 10 से 15 दिनों तक बना रह सकता है. इसका लाभ यह है कि किसानों को बार-बार छिड़काव करने की आवश्यकता कम पड़ती है. इससे श्रम, समय और लागत तीनों की बचत होती है. इसे 500 ग्राम से 1 किलोग्राम (फसल की अवस्था के अनुसार) 150 – 200 लीटर पानी में मिलाकर सुबह या सूर्यास्त से लगभग दो घंटे पहले छिड़काव करने की सलाह दी जाती है. इसे अन्य उर्वरकों और कीटनाशकों के साथ भी मिलाकर उपयोग किया जा सकता है.
पौधों की सेहत और उत्पादन पर क्या पड़ता है असर?
प्रकाश संश्लेषण किसी भी पौधे के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. जब यह प्रक्रिया बेहतर ढंग से होती है तो पौधों में अधिक मात्रा में शर्करा और कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है. यही तत्व पौधों को ऊर्जा प्रदान करते हैं और उनकी जड़ों, तनों, पत्तियों, फूलों तथा फलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जायटॉनिक सुरक्षा इस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाकर पौधों को मजबूत, स्वस्थ और अधिक उत्पादक बनाने में सहायता करता है. इसका सकारात्मक प्रभाव फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर देखा जा सकता है.
10 से 15 दिनों तक बना रह सकता है प्रभाव
एक बार छिड़काव करने के बाद जायटॉनिक सुरक्षा का प्रभाव लगभग 10 से 15 दिनों तक बना रह सकता है. इसका लाभ यह है कि किसानों को बार-बार छिड़काव करने की आवश्यकता कम पड़ती है. इससे श्रम, समय और लागत तीनों की बचत होती है. इसे 500 ग्राम से 1 किलोग्राम (फसल की अवस्था के अनुसार) 150 – 200 लीटर पानी में मिलाकर सुबह या सूर्यास्त से लगभग दो घंटे पहले छिड़काव करने की सलाह दी जाती है. इसे अन्य उर्वरकों और कीटनाशकों के साथ भी मिलाकर उपयोग किया जा सकता है.
जायटॉनिक एक्टिव कैसे बढ़ाता है दवाओं की प्रभावशीलता?
जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों में से दूसरा प्रमुख उत्पाद है- जायटॉनिक एक्टिव. यह बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर आधारित कार्यक्षमता वर्धक विशिष्ट उत्पाद है. यह किसी भी कृषि उत्पाद (खाद, कीटनाशक, जैव उत्तेजक इत्यादि) की कार्य क्षमता बढ़ाकर लंबे और बेहतर परिणाम देता है. साथ ही इसके प्रयोग के साथ किसी अन्य स्टीकर या स्प्रेडर की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है. कंपनी के अनुसार इसे सीधे पानी में नहीं मिलाना चाहिए, बल्कि पहले कीटनाशक, फफूंदनाशक, खरपतवारनाशी या अन्य कृषि रसायन में मिलाकर, इसके बाद इसमे पानी मिलाकर छिड़काव किया जाता है. यह दवा को माइक्रो-एनकैप्सुलेट करने के साथ-साथ पत्तियों पर समान रूप से फैलाने और लंबे समय तक टिके रहने में मदद करता है. साथ ही यह स्प्रेडर और स्टीकर दोनों की भूमिका निभाता है, जिससे दवा बारिश होने पर भी जल्दी नहीं धुलती और उसका प्रभाव बेहतर बना रहता है.
खेती की लागत कम करने में भी हो सकता है सहायक
खेती में लागत कम करना आज सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है. कंपनी के अनुसार जायटॉनिक एक्टिव के उपयोग से किसानों को सामान्य मात्रा में भी दवाओं के उपयोग से उनकी प्रभावशीलता बढ़ती है, जिससे अधिक मात्रा में रसायनों के उपयोग की आवश्यकता कम हो सकती है. जहां कुछ रसायन सामान्य मात्रा मे काम नहीं करते हैं वहाँ एक्टिव को मिलने से पूरे परिणाम मिलते हैं. इसका प्रयोग रासायनिक खादों के slow release के लिए भी किया जा सकता है जिससे उनकी क्षमता बदने से मात्रा काम कि जा सकती है और किसान का खर्च कम हो सकता है.
सभी प्रमुख फसलों में किया जा सकता है उपयोग
जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों का उपयोग धान, कपास, गेहूं, दलहन, तिलहन, सब्जियों तथा फलदार वृक्षों सहित अनेक फसलों में किया जा सकता है. विभिन्न राज्यों के किसानों द्वारा इसके उपयोग के बाद सकारात्मक अनुभव देखने को मिला है. हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में परिणाम स्थानीय जलवायु, मिट्टी और फसल प्रबंधन पर भी निर्भर करेंगे.
बदलते जलवायु दौर में वैज्ञानिक तकनीक बन सकती है किसानों की ताकत
जलवायु परिवर्तन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य की खेती केवल पारंपरिक तरीकों के भरोसे नहीं चल सकती. कम होती वर्षा, बढ़ता तापमान और पानी की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए किसानों को ऐसी तकनीकों की आवश्यकता होगी जो उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें.
जायडेक्स कंपनी के जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पाद इसी सोच के साथ विकसित किए गए हैं. यदि इस वर्ष अल नीनो के कारण मानसून कमजोर रहता है, तो ऐसी तकनीकें किसानों को फसल की सेहत बनाए रखने, उत्पादन में संभावित गिरावट को कम करने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में सहायक साबित हो सकती हैं. हालांकि किसी भी कृषि उत्पाद का उपयोग करने से पहले किसानों को उसके लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लेनी चाहिए.
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