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सोयाबीन की टॉप 3 किस्में! कम समय में बेहतर उत्पादन, कई प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी

Soybean Varieties: सोयाबीन की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है, जिससे कम समय में अधिक उपज प्राप्त हो सकती है. ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा द्वारा विकसित सोयाबीन की ये 3 उन्नत किस्में किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. आइए जानें इन किस्मों की है क्या है विशेषताएं..

KJ Staff
soya
सोयाबीन की टॉप 3 किस्में (Image Source-AI generate)

खरीफ सीजन में किसान भाइयों के लिए सोयाबीन की खेती एक प्रमुख नकदी फसलों में से एक है. ऐसे में किसान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा द्वारा विकसित सोयाबीन की ये टॉप 3 उन्नत किस्में किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है, जिससे किसान कम समय में अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही सोयाबीन की किस्मों में अधिक उपज क्षमता, प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोध तथा बेहतर गुणवत्ता जैसी विशेषताएं शामिल होती है. आइए जानें.

1. पूसा सोयाबीन 9712

पूसा सोयाबीन 9712 राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली) के किसानों के लिए अनुशंसित किस्म है. यह खरीफ मौसम में सिंचित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त मानी जाती है. ऐसे में किसान अगर इस किस्म की पैदावार करते हैं, तो वह इससे उपज लगभग 115 दिनों में 22.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त कर सकते हैं.

विशेषताएं- इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मूंगबीन येलो मोजेक वायरस (MYMV) के प्रति प्रतिरोधी है. यह रोग सोयाबीन की फसल में पत्तियों को पीला कर देता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है और उत्पादन घट सकता है. ऐसे में यह किस्म किसानों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करती है.

2. पूसा 12

पूसा 12 उत्तरी मैदानी क्षेत्रों के लिए अनुशंसित किस्म है. यह खरीफ मौसम में सिंचित खेती के लिए उपयुक्त है. ऐसे में किसानों के लिए यह किस्म एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. किसान इस किस्म को 128 दिनों में तैयार कर 22.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं..

विशेषताएं- इस किस्म में मूंगबीन येलो मोजेक वायरस के साथ-साथ राइजोक्टोनिया ब्लाइट रोग के प्रति भी प्रतिरोध क्षमता पाई जाती है. इन रोगों से बचाव होने के कारण फसल स्वस्थ रहती है और किसानों को बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिल सकती है.

3. पूसा सोयाबीन 6

पूसा सोयाबीन 6 को वर्ष 2021 में विकसित किया गया और 2025 में इसे व्यापक रूप से अनुशंसित किया गया. यह किस्म राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली), पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. पूसा सोयाबीन 6 किस्म से किसान खरीफ मौसम की सिंचित परिस्थितियों में 21.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं.

विशेषताएं- इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसका बहु-रोग प्रतिरोध है. यह मूंगबीन येलो मोजेक वायरस, राइजोक्टोनिया ब्लाइट और बैक्टीरियल पस्ट्यूल जैसे प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी है. इसके अलावा इसमें स्टेम फ्लाई और डेफोलिएटर्स जैसे कीटों के प्रति मध्यम स्तर की सहनशीलता भी पाई जाती है.

गुणवत्ता की बात करें तो इस किस्म के पीले रंग के दाने आकर्षक होते हैं और इनमें 20.7 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है, जिससे यह प्रसंस्करण और तेल उत्पादन के लिए भी उपयोगी मानी जाती है.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Top 3 Soybean Varieties High yields Disease Resistant Published on: 03 August 2026, 05:42 PM IST

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