1. सफल किसान

देश-विदेश में ‘बरबरी गॉट फार्म’ की धूम, जानिए नईम कुरैशी से बकरी पालन की विधि

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मथुरा के रहने वाले नईम कुरैशी पिछले काफी समय से ‘बरबरी गॉट फार्म’ के नाम से अपना बकरी फार्म चला रहे हैं. उनका यह फार्म इलाके में गोल्डन गॉट कमर्शियल ट्रेनिंग सेंटर के नाम से भी मशहूर है. आज दूर-दूर से किसान वैज्ञानिक विधि से बकरी पालन की ट्रेनिंग लेने यहां आते हैं. इस ट्रेनिंग में किसानों को बकरियों की बीमारियों, डीवॉर्मिंग, खुराक और नस्ल सुधार संबंधी आदि की प्रमुख जानकारियां दी जाती है.

गौरतलब है कि ट्रेनिंग में हिस्सा लेने के लिए किसानों को मॉडर्न बकरी प्रशिक्षण केंद्र की तरफ से सर्टिफिकेट भी दिया जाता है. नईम कुरैशी बताते हैं कि ICAR-CIRG मखदूम से ट्रेनिंग लेने के बाद आज उनके फार्म में बरबरी, सिरोही, जमुनापरी और बीटल नस्ल की लगभग 350 बकरियां हैं. लेकिन सफलता की इस बड़ी कहानी की शुरूआत छोटे कदमों से ही हुई थी.

2007 में शुरू किया था बकरी फार्म

नईम कुरैशी के अनुसार मई, 2007 में उन्होंने मात्र 10 बकरियों के साथ अपना बकरी फार्म शुरू किया था. बाद में CIRG के साइंटिस्ट ने उनके फार्म का दौरा किया और उन्हें बकरी पालन में, शुद्ध नस्ल की बकरियों, प्रजनन स्टॉक, प्रभावी मार्केटिंग रणनीति और बाजार लिंकेज के बारे में कुछ सुझाव दिए. आज उन्हीं सुझावों पर काम करने के कारण उन्हें यह सफलता मिली है.

देश-विदेश में मशहूर है बरबरी गॉट फार्म की बकरियां

आज के समय में ‘बरबरी गॉट फार्म’ की बकरियों की मांग सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है. नईम कुरैशी की बकरियां भूटान, वियतनाम और नेपाल जैसे देशों में भी खूब पसंद की जाती है.

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बकरी खरीदते समय दें ध्यान

नईम कुरैशी कहते हैं कि हमारे यहां बकरी को गरीब की गाय कहा जाता है. निसंदेह बकरी पालन से मुनाफा हो सकता है, लेकिन इसके पालन में कुछ बातों का खास ख्याल रखा जाना चाहिए. बरसात के मौसम में इन्हें विशेष देख-भाल की जरूरत होती है. बकरी के लिए गीले स्थान का होना रोगों को दावत है. इसलिए साफ-सफाई को बनाएं रखना आवश्यक है.

प्रजनन क्षमता

बकरी खरीदते समय पशुपालकों को उसकी सेहत पर ध्यान देना चाहिए. एक बकरी लगभग डेढ़ वर्ष की अवस्था में बच्चा देने में समक्ष हो जाती है और 6-7 माह में दो से तीन बच्चा देती है. बकरी के छोटे बच्चे का पालन एक वर्ष तक अधिक गंभीरता से करना चाहिए.  

बकरियों में प्रमुख रोग

नईम कुरैशी बताते हैं कि देशी बकरियों में मुख्यतः मुंहपका, खुरपका एवं पेट के कीड़ों आदि की शिकायत आती है. इसके साथ ही कई बार उन्हें खुजली की समस्या भी होती है. इस तरह की बीमारियें के लक्षण प्रायः बरसात के मौसम में देखे जाते हैं. इसलिए ऐसी स्थिती में अगर देशी उपचार से रोग सही न हो, तो पशु डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

बकरी पालन में है लाभ

नईम कुरैशी के मुताबिक बकरी पालन संयम का काम है. इस क्षेत्र में लाभ बहुत हद तक आपकी मेहनत पर निर्भर करता है. रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं या अधिक आय की चाहत रखने वाले किसानों के लिए बकरी पालन एक अच्छा व्यवसाय है. आज इस काम को शुरू करने के लिए राज्य एवं केंद्र सरकार कई तरह की योजनाएं भी चला रही है, जिसका किसान लाभ उठा सकते हैं.

बकरी पालन से जुड़ी समस्याओं
, आमदनी, ट्रेनिंग या किसी भी तरह की जानकारी के लिए आप 9719807079 पर कॉल कर नईम कुरैशी से संपर्क कर सकते हैं.

(
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English Summary: goat farming can give huge profit to farmers know more about goat farming from naim qureshi

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