1. विविध

बृहस्पति के चंद्रमा गैनीमेड पर खोजा जलवाष्प का पहला सबूत

स्वाति राव
स्वाति राव

Moon Ganymede

अंतरिक्ष में जब भी  कुछ नया देखने को मिलता है. उस हर घटना को अक्सर खगोल वैज्ञानिक कैप्चर कर पूरी दुनिया के साथ साझा करते हैं. और लोग भी अंतरिक्ष की खूबसूरती को देखने के लिए बेहद उत्सुक रहते हैं. एक बार फिर अंतरिक्ष की एक बहुत ही खुबसूरत और आकर्षक तस्वीर सामने आई है. बता दें इस बार अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को अंतरिक्ष में ऐसा कुछ मिला है जिसे देखकर हर कोई आश्चर्यचकित रह जायेगा . नासा की  आश्चर्यचकित  करने वाली खबर जानने के लिए पढ़िए इस पूरे लेख को.

दरअसल, नासा के वैज्ञानिकों  ने पहली बार नासा के हब्ब्ल स्पेस टेलीस्कोप का इस्तेमाल करते हुए बृहस्पतिके बर्फीले चंद्रमा गैनीमेड के वातावरण में जलवाष्प का पहला सबूत खोजा है. वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की बर्फीली सतह से जलवाष्प के थर्मल पलायन की खोज की,  जो गैनीमेड पर एक उच्चीकृत जल वातावरण की ओर इशारा करता है. बता दें कि  बृहस्पति का चंद्रमा गैनीमेडहमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा चंद्रमा और नौवां सबसे बड़ा खगोलीय पिंड है.

हब्ब्ल स्पेस टेलीस्कोप- Hubble Space Telescope

सन 1990 में नासा ने हब्ब्ल स्पेस टेलीस्कोप लॉन्‍च किया था, जिससे अंतरिक्ष में होने वाली हर गतिविधि पर नज़र रखी जा सके. हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी (Hubble Space Telescope (HST)) वास्तव में एक खगोलीय दूरदर्शी है जो अंतरिक्ष में कृत्रिम उपग्रह के रूप में स्थित है.

इसे २५ अप्रैल सन् १९९० में अमेरिकी अंतरिक्ष यान डिस्कवरी की मदद से इसकी कक्षा में स्थापित किया गया था. हबल दूरदर्शी को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ' नासा ' ने यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से तैयार किया था.  अमेरिकी खगोल विज्ञानी एडविन पोंवेल हबल के नाम पर इसे ' हबल ' नाम दिया गया.

बृहस्पति के चंद्रमा गैनीमेड पर जलवाष्प बनने का कारण–Water Wasp Formed on Jupiter's Moon Ganymede

बृहस्पति के  चंद्रमा गैनीमेड पर जलवाष्प तब बनती  है जब चंद्रमा की सतह से बर्फ ऊपर की ओर उठती है तब यह वर्फ गैस में परिवर्तित हो जाती है. लेकिन गैनीमेड का तापमान इतना ठंडा होता है कि सतह पर पानी जम जाता है. यह बर्फ से ढ़की एक दुनियां है जिसमें पृथ्वी के सभी महासागरों की तुलना में अधिक पानी हो सकता है, लेकिन गैनीमेड का महासागर 100 मील मोटी, बर्फीली परत के नीचे मौजूद हैं. 

यह खोज कैसे हुई? - How did this discovery happen?

वर्ष, 1998 में बृहस्पति के चंद्रमा गैनीमेड की पहली पराबैंगनी तस्वीरें हब्ब्ल के स्पेस टेलीस्कोप इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ ली गई थीं.

इन छबियों ने चंद्रमा के वातावरण से देखे गए उत्सर्जन में एक पैटर्न का खुलासा किया.
शोधकर्ताओं ने दो पराबैंगनी प्रेक्षणों के बीच समानता को आणविक ऑक्सीजन( O2 ) की उपस्थिति के कारण माना.

दो पराबैंगनी प्रेक्षणों के बीच अंतर को परमाणु ऑक्सीजन (O )की उपस्थिति से समझाया गया था, जो एक संकेत उत्पन्न करता है जो एक यू . वी. रंग को दूसरे की तुलना में अधिक प्रभावित करता है.

वैज्ञानिकों ने वर्ष 2010 और वर्ष 1998 की छबियों  के साथ वर्ष 2018  में ली गई नई स्पेक्ट्रा(छबि रंग) का संयुक्त विश्लेषण किया.

वैज्ञानिकों ने तब यह पाया कि, वर्ष 1998 के डाटा की मूल व्याख्या के अतिरिक्त, गैनीमेड के वायुमंडल में शायद ही कोई परमाणु ऑक्सीजन थी.

वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि, जलवाष्प की उत्पत्ति बर्फ के उर्ध्वपातक से होती है, जो गर्म बर्फीले क्षेत्रों से  H2O  वाष्पके ऊष्मीय पलायन के कारण होता है.

ऐसी ही अंतरिक्ष से जुड़ी खोज जानने और कृषि संबंधित ख़बरों के लिए पढ़ते रहिये कृषि जागरण हिंदी पोर्टल.

English Summary: NASA scientists use hubble space telescope to find first evidence of water vapor on Jupiter's moon ganymede

Like this article?

Hey! I am स्वाति राव. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News