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विदेशों में भारतीय चावल की बढ़ती मांग से क्यों घबराया पाकिस्तान ? आइए जानते हैं पूरा मामला

Rice

चावल को दुनिया की 60 फीसदी आबादी का भोजन माना जाता है. वहीं भारत की यह मुख्य  फसल है. आज दुनिया के 100 से अधिक देशों में चावल का उत्पादन होता है. दुनिया में सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश चीन है. चीन के बाद भारत में ही चावल का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है. वहीं बासमती चावल के उत्पादन में भारत पहले पायदान पर है. आज भारतीय बासमती समेत अन्य किस्मों का चावल दुनियाभर में पसंद किया जा रहा है. यही वजह है कि चालू वित्त वर्ष में पाकिस्तान के चावल के निर्यात में तेजी से गिरावट आई है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर क्यों बढ़ रही है भारतीय चावल की मांग, पाकिस्तानी चावल की तुलना में -

बेहद सस्ता और स्वादिष्ट

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बासमती तथा अन्य किस्मों के चावल की मांग दुनियाभर में बढ़ गई है. वहीं पाकिस्तान चावल की मांग अंर्तराष्ट्रीय बाजार में लगातार घट रही है.  इससे पाकिस्तान सरकार चिंतित नज़र आ रही है. इस रिपोर्ट में स्विट्जरलैंड के एक चावल व्यापारी के हवाले से बताया है कि भारतीय चावल सस्ता होने के कारण विदेशियों को खूब भा रहा है.  व्यापारी का कहना हैं कि अगर भारत और पाकिस्तान का चावल एक ही कीमत पर मिलें, तब भी वह भारतीय चावल ही पसंद करेंगे. इसकी सबसे बड़ी वजह है पाकिस्तानी चावल की तुलना में भारतीय चावल खाने में बेहद स्वादिष्ट है. साथ ही आसानी से पक जाता है.

 

अफ्रीकी लोगों को भा रहा है भारतीय चावल 

स्विटजरलैंड के इस व्यापारी का दावा हैं कि भारतीय चावल को खरीदकर वे अफ्रीकी देशों में बेचते हैं. दरअसल, अफ्रीकी लोगों को भारतीय चावल खूब भा रहा है. व्यापारी का कहना हैं कि वैसे तो भारतीय और पाकिस्तानी चावल में गुणवत्ता के लिहाज से कोई खास अंतर नहीं है. फिर भी भारतीय चावल पाकिस्तानी चावल की तुलना में थोड़ा सस्ता व स्वादिष्ट होता है. इस वजह से भारत के चावल की मांग अधिक है.  

जीआई टैग के लिए यूरोपीय संघ में आमने-सामने 

बता दें कि भारत और पाकिस्तान चावल निर्यात में एक दूसरे के प्रतिद्वंदी माने जाते हैं.  वहीं दोनों देश बासमती चावल के जीआई टैग के रजिस्ट्रेशन के लिए यूरोपीय संघ में आमने-सामने हैं.  दरअसल, भारत ने बासमती चावल जीआई टैग के लिए यूरोपीय संघ में आवेदन किया था. जिसके जवाब में पाकिस्तान ने भी अपना केस फाइल कर दिया था.  

 

14 फीसद की गिरावट

पाकिस्तानी चावल निर्यातकों का कहना हैं कि वैश्विक बाजार में भारत अपनी धाक जमाने के लिए लागत से भी कम कीमत में चावल निर्यात कर रहा हैं. इस वजह से भारतीय चावल की मांग दुनियां के अन्य देशों में बढ़ रही है. वर्ष  2020-2021 के शुरूआती 11 महीनों में पाकिस्तान को वैश्विक बाजार में चावल निर्यात में काफी घाटा उठाना पड़ा है. इस दौरान बासमती तथा अन्य किस्मों के चावल निर्यात में, लगभग 14 फीसदी की कमी आई है. जहां पाकिस्तान ने इन 11 महीनों में इस साल 33 लाख टन चावल का निर्यात किया है, वहीं इतने ही समय में पिछले वर्ष लगभग 38 लाख टन चावल का निर्यात किया था.

क्यों सस्ता पड़ता है भारतीय चावल

रिपोर्ट में पाक व्यापारियों ने बताया कि पाकिस्तान वैश्विक बाजार में चावल को औसतन 450 डॉलर प्रति टन में बेचता है. वहीं इसी गुणवत्ता का भारतीय चावल 360 डॉलर प्रति टन में बिकता है. भारतीय चावल की मांग को देखते हुए पाकिस्तान के अलावा थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों का चावल निर्यात भी प्रभावित हो रहा है. गौरतलब है कि अंर्तराष्ट्रीय बाजार में इस समय भारतीय चावल की कीमत 360 से 390 डॉलर प्रति टन है. वहीं पाकिस्तान चावल की कीमत 440 से 450 डॉलर प्रति टन है. बता दें कि भारतीय बासमती के साथ अन्य किस्मों के चावल की मांग भी खूब बढ़ी है. इस वित्त वर्ष में अन्य किस्मों के चावल निर्यात में 136 फीसदी की वृद्धि हुई है. वहीं बासमती चावल के निर्यात में भी बढ़ोत्तरी हुई है. पाकिस्तानी चावल निर्यातकों का कहना हैं कि भारत में चावल उत्पादन करने वाले किसानों को भारत सरकार सब्सिडी प्रदान करती है. इस वजह से चावल लागत कम आती है. वहीं भारत से विदेशों तक चावल भेजना भी पाकिस्तान की तुलना में सस्ता पड़ता है.

 

English Summary: why did Pakistan panic over the increasing demand for Indian rice abroad? let's know the whole matter

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