1. Home
  2. ख़बरें

पुणे स्थित आईसीएआर के राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान के निदेशक को कारण बताओ नोटिस, ढीलपोल पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का सख्त रूख

शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में संस्थानों की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और गुणवत्ता पर सख्त दिशा-निर्देश दिए गए। आइए पूरी खबर पढ़ें।

KJ Staff
shivraj singh chouhan
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुणे से लौटकर दिल्ली में ली बैठक
  • आईसीएआर के फाउंडेशन डे 16 जुलाई से पहले संस्थागत सुधारों का रोडमैप पूरा करने के शिवराज सिंह चौहान ने दिए निर्देश

  • केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुणे से लौटकर दिल्ली में ली बैठक

  • किसानहित सर्वोपरि, सभी संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सख्त निगरानी होगी- शिवराज सिंह चौहान

  • आईसीएआर के 113 संस्थानों का होगा औचक निरीक्षण, तय होंगे परफार्मेंस के पैरामीटर- शिवराज सिंह

  • अच्छे संस्थानों को प्रोत्साहन और लापरवाही पर कार्रवाई- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह के स्पष्ट निर्देश

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अध्यक्ष के रूप में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कल दिल्ली में आईसीएआर के महानिदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक लेकर संस्थानों की कार्यप्रणाली, जवाबदेही, गुणवत्ता और किसानोन्मुख परिणामों को लेकर स्पष्ट और सख्त दिशा तय की। उन्होंने कहा कि आईसीएआर की संस्थाएं देश की कृषि प्रगति की धुरी हैं, इसलिए इनके कामकाज में उत्कृष्टता, दृष्टि, जवाबदेही और परिणाम अनिवार्य हैं।

बैठक की शुरुआत में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुणे स्थित आईसीएआर के राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान के 15 मई को औचक निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों, अव्यवस्थाओं और कार्यप्रणाली संबंधी कमजोरियों पर गंभीर नाराजगी और कड़ी आपत्ति दर्ज की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वहां पर उपस्थित मुख्य अधिकारी को अंगूर संस्थान के बारे में बेसिक जानकारी भी नहीं थी। पहले मुझे फील्ड पर जाने से टाला गया, कहा कि अभी अंगूर नहीं है। वहां पहुंचने पर देखा कि नर्सरी में घास उगी हुई है। काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे ऐसा जवाब कहां तक उचित है? वहां के प्रमुख अधिकारी किसी भी सवाल का उचित जवाब नहीं दे पाए, मेरे पूछने पर कि एक्सपोर्ट के लिए क्या कर रहे है, रोगों से निपटने के क्या प्रबंध है, वैरायटी को बढ़ाने की योजना है, कोई भी जवाब संतोषजनक नहीं था। उनके पास कोई विजन नहीं था। ग्रेप्स संस्थान का प्रस्तुतिकरण भी बहुत नीरस था। किसानों ने मुझसे कहा कि हम वैरायटी निजी नर्सरी से लेते है, यहां की वैरायटी किसी उपयोग की नहीं रहती है।

शिवराज सिंह चौहान ने डीडीजी (बागवानी) डॉ. एस.के. सिंह से भी बैठक में सवाल किए कि आप डीडीजी होने के नाते क्या देख रहे थे, आप कब से संस्थान के दौरे पर नहीं गए, आपका अंतिम दौरा कब था, डीडीजी के नाते आपकी जिम्मेदारी भी है आपके अंतर्गत आने वाले संस्थान सही तरीके से काम करे। हम किसानों और देश के लिए काम कर रहे है। ऐसी अव्यवस्था और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर ऐसे संस्थान चल रहे तो यह नेशनल लॉस है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि निरीक्षण के दौरान जो स्थिति सामने आई, उससे वे बहुत निराश हुए हैं और यह स्पष्ट संकेत है कि कुछ संस्थानों में व्यवस्थागत सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान में बुनियादी जानकारी, स्पष्ट कार्ययोजना, किसानों के लिए उपयोगी अनुसंधान, निर्यातोन्मुख दृष्टि, रोग प्रबंधन की तैयारी तथा बेहतर किस्मों के विकास और प्रसार पर ठोस काम दिखना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि यदि किसान निजी नर्सरियों से सामग्री लेने को मजबूर हों और संस्थान की उपयोगिता पर प्रश्न उठाएं, तो यह आत्ममंथन का विषय है।

उन्होंने कहा कि अनुसंधान संस्थानों का लक्ष्य केवल औपचारिक कामकाज नहीं, बल्कि खेत, किसान और बाजार की वास्तविक जरूरतों का समाधान देना होना चाहिए।  चौहान ने बैठक में अधिकारियों से सीधे प्रश्न करते हुए संस्थागत निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय होना जरूरी है, क्योंकि प्रत्येक अधिकारी की जिम्मेदारी है कि उसके अधीन संस्थान सक्रिय, परिणामोन्मुख और किसानहितैषी ढंग से कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों और देश के हित में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अव्यवस्था या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।

shivraj singh chouhan 2

बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान, पुणे के निदेशक डॉ. कौशिक बनर्जी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए और जवाब संतोषजनक न पाए जाने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि संस्थानों में निदेशक नियुक्ति की प्रक्रिया, वैज्ञानिकों की नियुक्ति व्यवस्था तथा प्रशासनिक और वैज्ञानिक नेतृत्व के चयन तंत्र पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण उन्हें उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रणालीगत सुधार के लिए समग्र समीक्षा की जा सके।

चौहान ने आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट को निर्देश दिया कि 8 से 10 सदस्यों की टीम गठित कर आईसीएआर की सभी 113 संस्थाओं का औचक निरीक्षण कराया जाए। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी विभिन्न संस्थानों का औचक निरीक्षण करेंगे। उनका स्पष्ट संदेश था कि निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियां निकालना नहीं, बल्कि संस्थानों की वास्तविक स्थिति समझकर उन्हें अधिक सक्षम, उत्तरदायी और प्रभावशाली बनाना है।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आईसीएआर की सभी संस्थाओं के लिए स्पष्ट प्रदर्शन मानक और पैरामीटर तय किए जाएंगे। इन्हीं मानकों के आधार पर संस्थानों की रैंकिंग तैयार होगी। जो संस्थान उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे, उन्हें प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाएगा, जबकि निर्धारित मानकों पर खरा न उतरने वाले संस्थानों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और परिणामकेंद्रित संस्थागत संस्कृति विकसित करना है।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने सभी संस्थानों की रिव्यू बैठकें आयोजित करने के निर्देश भी दिए और कहा कि 16 जुलाई को आईसीएआर के फाउंडेशन डे से पहले यह पूरा सुधारात्मक एजेंडा आगे बढ़ा हुआ दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि कृषि अनुसंधान तंत्र को अधिक जीवंत, उत्तरदायी और किसान-केंद्रित बनाने का अभियान है।

शिवराज सिंह चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि आईसीएआर के सभी संस्थान कमजोर नहीं हैं। उन्होंने करनाल स्थित गेहूं संस्थान के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जहां अच्छे परिणाम मिल रहे हैं, उन्हें मॉडल के रूप में सामने लाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जो संस्थान अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें सम्मान और प्रोत्साहन मिलना चाहिए, जबकि जहां सुधार की जरूरत है, वहां समयबद्ध और गंभीर प्रयास होने चाहिए। बैठक में चौहान ने कहा कि उनका उद्देश्य संस्थागत क्षमता को मजबूत करना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पूरी टीम एकजुट होकर कमियों की पहचान करे, उनका समाधान निकाले और किसान तथा देश की सेवा के सर्वोच्च उद्देश्य के साथ काम करे।

उन्होंने कहा कि आईसीएआर जैसी संस्थाओं की शक्ति भारत की कृषि को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है, इसलिए हर स्तर पर प्रतिबद्धता, दृष्टि और परिणाम सुनिश्चित किए जाएंगे।

English Summary: Shivraj Singh Chouhan Strict Action Icar Grapes Research Centre pune Director Notice Published on: 17 May 2026, 01:36 PM IST

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News