किसान अब नहीं करेगा आत्महत्या, अब सिर्फ संघर्ष होगा...

 

महाराष्ट्र में हुए किसान आंदोलन की तर्ज पर अखिल भारतीय किसान सभा उत्तर प्रदेश में भी वैसा ही आंदोलन करने की तैयारी कर रहा है। लक्ष्मण मेला मैदान में गुरुवार को आयोजित किसान प्रतिरोध रैली की सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष व महाराष्ट्र किसान आंदोलन के नायक अशोक धवले ने यह बात कही।

रैली में प्रदेश के करीब चार हजार किसान शामिल हुए। अशोक ने कहा कि अब किसान आत्महत्या नहीं, बल्कि संघर्ष करेगा। महज अभी किसान प्रतिरोध के रूप में है लेकिन अगर प्रदेश सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो पूरे प्रदेश का किसान लखनऊ घेरने को विवश हो जाएगा। प्रदेश में गांव-गांव पदयात्रा, तहसील, जिलाधिकारी कार्यालय व विधानसभा का घेराव करने की तैयारी की जा रही है।

अशोक ने कहा कि प्रदेश में किसान की समस्या एक बड़ा मुद्दा है। बीजेपी सरकार ने यहां के किसानों के साथ जो छलावा किया है उसका ही परिणाम गोरखपुर और फूलपुर की सीट पर हार के रूप में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि किसानों का कर्जा माफ होना चाहिए, साथ ही फसल के सही दाम मिलने चाहिए।

डॉ. स्वामीनाथन की सिफारिश है कि किसानों को लागत खर्च और 50 फीसद मुनाफा मिलना चाहिए। रैली में किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव हन्नान मौला, सीपीएम पोलित ब्यौरो मेंबर सुभाषिनी अली, किसान सभा प्रदेश सचिव मुकुट सिंह, प्रदेश अघ्यक्ष भारत सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।

किसानों के हाथों में पांच सौ से अधिक लाल झंडे थे। वहीं, दूसरे हाथ में जो स्लोगन लिखी तख्तियां थी उन पर अंग्रेजी तक में स्लोगन लिखे थे। किसी पर लिखा था कि 'इनफ नो मोर फार्मस सूईसाइड', 'फ्री फार्मर्स फ्राम ऑल डेब्टस', 'बिजली के बढ़े हुए दाम वापस लो', 'पूंजीपतियों संग यारी, किसानों संग गद्दारी नहीं चलेगी', 'खाद, बीज पानी सस्ता करो', 'किसानों की फसल का डेढ़ गुना दाम दो'।

धवले ने मौके पर प्रदेश के किसानों से महाराष्ट्र आंदोलन का अनुभव सांझा किया। उन्होंने बताया कि नासिक से हाइवे पर 25 हजार किसानों ने पांच किलोमीटर मार्च निकाला था। किसानों की संख्या 12 मार्च को मुंबई तक पहुंचते 50 हजार से अधिक हो गई थी। किसानों का उत्साह बढ़ाने के लिए जगह-जगह उनका स्वागत हुआ। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को तीन घंटे किसानों के साथ बैठना पड़ा था। हमारी 95 फीसद मांगें मान ली गईं हैं। सरकार से लिखित में लेने के बाद आंदोलन वापस लिया गया। फिर 13 मार्च को विधानसभा पटल पर रखा गया।

अमूमन जमीन और फसल से जुड़े रहने वाला किसान नेता इस रैली में मार्डन अवतार में दिखे। वह आंदोलन से जुड़ी पल-पल की जानकारियां सोशल साइट्स पर अपडेट करते रहे। फेसबुक पर उनके प्रतिरोध रैली उत्तर प्रदेश किसान सभा के पेज पर 13 हजार से अधिक लाइक्स और फॉलोवर्स देखे जा सकते हैं। ऐसी ही जागृति ट्विटर पर भी दिखी।

रैली में बुलंदशहर के रतन गंभीर स्टॉर गायक रहे। किसानों ने उनके गीतों पर दाद ही नहीं ईनाम भी दिए। उन्होंने 'जीने का हक छीना जा रहा है' और 'ये ठगिया मौज उड़ाय गये, हमे लूटलूट के खा गए' जैसे कई गीत सुनाए। साथ ही बुलंदशहर के लखपत सिंह, सुलतानपुर के रामचेत, मैनपुरी के महबूब, मऊ के हफीज साहब, गाजीपुर के उदल राजभर, इलाहाबाद के विकास स्वरूप व राम प्रकाश, फतेहपुर के चंद्र पाल, ने भी गीत सुनाए।

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