1. Home
  2. ख़बरें

औषधीय पौधों की खेती को मिलेगा बढ़ावा, सरकार किसानों को देगी ₹36 हजार प्रति हेक्टेयर तक अनुदान

Medicinal Plants Subsidy: बिहार के किसानों को राज्य सरकार ने बड़ी सौगात दी है कि राज्य में अब औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार के इस फैसले से किसानों को बड़ा फायदा होने वाला है. यानी की राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती करने पर प्रदान करेंगी प्रति हेक्टेयर 36 हजार तक सब्सिडी की छूट…

KJ Staff
medicinal plants
औषधीय पौधों की खेती पर मिलेगा भारी अनुदान (Image Source-AI generate)

अगर आप बिहार के किसान है और औषधीय पौधों की खेती करने की योजना बना रहे हैं. तो यह खबर आपके लिए बेहद ही उपयोगी साबित हो सकती है. बिहार सरकार ने राज्य में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए योजना एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में औषधीय पौधों के क्षेत्र विस्तार को मंजूरी दी है, जिसके तहत किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए ₹36,000 प्रति हेक्टेयर अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा. पूरी खबर आगे पढ़ें..

100 हेक्टेयर में होगी औषधीय पौधों की खेती

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए MIDH के अंतर्गत औषधीय पौधों के क्षेत्र विस्तार का भौतिक लक्ष्य 100 हेक्टेयर निर्धारित किया है. इस क्षेत्र में अलग-अलग औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा. इनमें एलोवेरा, अश्वगंधा, ब्राह्मी और शतावरी प्रमुख हैं.

वहीं, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, राज्य सरकार कृषि को अधिक विविध और किसानों के लिए लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है. औषधीय पौधों की खेती किसानों को पारंपरिक खेती के अतिरिक्त आय के संभावित विकल्प उपलब्ध करा सकती है. इसी उद्देश्य से चयनित क्षेत्रों में इसे योजनाबद्ध तरीके से बढ़ावा देने की तैयारी है.

किसानों को कितना मिलेगा अनुदान?

औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों के लिए योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अनुदान है. इसके तहत पात्र किसानों को ₹36,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी. कुल 100 हेक्टेयर के लक्ष्य के लिए सरकार ने ₹36 लाख की राशि निर्धारित की है. इस वित्तीय सहायता से किसान नई फसलों को अपनाने में होने वाली शुरुआती लागत के एक हिस्से को पूरा कर सकेंगे.

चार प्रमुख औषधीय पौधों पर फोकस

योजना के तहत चार प्रमुख औषधीय पौधों को शामिल किया गया है. एलोवेरा, अश्वगंधा, ब्राह्मी और शतावरी की खेती के लिए उपयुक्त क्षेत्रों का चयन किया जाएगा और किसानों को इससे जोड़ा जाएगा और साथ ही सरकार औषधीय पौधों की बढ़ती मांग को देखते हुए इन फसलों को किसानों के लिए वैकल्पिक खेती के रूप में विकसित करने पर जोर दें रही है. 

क्लस्टर आधारित खेती पर जोर

औषधीय पौधों की खेती को अलग-अलग क्षेत्रों में बिखरे हुए तरीके से कराने के बजाय क्लस्टर आधारित मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके तहत एलोवेरा, अश्वगंधा और ब्राह्मी की खेती के लिए प्रति राजस्व ग्राम या क्लस्टर 5 हेक्टेयर क्षेत्र चिन्हित किया जाएगा.

वहीं, शतावरी की खेती के लिए प्रति राजस्व ग्राम या क्लस्टर 4 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया जाएगा. इस तरह चयनित क्षेत्रों में एक ही प्रकार या निर्धारित औषधीय फसल का अपेक्षाकृत संगठित उत्पादन विकसित करने में मदद मिलेगी.

तकनीकी मार्गदर्शन और उत्पादन में मिलेगी मदद

क्लस्टर आधारित खेती से किसानों को कई स्तरों पर सुविधा मिलने की उम्मीद है. एक ही क्षेत्र में औषधीय पौधों की खेती होने से किसानों तक तकनीकी जानकारी और उत्पादन संबंधी मार्गदर्शन पहुंचाना आसान होगा.

इसके अलावा खेती से जुड़ी गतिविधियों को व्यवस्थित करने और किसानों को बाजार एवं विपणन से जोड़ने में भी क्लस्टर मॉडल उपयोगी हो सकता है. इससे किसानों को खेती के तरीके, फसल प्रबंधन और उत्पादन से जुड़ी जानकारी एक संगठित व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराने में सुविधा होगी.

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने क्या कहां?

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना किसानों को खेती के नए विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. राज्य में इस क्षेत्र की संभावनाओं को देखते हुए चयनित क्षेत्रों में इसका विस्तार किया जाएगा. यानी कुल मिलाकर, MIDH के तहत 100 हेक्टेयर में औषधीय पौधों की खेती और ₹36,000 प्रति हेक्टेयर अनुदान की योजना बिहार के किसानों के लिए नई कृषि गतिविधियों को अपनाने का अवसर प्रदान कर सकती है. 

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Bihar Government Subsidy Medicinal Plants Farming Published on: 21 September 2026, 11:59 AM IST

Like this article?

Hey! I am KJ Staff. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News