Poetry

हुस्न के चक्कर में !

नेता हो अभिनेता हो या कोई बाबा

टिका नहीं कोई टक्कर में

बड़े-बड़े लटक गए

हुस्न के चक्कर में

 

ये बाल ये गाल और अदाएं

किसी को गुड़ चाहिए कोई डूब गया शक्कर में

आने वाले भी जाने वाले भी

सब हुस्न के चक्कर में

गली में उसकी बीता दी शामें

बदनाम हो गए शहर-भर में

कहां गए दिन कहां गईं रातें

हुस्न के चक्कर में

 

घरवालों ने खूब कोसा, दोस्तों ने समझाया

भटकने लगे घर - घर में

वो थी ही नहीं सिर्फ मैं था

हुस्न के चक्कर में



English Summary: indian beauty forever

Share your comments


Subscribe to newsletter

Sign up with your email to get updates about the most important stories directly into your inbox

Just in