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क्यों न करें मिट्टी पर नाज़ !

एक कविता देश के लिए, मिट्टी के लिए ,वतन के लिए "क्यों न करें मिट्टी पर नाज़ !"

गिरीश पांडेय
गिरीश पांडेय
Patriotic
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जिस मिट्टी में जन्म हुआ

जो है हमारे सर की ताज

पाल रही है जो हमें

क्यों न करें उस पर नाज़ !

 सौंधी खुशबू है जिसमें

  जिसपर भोगे सारे राज

  सिर्फ समर्पण है भाव जिसका

   क्यों न करें उस पर नाज़ !

नाच-गाने सब खेल-खिलौने

और दूसरे काम-काज

सीचा है इस मिट्टी ने हमें

क्यों न करें इस पर नाज़ !

सब खाते हैं इसकी रोटी

कुत्ता, बिल्ली, सियार, बाज़

अहसान नहीं धन्यवाद के लिए

ज़रुर करो मिट्टी पर नाज़ !

English Summary: Why not dirt on the country Published on: 16 February 2019, 02:26 IST

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