देश में इस समय त्योहारों चल रहे हैं और इस दौरान हर भारतीय रसोई में घी के पकवान बनाएं जाते हैं चाहे लड्डू हो या मिठाई हर पकवान में घी का इस्तेमाल किया जाता है. इसी बीच बाजारों में घी में मिलावट की खबरें सामने आ रही है कि बाजारों में लोग घी में खाद्य तेल या वनस्पति वसा का इस्तेमाल कर मिलावटी घी को धड़ल्ले से बेच रहे हैं. ऐसे में लोगों के डर सता रहा है कि कहीं वह मिलावटी घी का तो सेवन नहीं कर रहे तो घबराएं नहीं आगे इस लेख में जानें असली घी के पहचान करने के तरीके.
हथेली पर रख जांचे
अगर आप बाजार से घी खरीदने जा रहे हैं तो इस बात का विशेष रुप से ख्याल रखें कि मिलावटी घी की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है. ऐसे में घी खरीदते वक्त आप इसकी जांच अवश्य करें. यानी की आप मिलावटी घी को पहचान सकते हैं हथेली टेस्ट से सबसे पहले आप घी को हथेली पर रखें और उसके बाद घी को हल्के हाथ से रगड़े और घी खुशबू से परखे की घी असली या फिर नकली. इस आसान तरीक से भी आप घी की पहचान कर सकते हैं.
घी को गर्म करके खुशबू से पहचाने
अगर आपके घरों में पकवनों में घी का इस्तेमाल होता आ रहा है तो आप असली घी की पहचान उसकी सुगंध से ही कर सकते हैं. ऐसे में असली घी की पहचान के लिए आप एक कटोरी में हल्का घी डालकर गर्म करें और उसके बाद उसकी खुशबू से पहचान करने की कोशिश करें की घी असली या नकली यानी की अगर घी में जलने की या फिर केमिकल जैसी गंध आए तो समझ जाए की घी मिलावटी है.
सिर्फ रंग देखकर न करें फैसला
अक्सर लोगों के बीच यह धारणा रहती है कि ज्यादा पीला घी ही असली होता है या सफेद घी नकली हो सकता है. यह सोच सही नहीं है. घी का रंग दूध के प्रकार, पशु के आहार और घी बनाने की प्रक्रिया समेत कई कारकों से प्रभावित हो सकता है.
घी हल्का पीला, क्रीम या सुनहरे रंग का हो सकता है. इसी तरह तापमान के अनुसार इसकी बनावट भी बदलती रहती है. गर्म मौसम में घी अधिक पिघला हुआ और ठंडे मौसम में जमा हुआ दिखाई दे सकता है. इसलिए रंग और texture को अकेले आधार बनाकर निर्णय नहीं लेना चाहिए.
मिलावट का शक हो तो क्या करें?
अगर घी की गुणवत्ता को लेकर संदेह है तो उसे खाने के बजाय पहले उत्पाद की पैकिंग, बिल और निर्माता से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखें. जरूरत पड़ने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत की जा सकती है और सबसे जरूरी बात यह है कि किसी घरेलू टेस्ट के आधार पर तुरंत किसी उत्पाद को नकली घोषित न करें. वैज्ञानिक जांच के बाद ही मिलावट की पुष्टि की जा सकती है.
लेखक: रवीना सिंह
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