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Medicinal Plants: औषधीय पौधों की खेती से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, जानिए कैसे

बिहार के बक्सर को धान का कटोरा कहा जाता है, जिसे अब पारंपरिक खेती से अलग औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती का हब बनाया जाएगा. यह कवायद कृषि विभाग द्वारा शुरू कर दी गई है. हालांकि, इससे पहले मेंथा की खेती करते हुए पहल कर दी गई थी.

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य
Medicinal Plants Cultivation
Medicinal Plants Cultivation

बिहार के बक्सर को धान का कटोरा कहा जाता है, जिसे अब पारंपरिक खेती से अलग औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती का हब बनाया जाएगा. यह कवायद कृषि विभाग द्वारा शुरू कर दी गई है. हालांकि, इससे पहले मेंथा की खेती करते हुए पहल कर दी गई थी.

दरअसल, यहां की मिट्टी की जांच में पता चला है कि उसमें कुछ ऐसे तत्व हैं, जिनके आधार पर कृषि वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि उस मिट्टी में किसान औषधीय पौधों की खेती से काफी बड़े पैमाने पर मुनाफा कमा सकते हैं. बता दें कि बक्सर जिले में 11 प्रखंड हैं. हर प्रखंड की मिट्टी की अलग-अलग खासियत है. इसके आधार पर किसान अलग-अलग प्रकार से विभिन्न फसलों की खेती कर रहे हैं. कई किसान आलू की खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं, तो कई किसान सब्जी की खेती से मुनाफ़ा कमा रहे हैं. कुछ प्रखंड ऐसे भी हैं, जहां धान की बंपर खेती की जाती है. इसके अलावा कई किसान मेंथा की खेती में भी लगे हुए हैं.

कृषि वैज्ञानिकों की जांच में पता चला है कि यहां की मिट्टी में औषधीय पौधों और सुगंधित फूलों की खेती के लिए सफल है. जिले में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है. किसानों को इसकी खेती के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.

बड़े पैमाने पर हो रही मेंथा की खेती (Mentha cultivation on a large scale)

मौजूदा समय की बात करें, तो जिले के नावानगर, इटाढ़ी, राजपुर आदि प्रखंड हैं, जहां एक-एक किसान 20 से 50 बीघे में मेंथा की खेती कर रहे हैं. इसके बावजूद उचित जानकारी के अभाव की वजह से बड़े स्तर पर कोई बाजार नहीं मिल पाता है. इस कारण फसल का उचित लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है.

कौन-कौन औषधीय पौधों की हो सकती है खेती (Which medicinal plants can be cultivated)

वैसे तो जिले की मिट्टी कई औषधीय पौधों की खेती के लिए अनुकूल है, लेकिन शुरूआती दौर में मेंथा के अलावा कालमेघ, शतावत, सफेद मूसली, एलोवेरा आदि औषधीय पौधों की खेती की जाएगी. इसकी सहज रूप से खेती कर जल्द ही मार्केट पर पकड़ बनाई जा सकती है.

सामूहिक खेती को दिया जाएगा बढ़ावा (Collective farming will be promoted)

इसके अलावा किसानों को अधिक से अधिक मुनाफा मिल सके, इसके लिए औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए किसान समूहों का गठन होगा. इसमें एक साथ किसान सामूहिक रूप से बड़े पैमाने पर किसी एक औषधीय पौधे की खेती करेंगे. याद दिला दें कि जिले को औषधीय पौधों का हब बनाने का निर्णय लिया गया है.

English Summary: Farming of medicinal plants will increase the income of farmers Published on: 10 February 2021, 05:49 IST

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