सरकार ने किन नई नस्लों को पंजीकृत किया है?
अगर आप किसान या पशुपालक है और ऐसी गाय की उन्नत नस्लों की तलाश में है, जो सरकार द्वारा पंजीकृत हो और जिनसे अधिक मात्रा में दूध उत्पादन मिल सकें तो सबसे पहले आपको यह जानना बेहद ही आवश्यक है कि हाल ही में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने किन गायों की नस्लों को पंजीकृत किया है, जिनमें 10 नस्लों को शामिल किया गया है-
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पोडा थुरुपू
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नारी
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डागरी
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थूथो
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श्वेता कपिला
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हिमाचली पहाड़ी
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पूर्णिया
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कथानी
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सांचौरी
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मासिलुम
आगे इसी क्रम में गाय की टॉप 5 उन्नत नस्लों के बारे में जानते हैं विस्तारपूर्वक-
गाय की टॉप 5 नस्लें
1. गिर गाय
किसानों और पशुपालकों के लिए गिर गाय फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि गाय की यह नस्ल सबसे लोकप्रिय दुधारों नस्लों में से एक है और यह नस्ल विशेष रुप से गुजरात के गिर जगलों में पाई जाती है. अगर किसान या पशुपालक गाय की इस नस्ल का चुनाव करते हैं तो वह 1 दिन में 10-15 लीटर दूछ प्राप्त कर सकते हैं. वहीं अगर गिर गाय को उचित पोषण और बेहतर रखरखाव मिले तो इस नस्ल से एक दिन में 25 से 35 लीटर दूध मिलना संभव है.
साथ ही गिर गाय की यह खासियत है कि इस नस्ल से A2 दूध की उच्च गुणवत्ता मिलती है और यह किसी भी मौसम गर्म जलवायु को आसानी से सहन कर सकती है और इसमें बीमारियों से लड़ने की मजबूत क्षमता होती है.
2. राठी गाय
राजस्थान की प्रसिद्ध राठी गाय को दूध उत्पादन के लिए एक बेहतरीन नस्ल माना जाता है. यानी की किसान या पशुपालक इस नस्ल से गायें एक बार में 15-20 लीटर तक दूध प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही यह गाय विशेष रूप से शुष्क और गर्म क्षेत्रों में आसानी से रह सकती है. इसके शरीर पर भूरे, सफेद और लाल रंग के मिश्रित धब्बे दिखाई देते हैं, जो इसकी पहचान हैं. राठी गाय कम संसाधनों में भी अच्छा दूध उत्पादन करने की क्षमता रखती है. यही कारण है कि राजस्थान सहित कई राज्यों के पशुपालक इस नस्ल को प्राथमिकता देते हैं.
3. नागौरी गाय
नागौरी नस्ल मुख्य रूप से राजस्थान के जोधपुर, नागौर और आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है. इस गाय की सबसे बड़ी पहचान इसका काला थूथन, काले सींग और काले खुर हैं. नागौरी गाय अपनी ताकत और सहनशीलता के लिए जानी जाती है. यही वजह है कि इसे दूध उत्पादन के साथ-साथ कृषि कार्यों में भी उपयोग किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह नस्ल किसानों के लिए दोहरा लाभ प्रदान करती है.
साथ ही यह नस्ल मुख्य रूप से दूध के लिए नहीं जानी जाती. पशुपालक एक ब्यांत से औसतन 600 लीटर के करीब दूध प्राप्त कर सकते हैं.
4. थारपारकर गाय
थारपारकर नस्ल राजस्थान और सीमावर्ती शुष्क क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय है. इस गाय की खास पहचान इसके कानों के अंदर की पीली त्वचा होती है. यह नस्ल कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी आसानी से जीवित रह सकती है और कम चारे में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती है. थारपारकर गाय को दूध उत्पादन के लिए एक भरोसेमंद नस्ल माना जाता है, क्योंकि इस नस्ल से पशुपालक औसत दूध उत्पादन - 1600-2500 लीटर प्रति ब्यान से प्राप्त करस बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं.
5. हरियाणवी गाय
हरियाणवी गाय मुख्य रूप से हरियाणा राज्य में पाई जाती है, लेकिन इसकी उपयोगिता के कारण इसे अन्य राज्यों में भी पाला जाता है. इसका रंग सफेद या हल्का भूरा होता है तथा इसका चेहरा अपेक्षाकृत संकरा दिखाई देता है. इसके बड़े और मजबूत सींग इसकी विशेष पहचान हैं. यह नस्ल दूध उत्पादन के साथ-साथ खेती से जुड़े कार्यों में भी उपयोगी मानी जाती है. इसकी कार्यक्षमता और अनुकूलन क्षमता किसानों को आकर्षित करती है.
लेखक: रवीना सिंह
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