अगर आप खेती करने के साथ भैंस या दूसरे दुधारु पशुओं का पालन करते हो तो यह खबर आपके लिए बेहद ही जरुरी है. भारत में पशुपालन केवल पारंपरिक आजीविका नहीं रहा, बल्कि किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का एक मजबूत माध्यम बन चुका है. ऐसे में पशुओं की सही पहचान, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सरकारी रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है. इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार ने ईयर टैग Ear Tag की व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत पशओं की पहचान सुनिश्चित की जाती है.
क्या है ईयर टैग और कैसे करता है काम?
ईयर टैग प्लास्टिक या विशेष सामग्री से बना एक छोटा पहचान टैग होता है, जिसे पशु के कान में सुरक्षित तरीके से लगाया जाता है. इस पर एक यूनिक पहचान संख्या दर्ज होती है, जो किसी भी अन्य पशु से अलग होती है. यह नंबर राष्ट्रीय स्तर पर पशु की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे पशुओं के "आधार कार्ड" की तरह भी माना जाता है, क्योंकि इसके जरिए पशु का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से तैयार किया जा सकता है.
बीमा क्लेम की प्रक्रिया कैसे होती है?
आज कई पशुपालक अपने दुधारू पशुओं का बीमा कराते हैं ताकि बीमारी, दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में आर्थिक नुकसान से बचा जा सके. ऐसे मामलों में ईयर टैग बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. टैग लगे होने से यह आसानी से प्रमाणित किया जा सकता है कि बीमा उसी पशु का कराया गया था. साथ ही बीमा कंपनियों के लिए भी पशु की पहचान करना आसान हो जाता है, जिससे क्लेम प्रक्रिया तेज होती है और फर्जी दावों की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है. यही कारण है कि कई बीमा योजनाओं में ईयर टैग को अनिवार्य दस्तावेज के रूप में देखा जाता है.
खोए या चोरी हुए पशुओं की पहचान में मददगार
ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार पशु चरते समय भटक जाते हैं या चोरी की घटनाएं भी सामने आती हैं. ऐसे समय में ईयर टैग पशु की पहचान का सबसे भरोसेमंद माध्यम बन जाता है. यदि कोई पशु दूसरे क्षेत्र में मिल जाता है, तो उसके कान में लगे यूनिक नंबर के आधार पर मालिक तक पहुंचना आसान हो जाता है. साथ ही इस व्यवस्था से पशुओं की चोरी पर भी कुछ हद तक नियंत्रण रखने में मदद मिलती है और पशुपालकों को अपने पशु वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा
केंद्र और राज्य सरकार समय-समय पर पशुपालकों के लिए कई लाभकारी योजनाएं संचालित करती हैं. इनमें पशु बीमा, टीकाकरण अभियान, नस्ल सुधार कार्यक्रम, सब्सिडी योजनाएं और पशुपालन विकास कार्यक्रम शामिल हैं. इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए कई बार पशुओं का पंजीकरण आवश्यक होता है. ईयर टैग लगने के बाद पशु की पहचान और रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध रहता है, जिससे आवेदन प्रक्रिया आसान हो जाती है. इससे सरकारी सहायता सही लाभार्थियों तक पहुंचाने में भी सुविधा होती है.
पशुपालकों के लिए क्यों जरूरी है ईयर टैग?
अगर आप गाय, भैंस या अन्य दुधारू पशुओं का पालन करते हैं, तो ईयर टैग लगवाना भविष्य के लिए एक सुरक्षित निवेश माना जा सकता है. इससे पशु की पहचान हमेशा सुनिश्चित रहती है, बीमा संबंधी कार्यों में परेशानी नहीं आती, सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल जाता है और पशु का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहता है.
इसके अलावा, किसी आपात स्थिति या पशु के खो जाने पर भी यह छोटा सा टैग बड़ी राहत साबित हो सकता है. इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि वे अपने सभी पशुओं में समय पर ईयर टैग लगवाएं और उससे जुड़ी जानकारी को नियमित रूप से अपडेट कराते रहें.
लेखक: रवीना सिंह
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