बिहार के गन्ना किसानों के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नई योजना शुरू की गई है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में गन्ना उद्योग विभाग ने गन्ने की खेती में जैविक उपादानों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान योजना प्रारंभ की है. इस योजना के तहत किसानों को विभिन्न जैविक और प्राकृतिक कृषि इनपुट की खरीद एवं उपयोग पर निर्धारित सीमा तक सब्सिडी दी जाएगी.
योजना का उद्देश्य गन्ने की खेती में रासायनिक इनपुट पर निर्भरता को कम करने, मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और समेकित कीट प्रबंधन जैसी तकनीकों को बढ़ावा देना है. किसान इस योजना के तहत अपनी जरूरत के अनुसार एक या एक से अधिक घटकों का लाभ ले सकते हैं.
किन जैविक उपादानों पर मिलेगा अनुदान?
गन्ना किसानों को जैव उर्वरक, जैव कीटनाशी, जैव फफूंदनाशी, हरी खाद, कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट तथा समेकित कीट प्रबंधन से संबंधित विभिन्न उपादानों की खरीद पर अनुदान दिया जाएगा.
योजना में फेरोमोन ट्रैप, लाइट ट्रैप, स्टिकी ट्रैप, ट्राइकोकार्ड, ट्राइकोडर्मा, ब्यूवेरिया, मेटाराइजियम, ढैंचा, कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट और विभिन्न जैव उर्वरकों को शामिल किया गया है.
किसानों को कितना मिलेगा अनुदान?
योजना के तहत अलग-अलग कृषि उपादानों के लिए अनुदान की अलग-अलग सीमा निर्धारित की गई है. किसानों को लागत के एक निश्चित प्रतिशत या निर्धारित अधिकतम राशि, जो भी लागू हो, के अनुसार सहायता दी जाएगी.
फेरोमोन ट्रैप और लाइट ट्रैप
फेरोमोन ट्रैप या लाइट ट्रैप की खरीद पर किसानों को लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 900 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान दिया जाएगा. इससे किसानों को कीटों की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिल सकती है.
स्टिकी ट्रैप और ट्राइकोकार्ड
स्टिकी ट्रैप अथवा ट्राइकोकार्ड के लिए लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 350 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान निर्धारित है.
जैव फफूंदनाशी और जैव कीटनाशी
ट्राइकोडर्मा, ब्यूवेरिया अथवा मेटाराइजियम जैसे जैविक उत्पादों पर किसानों को लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 500 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान मिलेगा.
हरी खाद के लिए सहायता
गन्ने की खेती में हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ढैंचा पर भी अनुदान दिया जाएगा. किसानों को इसकी लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 500 रुपये प्रति एकड़ तक सहायता मिलेगी.
कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट
कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट के उपयोग पर किसानों को लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 3,000 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान दिया जाएगा.
जैव उर्वरकों पर सब्सिडी
पीएसबी, राइजोबियम, एजोटोबैक्टर और एसीटोबैक्टर जैसे जैव उर्वरकों की खरीद पर लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 500 रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान दिया जाएगा.
अधिकतम एक एकड़ क्षेत्र के लिए मिलेगा लाभ
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों के पास गन्ना किसान पंजीकरण आईडी होना आवश्यक है. इसके तहत रैयत और गैर-रैयत दोनों श्रेणी के गन्ना किसान पात्र होंगे.
हालांकि, प्रत्येक पात्र किसान को अधिकतम एक एकड़ गन्ना क्षेत्र के लिए ही अनुदान दिया जाएगा. किसान निर्धारित नियमों और अनुदान सीमा के तहत योजना के एक या एक से अधिक घटकों का लाभ ले सकते हैं.
15 नवंबर तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन
योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 16 सितंबर 2026 से 15 नवंबर 2026 तक चलेगी. इच्छुक पात्र गन्ना किसान विभागीय केन केयर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
इसके लिए किसान को ccs.bihar.gov.in पोर्टल पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी. आवेदन करते समय किसान को अपनी पंजीकरण आईडी और अन्य आवश्यक जानकारी तैयार रखनी चाहिए.
31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी योजना
गन्ना उद्योग विभाग की यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शुरू की गई है और योजना की अवधि 31 मार्च 2027 तक बताई गई है. किसानों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले योजना से जुड़ी पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, अनुदान की सीमा और अन्य शर्तों को विभागीय पोर्टल पर जांच लें.
जैविक उपादानों के उपयोग से गन्ने की खेती में कीट एवं रोग प्रबंधन, मिट्टी की उर्वरता और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है. ऐसे में पात्र किसान निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन कर योजना का लाभ उठा सकते हैं.
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