1. खेती-बाड़ी

गेहूं की ये 4 उन्नत किस्में हैं किसानों की पहली पसंद, उपज रिकॉर्ड तोड़

मनीशा शर्मा
मनीशा शर्मा
wheat

Wheat

आमतौर पर गेहूं की खेती (Wheat Farming) रबी सीजन में की जाती है. वहीं, यह  रबी सीजन में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली फसल है. धान की फसल की कटाई करने के बाद ज्यादातर किसान गेहूं की खेती की तैयारी शुरू कर देते हैं. 

तो आज हम अपने इस लेख में आपको गेहूं की ऐसी 4 उन्नत किस्मों (4 improved varieties of wheat)  के बारे में बतायेंगे. जिससे आपको ज्यादा उत्पादन मिलने के साथ-साथ अच्छा मुनाफा भी मिलेगा. तो आइये जानते हैं गेहूं की इन ख़ास किस्मों के बारे में विस्तार से...

डीबीडबल्यू 303 करण वैष्णवी (DBW 303 Karan Vaishanavi)

गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू 303 को 2021 मे अधिसूचित किया है. भारत के उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के सिंचित क्षेत्र में अगेती बुआई वाली खेती के लिए इस में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर डिवीजन को छोड़कर) और पश्चिमी उत्तर प्रदेश (झांसी डिवीजन को छोड़कर), जम्मू-कश्मीर (जम्मू और कठुआ जिले), हिमाचल प्रदेश (ऊना जिला और पांवटा घाटी) और उत्तराखंड (तराई क्षेत्र) के कुछ हिस्सों को शामिल किया गया है.

अगेती बुआई का समय- 25 अक्टूबर से 5 नवंबर तक  अगेती बुवाई व 150 %  एनपीके के प्रयोग पर वृद्धि नियंत्रकों क्लोरमेक्वाट क्लोराइड (CCC) @ 0.2% + टेबुकोनाजोल 250 ई सी @ 0.1% का दो बार छिड़काव (पहले नोड पर और फ्लैग लीफ) इस किस्म में अधिक लाभकारी है. वृद्धि नियंत्रकों की 100  लीटर पानी में 200 मिली लीटर क्लोरमेक्वाट क्लोराइड और 100 मिली लीटर टेबुकोनाजोल  (वाणिज्यिक उत्पाद मात्रा टैंक मिक्स) प्रति एकड़ मात्रा का प्रयोग करें.

औसत उपज - गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू 303 की औसत 81.2 क्विंटल/हे है.

डीबीडबल्यू 187 करण वंदना (DBW187 Karan Vandana)

गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू 187 करण वंदना पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर डिवीजनों को छोड़कर) पश्चिमी उत्तर प्रदेश (झांसी मंडल को छोड़कर), हिमाचल प्रदेश (ऊना व पाटा घाटी), जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों (जम्मू और कठुआ जिले) और उत्तराखंड (तराई क्षेत्र) के सिंचित क्षेत्रो में समय पर से बुआई के लिए उपयुक्त है. यह किस्म सिंचित समय पर बुवाई की स्थिति मे उत्तर-पूर्वी राज्यों के मैदानी इलाकों मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल की के लिए अनुशंसित है.

अगेती बुआई का समय - 25 अक्टूबर से 5 नवंबर तक  अगेती  बुवाई वाले एचवाईपीटी स्थिति जिसमे 150% एनपीके (225 किलो नाइट्रोजन: 90 किलो फॉस्फोरस : 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर) और वृद्धि नियंत्रकों नियंत्रकों क्लोरमेक्वाट क्लोराइड (CCC) @ 0.2% + टेबुकोनाजोल 250 ई सी @ 0.1% का दो बार छिड़काव (पहले नोड पर और फ्लैग लीफ) लाभकारी है. वृद्धि नियंत्रकों की 100 लीटर पानी में 200 मिली लीटर नियंत्रकों क्लोरमेक्वाट क्लोराइड और 100 मिली लीटर टेबुकोनाजोल (वाणिज्यिक उत्पाद मात्रा टैंक मिक्स) प्रति एकड़ मात्रा का प्रयोग करें.

डीबीडबल्यू 222 करण नरेन्द्र DBW222 (Karan Narendra)

गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू 222 करण नरेन्द्र सिंचित समय पर बुवाई की स्थिति के लिए पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर मंडल को छोड़कर) और उत्तर प्रदेश (झांसी मंडल को छोड़कर), हिमाचल प्रदेश (ऊना व पाटा घाटी), जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों (जम्मू और कठुआ जिले) और उत्तराखंड (तराई क्षेत्र) के लिए उपयुक्त है.

अगेती बुआई का समय - 5 नवंबर से 25 नवंबर

औसत उपज- गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू 222 करण नरेन्द्र  की उपज 61.3क्विंटल/हे. है.

डीडबल्यूआरबी 137 (DWRB 137 )

गेहूं की किस्म डीडबल्यूआरबी 137 सिंचित दशाओ में समय से बुआई के लिए उपयुक्त मानी जाती है. पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात छत्तीसगढ़, राजस्थान के कोटा एवं उदयपुर मण्डल के लिए उपयुक्त है.

बुआई का समय: 10 नवम्बर से 25 नवम्बर.
पकने की अवधि: 115 दिन

English Summary: wheat variety new varieties of wheat is high yield

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