Farm Activities

टमाटर की प्रमुख कीट एवं उनकी रोकथाम

उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने बल्कि टिकाऊ विकास व पोषण सुरक्षा के लिए आवश्यक है। वर्तमान में समेकित नाशीजीव प्रबंधन द्वारा जैविक अधारित टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में टमाटर की खेती छत्त्तीसगढ़ में 44573 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हो रहा है जिनका कुल उत्पादन 728536 मी.टन है। सब्जियां हमारे दैनिक भोजन का अभिन्न अंग है तथा इनके उपयोग से हमारा भोजन संतुलित होता है, क्योंकि इनमें विभिन्न मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोट्रीन, खनिज और विटामिन पाये जाते हैं। विटामिन और खनिजों की हमारे शरीर को बहुत सुक्ष्म मात्रा में आवश्यकता होती है जो प्राकृतिक रूप में सब्जियों से प्राप्त होती है ये विशेषकर जड़ और पत्ती वाली सब्जियों में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आहार में सब्जियों के प्रयोग से बीमारियों की प्रतिरोधक्ता बढ़ती है। सब्जी फसलों को कई प्रकार के रस चूसने व पत्तों एवं फलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों के आक्रमण से काफी हानि हो जाती है। इस वजह से सब्जियों की गुणवत्ता खराब हो जाती है तथा किसान भाईयों को आर्थिक नुकसान होता है। इसलिए सब्जियों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों की पहचान तथा उनके समेकित प्रबंधन के निम्नाकित उपाय दिए गए हैं, ताकि किसान भाई अपना पैदावार बढ़ा सकें ।

टमाटर के प्रमुख कीट :-

1. टमाटर फलभेदक (हेलिकोवर्पा आर्मीजेरा, स्पोडोप्टेरा लिटूरा) ।

2. लीफ माइनर (लिरियोमाइजा ट्राईफोली) ।

3. पत्ती खाने वाली इल्ली (स्पोडोप्टेरा लिटूरा) ।

4. सफेद मक्खी (बेमिसिया टेबेसाई)

5. थ्रिप्स - (थ्रिप्स टेबेकी)

6. स्टीप्ड मिली बग- (फेरंरीसीया विरगाटा)

7. रेड स्पाइडर माइट (टेट्रानाइकस स्पीसीज)

1- टमाटर फल भेदक

(हेलिकोवर्षा आर्मीजेरा स्पोडोप्टेरा लिटुरा)

कीट की पहचान :- इस कीट की इल्ली में रंग परिवर्तन गुण होता है यह हरा से भूरा रंग का होता है। इसका प्यूपा मृदा एवं फल में बनता है। मादा हल्का भूरा पीला रंग का एवं नर हल्का रंग का होता है।

क्षति लक्षण :- इस कीट प्रांरभिक इल्ली कोमल पत्ती को खाता है जबकि परिपक्क इल्ली गोलाकार फल में छेद करता है। इल्ली को शरीर का आधा भाग अंदर एवं आधा बाहर दिखाई पड़ता है। इस तरह फल क्षतिग्रस्त हो जाता हैं। उत्पाद अत्यंत कम प्राप्त होता है।

प्रबंधन समस्या :-

1. सस्या विधि :

2. प्रभावित फल से कीट की इल्ली को एकत्र करके नष्ट कर देना चाहिए ।

3. अमेरिकन गेंदा की 40 दिन की नर्सरी एवं टमाटर 25 दिन की नर्सरी की 1:16 के हिसाब से कतार में लगाना चाहिए ।

4. यांत्रिक विधि :

12 हेलील्यूर युक्त फेरोमीन ट्रेप प्रति हेक्टेयर लगाना चाहिए ।

2. जैविक प्रबंधन :

1. जब फूल आना प्रांरभ हो जाये तो आर्थिक दहली स्तर (10 प्रतिशत हानि) को ध्यान में रखते हुए ट्राइकोग्रामा पेरीटोसम/1 लाख नोस प्रति हे. सात दिन की अन्तराल में रिलीज करना चाहिए ।

2. हेलिकोवर्पा एन. पी. वी. की 250 एल ई. (लारवल इक्यूवेलेन्ट) से बनाया गया घोल प्रति हेक्टे. की दर से छिड़काव करना चाहिए ।

3. स्पोडोप्टेरा लिटूरा के नियंत्रण हेतू स्पोडोप्टेरा एन. पी. की 750 संक्रमित ईल्ली से बनाया गया घोल प्रति हेक्टे. की दर से छिड़काव करना चाहिए ।

4. बेसिलस थूरिन्जेन्सीस 2 ग्रा./ली का छिड़काव करना चाहिए ।

रासायनिक प्रबंधन :- जब कीट आर्थिक देहली स्तर पर हो तब ऐजाडिरेक्टीन

1.0: ई.सी (10000 पी.पी.एम.) 2.0 मि.ली./ लीटर पानी अथवा नुवालुरॉन 10:

ई.सी. 7.5 मि.ली./10 ली. अथवा फोसालोन 35: ई.सी. 13 मि.ली./10 ली. पानी के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए ।

1. लीफ माइनर (लिरियोमाइजा ट्राईफोली)

कीट की पहचान :- वयस्क कीट हल्का पीला रंग का एवं मैगट बहुत छोटी पैरविहीन संतरा - पीले रंग का होता है । सुरंग में प्युपा बनता है।

क्षति लक्षण :- कीट का प्रकोप पत्तियों में होता है।प्रभावित पत्ती पर आड़ी सर्पिलाकार सुरंग बन जाता है। पौधो को प्रकाश संश्लेषण में बाधा होती है। अततः पत्तियां गिर जाती है।

प्रबंधन :

1. पर्ण सुरंगक कीट से प्रभावित पत्तियों की संग्रह करके नष्ट कर देना चाहिए ।

2. आर्थिक देहली स्तर को ध्यान में रखते हुए नीम सीड करनाल 5: का छिड़काव करना चाहिए ।

3. पत्ती खानी वाली इल्ली (स्पीडोप्टेरा लिटुरा) कीट की पहचान :- कीट पत्तियों पर सुनहरा रंग का समूह में अण्डा देती है। इल्ली हल्का हरा गहरा मारजिन युक्त होता है। इसका वयस्क कीट की अग्रपंख भूरा रंग की एवं सफेद धारीयुक्त पश्व पंख पर सफेद रंग एवं भूर चकत्ते युक्त होता है।

क्षति लक्षण :- इस कीट की इल्ली पत्ती की निचली सतह को खुरचकर खाता है, जिससे पत्तियां गिर (डिफोलिएट) हो जाता है।

 प्रबंधन :

1. मृदा को गहरी जुताई कर प्युपा को बाहर निकाल दें एवं नष्ट कर दें ।

2. अरण्डी को फॉस (ट्रेप) फसल के रूप में बार्डर में एवं सिंचाई नालियों में लगाएं।

3. एक प्रकाश प्रंप्रच प्रति हेक्टेयर दर से लगाना चाहिए, ताकि नर मोथा आकर्षित हो जाये ।

4. अरण्डी एवं टमाटर पर उपस्थित अण्डो की समूह को एकत्र कर नष्ट कर दें ।

5. जैविक नियंत्रण के रूप स्पोडोप्टेरा एन. पी. वी. 250 एल.ई प्रति हेक्टेयर की दर से 2.5 कि.ग्रा. शर्करा (क्रूड सूगर) के साथ 0.01: सर्फेक्स (सर्फक्टेन्ट) मिलाकर छिड़काव करना चाहिए ।

6. रासायनिक नियंत्रण :- जब कीट आर्थिक देहली स्तर हो तो क्लोपारीफास 20 ई.सी. 1.5 ली/ हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए ।

7. सफेद मक्खी (बेमिसिया टेबासाई)

कीट की पहचान :- मादा कीट पीयर (नाशपाती) आकार की हल्की पर अण्डे देती है। निस्फ सफेद रंग की होती है। वयस्क सफेद रंग की छोटी मक्खी होता है।

क्षति लक्षण :- कीट प्रकोपित टमाटर की पत्ती पीली क्लोरोटीक धब्बा युक्त हो जाता है। पत्ती नीचे की ओर मुड़ जाता है एवं सूख जाता है। कीट पर्ण संकुचक  (लीफ कर्ल) रोग का वाहक (वेक्टर ) कीट है। अतः टमाटर में लीफ कर्ल वायरस रोग हो जाता है।

प्रबंधन

1. प्रभावित फसल को उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए।

2. अनुशंसित मात्रा में नत्रजन खाद का प्रयोग करना चाहिए।

3. सिंचाई की उचित अन्तराल एवं मात्रा में करना चाहिए।

4. एकान्तर पोषक खरपतवार कंघी/एब्बुटिलोम इंडीकम) को नष्ट करना चाहिए।

5. पीला चिपचिपा ट्रेप (यलो स्टीकी ट्रेप) 12 की संख्या में प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में लगाना चाहिए।

6. रासायनिक नियंत्रण के रूप् में डायमिथोएट 30: ई.सी 1-2 मि.ली. / अथवा मैलाथिया 50 ई.सी 1.5 मि.ली/ली. पानी एवं थायोमिथोक्जाम 25: डब्ल्यू. जी. 4.0 मि.ली. प्रति 10 ली. पानी छिड़काव करना चाहिए।

5- थ्रिप्स (थ्रिप्स टेबासाई)

कीट की पहचान :- इस कीट की निम्फ (शिशु) पीला रंग का होता है। वयस्क गहरा रंग एवं फ्रिंग / कटाफटा पंख युक्त होता है।

क्षति लक्षण :

1. कीट प्रभावित पत्ती पर सिल्वरी धारियॉ होता है।

2. फूल - फल लगने से पहले झड़ जाता है।

3. फसल पर बड़ नेक्रोसींस लक्षण दिखाई देता है।

4. यह कीट टमाटर विल्टवायरस का वाहक होता है।

प्रबंधन :

1. रोगी पौधो को निकालकर नष्ट कर देना चाहिए।

2. 15 यलो स्टेकी ट्रेप (पीला चिपचिपा प्रपंच) प्रति हेक्टेयर लगाना चाहिए।

3. काइसोपर्ला कार्नियां को 10,000 प्रति हेक्टेयर रिलीज करना चाहिए।

4. डायमिथोएट 30 ई.सी 1 ली./ हेक्टेयर दवा का छिड़काव करना चाहिए।

6- स्ट्रीप्ड मिली बग (फेररीसीया विरगाटा)

कीट की पहचान - इस कीट की क्रेवलर शिशु पीला से हल्की सफेद रंग की होती है। वयस्क मादा पंखहीन एवं सफेद वैक्स से ढका होता है।

क्षति लक्षण :- कीट द्वारा प्रभावित पौधा रस चूसने से कर्ल (कुंचक) पत्तीयुक्त एवं बौनी हो जाता है। फलों पर धब्बा जैसा कैंकर बन जाता है। पौधा के पत्ती शाखाओं पर सफेद रंग की मिली बग उपस्थित रहता है।

प्रबंधन :-

1. प्रभावित फसल को प्रारम्भिक अवस्था में उखाड़कर नष्ट कर सकते है।\

2. फोर्स 25 ग्रा./ली. या नीम बीज निचोड़ 0.5: के साथ 1 मि.ली.ली. टीपोल मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।

3. जब कीट संख्या आर्थिक देहली स्तर पर हो तब इमिडाक्लोरप्रिड 80.5 एस.सी. 0.6 मि.ली. प्रति लीटर पानी अथवा क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी. 2 मि.ली./2 ली पानी या थायोमेथाक्जाम 25 डब्ल्यू मि.ली./लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने कीट का प्रभावी नियंत्रण होता है।

7- रेड स्पाइडर माइट (टेट्रानाइकस स्पीसीज)

कीट की पहचान :- नाशकजीव समुह में अण्डे देती है। पत्तियां सूख जाता है। फल एवं फूल कम लगते है। पत्तियों में सुनहरी जाल बन जाता है।

प्रबंधन

1.डायकोफाल 18.5: ई.सी. 2.5 मि.ली./ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

लेखक :

ललित कुमार वर्मा,  के.आर. प्रजापति, सोनू दिवाकर, हेमन्त साहू, सुमीत, मनीष अनंत,

पंडित किशोरी लाल शुक्ला उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र राजनांदगांव (छ.ग.)

E-Mail: lalitverm@gmailc.om

Contact- 8959533832



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