Farm Activities

अनानास की खेती का तरीका

अनानास ब्राजील मूल का पौधा होता है. यह एक ऐसा फल है जिसको आप कभी भी ताजा काटकर खा सकते है. यह कईं तरह के पोषक तत्वों से भरा हुआ फल है, जो शरीर के अंदर मौजूद कईं तरह के विष को बाहर निकालने का कार्य करता है. इसका तना काफी ज्यादा छोटा होता है और इसकी गांठे काफी ज्यादा मजबूत भी होती है. अनानास का तना प्रायः पत्तियों से भरा हुआ होता है और यह पूरी तरह से गठीला होता है. अनानास में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम भी पाया जाता है और यह शरीर को कई तरह की ऊर्जा भी प्रदान करता है.

अनानास की खेती

अनानास की खेती अनेक प्रकार की जलवायु में आसानी से की जा सकती है. फिर भी इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे ज्यादा अच्छी होती है. इसके लिए 5 से 6 पीएच मान वाली पानी की पाइप लाइन को काफी अच्छा माना जाता है. जैवांश बाहुल्य मृदा इसके लिए काफी बेहतर मानी गई है. इसकी खेती के लिए 15 से 33 डिग्री का तापमान बेहतर माना जाता है. अगर देश की बात करें तो हमारे यहां पर पश्चिमी समुद्री तटीय क्षेत्र और उत्तर पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों में समुद्र तट से 1 हजार से 2 हजार फुट की ऊंचाई पर इसको उगाते है. राज्य मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो उत्पादन कम ही है. इसके अलावा यह छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, बस्तर और सरगुजा जगहों पर इसे आसानी से उगाया जाता है.

बुआई का समय

अनानास की खेती के बारे में बात करें तो इसको बरसात के दिनों में उगाया जाता है. दरअसल उत्तर पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों में वर्ष भर पर्याप्त मात्रा में मृदा में नमी बनी रहती है. मैदानी भागों में खेती करने से पूर्व मिट्टी व खेत को अच्छे से जोत लें. पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी सीढ़ीदार खेती की जाती हैं. इसकी खेती के लिए इसको बराबर एक कतार से दूसरी कतार में लगाने का कार्य करें. इसको भूमि में 10 सेटींमीटर छोटे रोपे में बोये. भूमि में पौधा सीधा लगाये और उसके कालिका भाग में मिट्टी न भरें. भारत में अधिक दूरी पर कुल 15 से 20 हजार पौधे प्रति हेक्टेयर लगाकर लगभग 10 से 15 टन आसानी से उपज प्राप्त होती है. पौधे से पौधे की दूरी कुल 25 सेमी और कतार की दूरी 60 सेमी पर रखें. इनको 10 सेमी की गहराई में रोपे. पौधों को एक सप्ताह छाया में सुखाए और पत्तियों को अलग कर दें.

अनानास की किस्में

अनानास की किस्मों को कुल तीन समूह जैसे - कैमेन समूह, कीन समूह, स्पैनिस समूह आदि में बांटा गया है.

सिंचाई

अनानास की पौधों की जड़े पूरी तरह से उथली हुई होती है. इस फसल को सूखे के मौसम में हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है. महीने में तीन बार कम से कम तीन सिंचाई करना इसकी फसल के लिए आवश्यक है. सिंचाई की आवश्यकता भूमि की किस्म पर निर्भर होती है.

अनानास और खाद

अनानास की खेती को खास मात्रा में खाद की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है. इसकी उत्पादन क्षमता पर नाइट्रोजन और पोटेशियम का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है. अनानास के बागों में अधिक मात्रा में 6 टन कुल कंपोस्ट खाद, 500 किलो अमोनियम सल्फेट, 400 से 450 किलो सिंगल सुपर सल्फेट और 160-250 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश की मात्रा की जरूरत होती है. इसके अलावा उर्वरकों को देना फसल के लिए लाभकारी माना जाता है. पहली मात्रा रोपाई के बाद और दूसरी मात्रा तीन महीनों के बाद जब पेड़ों की जड़े तत्वों को आसानी से ग्रहण करने लगे और विकसित हो जाए. कोशिश करें कि उर्वरकों को पौधों के पास ही लगाए.

कांट-छांट

अनानास के पौधे को भूस्तरीय और स्लिप्स को समय-समय पर काटते रहें क्योंकि इनकी वृद्धि से पौधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. भूस्तरीय जड़ों के अच्छे विकास के लिए पहली फसल के होने के बाद मिट्टी को आसानी से चढ़ाया जाए.

हार्मोन का प्रयोग

अनानास के स्लिप और क्राउन में जड़ों को लाने के लिए उन्हे आई.बी.एस के 50 के 100 पी पी एम घोल से उपचारित करें जिससे जड़े शीघ्र व अधिक निकलती है. कुल 10 पीपीएम को प्लोट्रोलोक्स को 2 प्रतिशत यूरिया के साथ तब तक छिड़काव करें जब तक की पौधे में कुल 30 से 40 पत्तियां न हो जाएं. एक साथ छिड़काव होने पर एक साथ फल आने लगेंगे.

कटाई और तुड़ाई

सामान्य रूप से पौधों को रोपने में लगभग 15 से 18 महीने में फूल आते है. पुष्पन के लगभग 4-5 महीने बाद फल लगने लगते है.अनानास का फल शर्करा बाहुल्य होता है और विटामिन बी, सी, ए का सर्वोत्तम स्त्रोत माना जाता है. फल की गुणव्तता शर्करा तथा फल के रस में प्राप्त होने वाले अम्लों पर पूरी तरह से निर्भर होती है. जब फूल 80 प्रतिशत तक परिप्कव हो जाए तब आप आसानी से इनको पेड़ों से तोड़ सकते है. लेकिन खाने के लिए पूरी तरह से पकने के बाद ही इनका सेवन करना चाहिए.

भंडारण

अनानास के फलों को अधिक समय तक भंडारित नहीं किया जा सकता है. इसीलिए तोड़ने के कुल 4 से 5 दिनों के अंदर ही इसको खा लेना चाहिए. फल कटाई करने के बाद काट-छाटं करके अच्छे से टोकरी में रखें.



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