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कुक्कुट खाद: संतुलित उर्वरीकरण के लिए पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत

कुक्कुट खाद पोषक तत्वों से भरपूर जैविक उर्वरक है, जो मृदा उर्वरता, जलधारण क्षमता और फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायक है. उचित कम्पोस्टिंग के बाद इसका उपयोग रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करता है, उत्पादन लागत घटाता है और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देता है. संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग से बेहतर मृदा स्वास्थ्य और अधिक उपज प्राप्त की जा सकती है.

KJ Staff

आधुनिक कृषि ने खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है, किंतु रासायनिक उर्वरकों पर इसकी अत्यधिक निर्भरता ने अनेक चुनौतियाँ उत्पन्न कर दी हैं. उर्वरकों की बढ़ती लागत, मृदा उर्वरता में गिरावट, मृदा जैविक पदार्थ का क्षरण तथा बढ़ती पर्यावरणीय चिंताओं के कारण कृषि अधिक महँगी और कम टिकाऊ होती जा रही है. इसलिए ऐसी किफायती एवं पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों की तत्काल आवश्यकता है, जो रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करते हुए फसल उत्पादकता को बनाए रख सकें. कुक्कुट खाद उपलब्ध जैविक खादों में सबसे समृद्ध स्रोतों में से एक है, जिसमें अधिकांश अन्य पशु-आधारित खादों की तुलना में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटाश की मात्रा अधिक होती है.

उचित रूप से कम्पोस्ट किए जाने पर यह मृदा उर्वरता में सुधार करती है, फसल उपज में वृद्धि करती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करती है, किंतु पोषक तत्त्वों की हानि तथा रोगजनकों से जुड़े जोखिमों से बचने के लिए इसका सावधानीपूर्वक प्रबंधन किया जाना आवश्यक है.

कुक्कुट खाद क्या है?

कुक्कुट खाद मुर्गियों की बीट, बिछावन सामग्री (जैसे लकड़ी का बुरादा या धान की भूसी), पंख तथा बचा हुआ चारा आदि का वह मिश्रण है, जिसे पोल्ट्री शेडों से एकत्र किया जाता है. कच्ची बीट के विपरीत, उचित रूप से कम्पोस्ट की गई कुक्कुट खाद एक सुरक्षित एवं पोषक तत्त्वों से भरपूर जैविक उर्वरक बन जाती है.  

कुक्कुट खाद की उत्पादन होने की मात्रा पक्षियों के प्रकार, आयु, चारे के सेवन, आवास प्रणाली, स्थानीय प्रबंधन पद्धतियों तथा नमी की मात्रा के अनुसार भिन्न-भिन्न होती है. कुक्कुट खाद के ताजा भार के आधार पर सामान्यतः निम्नलिखित अनुमान प्रचलित हैं:

कुक्कुट का प्रकार

प्रति पक्षी प्रतिदिन अनुमानित खाद उत्पादन

प्रति पक्षी प्रतिवर्ष अनुमानित खाद उत्पादन

लेयर मुर्गियाँ (अंडा देने वाली मुर्गियाँ)

0.10–0.13 किग्रा/दिन

36–47 किग्रा/वर्ष

ब्रॉयलर मुर्गियाँ (मांस उत्पादन हेतु)

0.06–0.10 किग्रा/दिन (विकास अवधि के दौरान)

22–37 किग्रा/वर्ष (वार्षिक समतुल्य अनुमान)

मुख्य अंतर

  • लेयर मुर्गियाँ प्रति पक्षी प्रतिवर्ष सामान्यतः अधिक मात्रा में खाद उत्पन्न करती हैं, क्योंकि उनका उत्पादन चक्र लंबा (प्रायः 72–80 सप्ताह या उससे अधिक) होता है तथा पूरे उत्पादन काल में उनका कुल चारा सेवन अधिक रहता है. इनके द्वारा उत्पादित खाद में सामान्यतः कैल्शियम की मात्रा भी अधिक होती है, क्योंकि अंडे के छिलके के निर्माण के लिए इन्हें कैल्शियम-समृद्ध आहार दिया जाता है.

  • ब्रॉयलर मुर्गियों का विपणन सामान्यतः 5–8 सप्ताह की आयु में ही कर दिया जाता है, इसलिए एक उत्पादन चक्र में प्रति पक्षी खाद का उत्पादन अपेक्षाकृत कम होता है. हालांकि, जिन व्यावसायिक फार्मों में वर्षभर अनेक ब्रॉयलर बैच तैयार किए जाते हैं, वहाँ कुल मिलाकर पर्याप्त मात्रा में कुक्कुट खाद का उत्पादन होता है.

डीप लिटर प्रणाली क्या है?

डीप लिटर प्रणाली में प्राप्त पोल्ट्री खाद, केज प्रणाली की तुलना में बेहतर गुणवत्ता की होती है. डीप लिटर प्रणाली पोल्ट्री आवास की एक ऐसी पद्धति है, जिसमें पक्षियों को फर्श पर बिछाई गई अवशोषक बिछावन सामग्री की मोटी परत पर पाला जाता है. प्रारंभ में इस परत की मोटाई सामान्यतः 8–15 से.मी. होती है, जो समय के साथ बढ़कर 15–30 से.मी. तक हो जाती है. बिछावन के लिए सामान्यतः धान की भूसी, लकड़ी का बुरादा, कटा हुआ पुआल, मूंगफली के छिलके अथवा सूखी पत्तियाँ आदि का उपयोग किया जाता है. जब पक्षी इस बिछावन पर रहते हैं, तो उनकी बीट बिछावन सामग्री के साथ मिल जाती है. उचित वातन तथा नमी प्रबंधन बनाए रखने पर लाभकारी सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थ का अपघटन करते हैं, जिससे ऊष्मा उत्पन्न होती है और बिछावन सामग्री का आंशिक रूप से कम्पोस्टीकरण हो जाता है. इस बिछावन को समय-समय पर उलट-पलट कर उसमें आवश्यकतानुसार नई सामग्री मिलाई जाती है. सामान्यतः इसे प्रत्येक उत्पादन चक्र के बाद नहीं हटाया जाता, बल्कि कई उत्पादन चक्रों के पूर्ण होने पर अथवा पूरे पक्षी समूह के उत्पादन काल के अंत में एक साथ निकालकर खाद के रूप में उपयोग किया जाता है.

कुक्कुट खाद में पोषक तत्त्वों की मात्रा

शुष्क भार (Dry Weight) के आधार पर कुक्कुट खाद में औसतन 3.03% नाइट्रोजन (N), 2.63% फॉस्फेट (P₂O₅) तथा 1.40% पोटाश (K₂O) पाया जाता है. हालांकि, इसकी वास्तविक मात्रा प्रयुक्त चारे, कम्पोस्टिंग विधि तथा खाद के प्रबंधन के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकती है.

कुक्कुट खाद क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • मृदा उर्वरता में वृद्धि करती है: यह पौधों के लिए आवश्यक सभी प्रमुख पोषक तत्त्व—नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटाश (K), कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg) तथा सल्फर (S)—के साथ-साथ आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्त्व—लौह (Fe), तांबा (Cu), जस्ता (Zn), मैंगनीज (Mn), मोलिब्डेनम (Mo), बोरॉन (B) तथा क्लोरीन (Cl)—भी उपलब्ध कराती है.

  • मृदा की संरचना में सुधार करती है: यह मृदा में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाती है, जलधारण क्षमता में सुधार करती है तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को प्रोत्साहित करती है.

  • शीघ्र प्रभाव दिखाने वाली जैविक खाद है: कुक्कुट खाद सबसे तेजी से प्रभाव दिखाने वाली कार्बनिक खादों में से एक है. इसके प्रयोग के कुछ ही सप्ताह के भीतर पौधों को उपलब्ध पोषक तत्त्व मिलने लगते हैं. इसमें पोषक तत्त्वों की मात्रा अधिक होती है तथा कार्बन : नाइट्रोजन (C:N) अनुपात लगभग 8–12:1 होने के कारण इसमें नाइट्रोजन प्रचुर मात्रा में होती है और अधिकांश पोषक तत्त्व पौधों द्वारा शीघ्र ग्रहण किए जा सकने वाले रूप में उपलब्ध रहते हैं. विभिन्न जैविक खादों से पौधों को पोषक तत्त्वों की उपलब्धता की गति सामान्यतः निम्न क्रम में होती है (सबसे तेज से सबसे धीमी): कुक्कुट खाद > भेड़/बकरी की खाद > सूअर की खाद > गोबर खाद .

  • खरपतवार के बीजों का अवांछित उपस्थिति अपेक्षाकृत कम होता है: कुक्कुट खाद में सामान्यतः गाय, भैंस, भेड़ अथवा बकरी की खाद की तुलना में जीवित खरपतवार बीजों की संख्या बहुत कम होती है. इसका कारण यह है कि मुर्गियों का पाचन तंत्र अत्यंत दक्ष होता है, जिसमें भोजन तेजी से गुजरता है तथा पेशीय जठर निगले गए बीजों को यांत्रिक रूप से पीस देता है, जिससे उनकी अंकुरण क्षमता नष्ट हो जाती है.

कुक्कुट खाद तैयार करने की विधि

कच्ची कुक्कुट खाद अत्यधिक सघन होती है और यदि इसे सीधे खेत में प्रयोग किया जाए तो यह फसलों की जड़ों एवं पौधों को नुकसान पहुँचा सकती है. इसलिए इसके सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग के लिए उचित कम्पोस्टिंग अत्यंत आवश्यक है.

कुक्कुट खाद की कम्पोस्टिंग की विधियाँ

  1. विंड्रो कम्पोस्टिंग

  • कुक्कुट खाद को जैविक-समृद्ध पदार्थों, जैसे धान का पुआल, सूखी पत्तियाँ, लकड़ी का बुरादा अथवा फसल अवशेषों के साथ मिलाकर लंबी कतारों (विंड्रो) अथवा ढेर के रूप में एकत्र करें. ऊष्मा संरक्षण एवं पर्याप्त वायुसंचार के लिए ढेर की ऊँचाई एवं चौड़ाई सामान्यतः कम-से-कम 1 मीटर रखें.

  • मिश्रण में कार्बन : नाइट्रोजन (C:N) अनुपात लगभग 25–30:1 तथा नमी 50–60% बनाए रखें. सामग्री इतनी नम हो कि हाथ में दबाने पर नम महसूस हो, लेकिन उससे पानी न टपके.

  • ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता तथा समान रूप से अपघटन सुनिश्चित करने के लिए ढेर को प्रत्येक 1–2 सप्ताह के अंतराल पर पलटते रहें.

  • जलवायु एवं प्रबंधन के अनुसार कम्पोस्ट बनने में सामान्यतः 6–12 सप्ताह का समय लगता है.

  • कम्पोस्ट के तापमान की नियमित निगरानी करें. सक्रिय कम्पोस्टिंग के दौरान तापमान सामान्यतः 55–65°C तक पहुँच जाता है, जिससे रोगजनकों एवं खरपतवार के बीजों का प्रभावी नियंत्रण होता है.

  1. स्थिर ढेर कम्पोस्टिंग

  • इस विधि में सामग्री को एक ढेर के रूप में एकत्र किया जाता है और उसे बार-बार पलटा नहीं जाता.

  • वायुसंचार प्राकृतिक रूप से अथवा छिद्रयुक्त पाइपों की सहायता से कराया जाता है.

  • इस विधि में श्रम की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है, किंतु विंड्रो कम्पोस्टिंग की तुलना में कम्पोस्ट बनने में अधिक समय लगता है तथा उचित प्रबंधन न होने पर अपघटन असमान हो सकता है.

कुक्कुट खाद की कम्पोस्टिंग के दौरान सावधानियाँ

  • 65% से अधिक नमी होने से बचाएँ, क्योंकि इससे अवायवीय दशाएँ उत्पन्न होती हैं, दुर्गंध आती है तथा पोषक तत्त्वों की हानि होती है.

  • नमी 40% से कम न होने दें, क्योंकि ऐसी स्थिति में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता काफी कम हो जाती है और अपघटन की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है.

  • कम्पोस्ट के ढेर को भारी वर्षा से सुरक्षित रखें, ताकि पोषक तत्त्वों का निक्षालन न हो.

  • ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति तथा समान अपघटन बनाए रखने के लिए ढेर को नियमित रूप से पलटते रहें.

  • कम्पोस्ट में प्लास्टिक, धातु अथवा रासायनिक रूप से प्रदूषित पदार्थ न मिलाएँ.

  • ताजी कुक्कुट खाद को उन फसलों में सीधे प्रयोग न करें जिनकी शीघ्र कटाई की जानी हो.

  • कच्ची कुक्कुट खाद को संभालते समय दस्ताने पहनें तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, जिससे संभावित रोगजनकों के संपर्क का जोखिम कम हो सके.  

कम्पोस्ट तैयार होने के संकेत

अच्छी तरह परिपक्व कुक्कुट कम्पोस्ट में सामान्यतः निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं—

  • इसका रंग गहरा भूरा से काला होता है तथा इसकी बनावट एकसमान दिखाई देती है.

  • इसमें मिट्टी जैसी प्राकृतिक गंध होती है तथा अमोनिया या अन्य प्रकार की तीव्र दुर्गंध नहीं आती.

  • इसकी बनावट भुरभुरी होती है और मूल कच्ची सामग्री की पहचान करना कठिन होता है. इसमें बिछावन सामग्री या कच्ची बीट स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती.

  • इसका तापमान वातावरण के तापमान के लगभग बराबर हो जाता है, जो यह दर्शाता है कि सक्रिय अपघटन की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है.

  • प्रारंभिक ढेर की तुलना में इसका आयतन सामान्यतः 30–50% तक कम हो जाता है.

  • इसमें नमी का स्तर स्थिर रहता है तथा ढेर को पलटने पर पुनः तापमान में वृद्धि (Reheating) नहीं होती.

  • इसका कार्बन : नाइट्रोजन (C:N) अनुपात सामान्यतः 20:1 से कम तथा आदर्श रूप से 10–15:1 के बीच होता है, जो यह संकेत देता है कि कम्पोस्ट खेत में प्रयोग के लिए पर्याप्त रूप से स्थिर एवं सुरक्षित है.

कुक्कुट खाद के प्रयोग के समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • कच्ची कुक्कुट खाद का प्रयोग न करें: ताजी कुक्कुट खाद के सीधे प्रयोग से पौधों में नाइट्रोजन की अधिकता के कारण झुलसन (Nitrogen Burn), रोगजनकों का प्रसार तथा खरपतवारों की वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है.  

  • संतुलित मात्रा में प्रयोग करें: आवश्यकता से अधिक कुक्कुट खाद का प्रयोग करने से पोषक तत्त्वों का निक्षालन हो सकता है, जिससे भू-जल प्रदूषित होने का खतरा बढ़ जाता है.

  • बुवाई से पूर्व प्रयोग करें: सर्वोत्तम परिणामों के लिए कम्पोस्ट की गई कुक्कुट खाद को बुवाई से पहले मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें.

  • बार-बार प्रयोग से पहले खाद की जाँच कराएँ: यदि एक ही खेत में लगातार अथवा अधिक मात्रा में कुक्कुट खाद का उपयोग किया जा रहा हो, तो समय-समय पर इसकी जाँच कराकर विशेष रूप से भारी धातुओं की मात्रा का विश्लेषण अवश्य कराएँ.

  • मृदा की नियमित जाँच कराएँ: जिन खेतों में नियमित रूप से कुक्कुट खाद का प्रयोग किया जाता है, वहाँ प्रत्येक 2–3 वर्ष के अंतराल पर मृदा परीक्षण कराना चाहिए, ताकि भारी धातुओं के संभावित संचयन का समय रहते पता लगाया जा सके.

  • एक ही खेत में लगातार अधिक मात्रा का प्रयोग न करें: कुक्कुट खाद का प्रयोग विभिन्न खेतों में क्रमवार करें तथा केवल इसी पर निर्भर रहने के बजाय इसे रासायनिक उर्वरकों अथवा अन्य कार्बनिक खादों के साथ समन्वित रूप से उपयोग करें. फसल की आवश्यकता एवं मृदा की उर्वरता के अनुसार अच्छी तरह सड़ी-गली कुक्कुट खाद 2–5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से अन्य कार्बनिक खादों एवं उर्वरकों के साथ प्रयोग करना अधिक उपयुक्त रहता है.

कुक्कुट खाद के लाभ एवं सीमाएँ

लाभ

सीमाएँ

पोषक तत्त्वों की मात्रा अधिक होती है.

बिना सड़ी-गली खाद के प्रयोग से फसल झुलसने का खतरा रहता है.

मृदा के स्वास्थ्य एवं उर्वरता में सुधार करती है.

उपयोग से पहले कम्पोस्टिंग के लिए समय की आवश्यकता होती है.

सूक्ष्म पोषक तत्त्व भी उपलब्ध कराती है.

अधिक मात्रा में इसका संग्रहण एवं प्रबंधन कठिन हो सकता है.

पर्यावरण-अनुकूल एवं कम लागत वाली कार्बनिक खाद है.

अनुचित प्रबंधन से रोगजनकों के प्रसार का जोखिम बना रहता है.

किसानों के लिए संदेश

कुक्कुट खाद को "पोषक तत्त्वों का शक्तिवर्धक" कहा जा सकता है, जो विशेष रूप से तेजी से बढ़ने वाली तथा अधिक पोषक तत्त्वों की आवश्यकता वाली फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त है. वहीं, गोबर खाद एक "मृदा स्वास्थ्य संवर्धक" के रूप में कार्य करती है, जो दीर्घकाल तक मृदा की उर्वरता एवं गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होती है. इन दोनों का समन्वित उपयोग स्वस्थ मृदा, सशक्त फसल तथा महँगे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने का प्रभावी उपाय है. उचित रूप से कम्पोस्ट की गई कुक्कुट खाद मृदा को समृद्ध बनाती है, रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता घटाती है तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देती है. जो किसान संतुलित उर्वरक प्रबंधन के साथ कुक्कुट खाद का समुचित उपयोग करते हैं, वे अधिक उपज, बेहतर मृदा स्वास्थ्य, कम उत्पादन लागत तथा दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता प्राप्त कर सकते हैं. 

लेखकगण: गौस अली, अनुप दास एवं राकेश कुमार
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना

English Summary: poultry manure rich source of nutrients for balanced fertilization Published on: 29 June 2026, 03:01 PM IST

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