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Success Story: जायटॉनिक टेक्नोलॉजी से 40 प्रतिशत तक घटी लागत और बढ़ी उपज, जानें प्रगतिशील किसान की सक्सेस स्टोरी

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के प्रगतिशील किसान पुनीत कुमार ने जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों को अपनाकर खेती में बड़ा बदलाव किया हैं. 22 एकड़ में धान, गेहूं और मक्का की खेती करते हुए उन्होंने लागत में लगभग 40 प्रतिशत कमी, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और नमी लंबे समय तक बने रहने का अनुभव किया. वह किसानों को नई तकनीक अपनाने की सलाह देते हैं.

विवेक कुमार राय
Success Story of Punit Kumar
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के प्रगतिशील किसान पुनीत कुमार

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के पटना चक्की गांव के प्रगतिशील युवा किसान पुनीत कुमार ने खेती में आधुनिक और टिकाऊ तकनीकों को अपनाकर एक नई पहचान बनाई है. उनका परिवार पीढ़ियों से खेती करता आ रहा है, लेकिन खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति ने उन्हें नई दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया. करीब दो वर्ष पहले उन्होंने जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों को अपनी खेती में शामिल किया.

आज वे रासायनिक और जैविक खेती का संतुलित मॉडल अपनाते हुए लगभग 20 प्रतिशत जैविक उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे खेती की लागत में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी आई है, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, नमी लंबे समय तक बनी रहती है और फसलों की उपज में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है. आज वे अपने पूरे 22 एकड़ क्षेत्र में जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं. ऐसे में आइए उनकी सफलता की कहानी के बारे में विस्तार से जानते हैं-

पीढ़ी दर पीढ़ी खेती से जुड़ा है परिवार

प्रगतिशील किसान पुनीत कुमार का परिवार कई वर्षों से खेती करता आ रहा है. बचपन से ही उन्होंने खेतों में काम करना और खेती की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. समय के साथ उन्होंने खेती की जिम्मेदारी संभाली और नई तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभदायक बनाने का प्रयास किया.

वर्तमान में वे 22 एकड़ भूमि पर खेती करते हैं. उनका मानना है कि आज के समय में खेती को सफल बनाने के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच और नई तकनीकों को अपनाना भी आवश्यक है.

धान, गेहूं और मक्का हैं मुख्य फसलें

पुनीत कुमार मुख्य रूप से धान, गेहूं और मक्का की खेती करते हैं. इसके अलावा मौसम और बाजार की मांग के अनुसार अन्य फसलों की भी खेती करते हैं. वे बताते हैं कि फसल विविधीकरण से जोखिम कम होता है और किसानों को पूरे वर्ष आय का बेहतर अवसर मिलता है. इसलिए वे समय-समय पर नई फसलों का भी चयन करते रहते हैं.

पहले पूरी तरह रासायनिक खेती करते थे

पुनीत कुमार बताते हैं कि पहले वे पूरी तरह रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भर थे. शुरुआत में उत्पादन अच्छा मिलता था, लेकिन धीरे-धीरे खेती की लागत लगातार बढ़ने लगी.

हर वर्ष अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों और दवाओं की जरूरत पड़ती थी. इसके बावजूद मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती जा रही थी और खेत पहले जैसे उत्पादक नहीं रहे. उन्होंने महसूस किया कि यदि यही स्थिति रही तो भविष्य में खेती करना और कठिन हो जाएगा. इसी सोच ने उन्हें खेती में बदलाव के लिए प्रेरित किया.

दो वर्ष पहले शुरू किया नया प्रयोग

करीब दो वर्ष पहले पुनीत कुमार ने जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों का उपयोग शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने केवल कुछ खेतों में इन उत्पादों का प्रयोग किया ताकि परिणामों को समझ सकें. जब उन्हें अच्छे परिणाम मिलने लगे, तो उन्होंने धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया. आज वे अपने पूरे 22 एकड़ क्षेत्र में इन उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं.

इन उत्पादों का कर रहे हैं उपयोग

पुनीत कुमार वर्तमान में जायटॉनिक NPK, जायटॉनिक किट, जायटॉनिक गोधन, जायटॉनिक जिंक, जायटॉनिक पोटाश, जायटॉनिक-एम और जायटॉनिक सुरक्षा जैसे उत्पादों का उपयोग करते हैं. वे बताते हैं कि इन उत्पादों को वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग करने से फसलों को संतुलित पोषण मिलता है और मिट्टी की गुणवत्ता लगातार बेहतर होती है. आज उनकी खेती में लगभग 80 प्रतिशत जैविक उत्पादों का समावेश हो चुका है और वे भविष्य में इसे और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं.

खेती की लागत में आई लगभग 40 प्रतिशत की कमी

पुनीत कुमार बताते हैं कि जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों का सबसे बड़ा लाभ खेती की लागत में कमी के रूप में मिला है. पहले रासायनिक उर्वरकों और दवाओं पर काफी अधिक खर्च होता था. लेकिन अब इन उत्पादों के उपयोग से उनकी खेती की कुल लागत में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी आई है.

वे कहते हैं कि लागत कम होने से खेती का मुनाफा बढ़ा है और आर्थिक रूप से भी उन्हें काफी राहत मिली है.

उपज में हुआ शानदार इजाफा

पुनीत कुमार के अनुसार, लागत कम होने के साथ-साथ फसलों की उपज में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. वे बताते हैं कि धान, गेहूं और मक्का सहित लगभग सभी फसलों में पौधों की बढ़वार बेहतर हुई है. फसलें अधिक स्वस्थ दिखाई देती हैं और उत्पादन पहले की तुलना में अधिक मिल रहा है. उनका मानना है कि स्वस्थ मिट्टी ही अच्छी उपज की सबसे बड़ी कुंजी है.

मिट्टी की उर्वरा शक्ति में हुआ सुधार

पुनीत कुमार बताते हैं कि पहले उनकी जमीन धीरे-धीरे अपनी प्राकृतिक उर्वरा शक्ति खो रही थी. लेकिन जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों के नियमित उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार देखने को मिला है. अब मिट्टी पहले की तुलना में अधिक भुरभुरी हो गई है, जिससे जड़ों का विकास बेहतर होता है और पौधों को पोषक तत्व आसानी से मिलते हैं.

मिट्टी में लंबे समय तक बनी रहती है नमी

पुनीत कुमार का कहना है कि उन्होंने एक और महत्वपूर्ण बदलाव महसूस किया है. पहले खेतों में बार-बार सिंचाई करनी पड़ती थी, लेकिन अब मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इससे फसलों को बार-बार पानी देने की जरूरत कम हो गई है और सिंचाई का खर्च भी घटा है. आज के समय में जब पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनती जा रही है, ऐसे में यह बदलाव किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण है.

छोटे प्रयोग से मिली बड़ी सफलता

पुनीत कुमार बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत में पूरे खेत में बदलाव नहीं किया था. उन्होंने पहले केवल थोड़ी-सी जमीन पर जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों का उपयोग किया. जब उन्हें अच्छे परिणाम मिले, तब उन्होंने पूरे 22 एकड़ क्षेत्र में इनका प्रयोग शुरू कर दिया. उनका मानना है कि किसी भी नई तकनीक को पहले छोटे स्तर पर अपनाकर उसके परिणामों को समझना चाहिए.

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा

आज आसपास के कई किसान पुनीत कुमार की खेती देखने आते हैं. वे अपने अनुभव साझा करते हैं और बताते हैं कि किस प्रकार सही तकनीक अपनाकर खेती की लागत कम की जा सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है. उनका कहना है कि यदि किसान धीरे-धीरे जैविक उत्पादों का उपयोग बढ़ाएं, तो भविष्य में खेती अधिक टिकाऊ और लाभदायक बन सकती है.

किसानों के लिए दिया संदेश

पुनीत कुमार सभी किसानों से अपील करते हैं कि वे केवल अधिक उत्पादन के पीछे न भागें, बल्कि मिट्टी की सेहत पर भी ध्यान दें. वे कहते हैं कि यदि मिट्टी स्वस्थ होगी, तो उत्पादन भी अच्छा होगा और खेती लंबे समय तक लाभदायक बनी रहेगी. उनका सुझाव है कि किसान नई तकनीकों को अपनाने से न डरें. पहले छोटे स्तर पर प्रयोग करें और परिणाम मिलने के बाद धीरे-धीरे पूरे खेत में अपनाएं.

English Summary: progressive farmer Punnet Kumar success story Zytonic technology reduces farming cost by 40 percent Published on: 10 August 2026, 10:59 AM IST

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