बरसात का मौसम जितना राहतभरा होता है उतनी ही अपने साथ कई परेशानियां लेकर आता है. यानी इस बारिश के मौसम में हवा में नमी अधिक बढ़ जाती है और इसका सीधा असर घर की रसोई पर पड़ता है. इस मौसम में नमी-सीलन आने की वजह से रसोईघरों में रखें मसालों लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर, जीरा और नमक खराब हो जाते हैं और मसालों में फंगस लग जाती है. ऐसे में अगर आप मसालों को खराब होने से बचाना चाहते हैं, तो इस तरह से स्टोर करें.
आइए आगे की कड़ी में जानें मसालों को स्टोर करने के इन आसान 3 टिप्स के बारे में विस्तारपूर्वक-
1. चावल के दाने: अगर आप की रसोई में नमी आने के कारण मसाले खराब होने की समस्या को झेल रहे हैं, तो ऐसे में आप नमक या फिर मसालों के डिब्बों में कच्चे चावल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे मसालों में नमी की समस्या से छुटकारा आसानी से मिल सकता है.
उपयोग- मसालों के कंटेनर में अगर नमी आ रही है तो जल्द ही एक चम्मच कच्चे चावल को मसाले के डिब्बों में डाल दें. ऐसा करने से चावल मसालों की नमी को सोख लेंगे और मसाले खराब भी नहीं होंगे और मसालों का स्वाद भी बना रहेगा.
2. साबुत लौंग- बारिश के मौसम सब की रसोई में नमी-सीलन की समस्या होने के कारण घरों में रखे मसाले खराब हो जाते हैं और ऐसे में लोगों को तलाश होती देसी नुस्खों की कैसे वह घर बैठ इस परेशानी का हल निकाले. इस परेशानी का हल है 4-5 साबुत लौंग जो इस बारिश के मौसम में मसालों को सुरक्षित रख सकती है.
उपयोग- अगर मसालों के डिब्बों में सीलन आ रही है तो ऐसे में मसालों को फेंक नहीं बल्कि मसालों के कंटेनर में साबुत लौंग को डाल दें जिससे मसाले में कीड़े भी नहीं होंगे और नमी भी नहीं आएंगी, क्योंकि लौंग की तेज गंध मसाले की नमी सोखने के अलावा, कीड़े भी नहीं पड़ने देती.
3. एयरटाइट कंटेनर- अगर आप अपनी रसोई में मसालों को स्टोर कर रहे हैं, तो इस बात का विशेष रुप से ख्याल रखें की जिन डिब्बों में आप मसाले रखें उनकी ढक्कन टाइट हो ताकि बाहर की हवा डिब्बों के अंदर न जा सकें और अक्सर गलत डिब्बे के चुनाव में ही मसालों में नमी की समस्या देखने को मिलती है.
उपयोग- जब आप अपनी किचन में मसाले स्टोर करें तो हमेशा इस बात का जरुर ख्याल रखें कि स्टोर कंटेनर को हमेशा सूखी जगह पर रखें और साथ ही मसालों को निकालते वक्त सूखे चम्मच का उपयोग करें और उन्हें गैस या सिंक के पास रखने से बचें. ऐसा करने से आप के मसाले का स्वाद खराब भी नहीं होगा और खुशबू भी बरकरार रहेगी.
लेखक: रवीना सिंह
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