1. खेती-बाड़ी

आलू की बंपर पैदावार के लिए इस तरह से करें खेती, यहां मिलेगा उन्नत किस्मों का बीज

श्याम दांगी
श्याम दांगी

आलू को सब्जियों को राजा कहा जाता है. इसकी खेती देश के एक-दो राज्यों को छोड़कर लगभग सभी में की जाती है. मुख्यतः आलू रबी सीजन की फसल है. लेकिन कुछ राज्यों में इसे रबी और खरीफ दोनों में लगाया जाता है. आलू में कार्बोहाइड्रेट, मैग्नीशियम, विटामिन-सी, विटामिन-बी6 कैल्शियम, पोटेशियम समेत अनेक मिनरल्स पाए जाते है. इसके अलावा इसमें हार्मोन, एमिनो एसिड और फैटि एसिड जैसे कई तत्व होते हैं. किसानों के लिए इसकी खेती करना काफी फायदेमंद होता है. तो आइए जानते हैं आलू की खेती का करने का सबसे सही तरीका क्या है और इसका बीज कहां से प्राप्त कर सकते हैं -

खेती की तैयारी

आलू की फसल के लिए खेत तैयार करने से पहले मृदा उपचार करना बेहद आवश्यक होता है. मृदा उपचार करने से मृदा कीट, रोगाणु और भूमि जनित बिमारियों से रोकथाम करने में मदद मिलती है. इसके लिए 40 से 50 किलो गोबर की पकी खाद लेकर उसमें 2 किलो मेट्राजियम ऐनआइसोफिलि मिला लें और इसे प्रति एकड़ भूमि में मिला दें. इसके बाद खेत की जुताई करें.

बुवाई का सही समय

हमने जैसा कि पहले ही बताया कि कुछ राज्यों को छोड़कर आलू मुख्यतः रबी की फसल होती है. इसलिए इसकी बुवाई अक्टूबर से मध्य जनवरी तक की जाती है जो अच्छी पैदावार के उत्तम समय होता है.

बीज की मात्रा

आलू का बीज प्रति हेक्टेयर 25 से 30 क्विंटल तक लगता है. वहीं प्रति एकड़ में 10 से 12 क्विंटल बीज की आवश्यकता पड़ती है.

बोने की सही विधि

आलू की बुवाई के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 50 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर होना चाहिए. बीज की साइज 25 मिमी से 45 मिमी तक होनी चाहिए. बीज को काटकर नहीं बोना चाहिए. हालांकि बीज 45 से 50 मिमी का होता है तो उसे काटना पड़ता है. बुवाई के समय खेत की मिट्टी एकदम भुरभुरी होना चाहिए.

खाद एवं उर्वरक

आलू के बीज की प्रारंभिक वृध्दि के लिए डीएपी 75 किलो प्रति एकड़, एसएसपी यानि सिंगल सुपर फॉस्फेट 150 किलो प्रति एकड़ और पोटाश 75 प्रति एकड़ लेना चाहिए. यदि एसएसपी नहीं दे रहे हैं तो किसानों को डीएपी की मात्रा बढ़ाकर 150 किलो कर देनी चाहिए.

सिंचाई का सही तरीका

आलू की फसल में सिंचाई बेहद एहतियातन करना चाहिए. दरअसल, आलू में पानी की अधिक आवश्यकता तो पड़ती है लेकिन जल का अधिक भराव नहीं होना चाहिए. पहली सिंचाई आलू उगजाने के बाद करना चाहिए. दूसरी सिंचाई इसके 15 दिन बाद करें. यह आलू के बनने और फूलने की अवस्था होती है. इसके बाद 10 से 12 के दिन के अंतराल पर सिंचाई करना चाहिए. आलू की अच्छी पैदावार के लिए 6 से 7 सिंचाई की आवष्यकता पड़ती है.

निराई गुड़ाई

अन्य फसलों की तरह आलू की फसल की भी समय-समय पर निराई गुड़ाई करना चाहिए. इसमें किसी भी तरह को खरपतवार नहीं होना चाहिए ताकि आपकी उपज प्रभावित न हो. 

आलू की खुदाई

फसल जब पूरी तरह से पक जाए और कंद के छिलके ठोस पड़ जाए तभी आलू की खुदाई करना चाहिए. आलू की अच्छी किस्मों की बुवाई करने पर प्रति हेक्टेयर आलू की उपज 300 से 350 क्विंटल की होती है.

बीज कहां से लें-उत्तर प्रदेश के किसानों को उद्यान विभाग कुफरी और कुफरी सिंदुरी जैसी उन्नत किस्मों का बीज मुहैया करा रहा है.

पता : उद्यान भवन, 2-सप्रू मार्ग, लखनऊ- 226001
दूरभाष - 0522-4044414, 2623277

English Summary: potato crop cultivation guide potato farming information

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