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गेहूं की जैविक खेती से मिलेगा फसल का बेहतर उत्पादन, जानिए खेती की पूरी प्रक्रिया

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य
Organic

गेहूं भारत की एक प्रमुख फसल है, जिसकी खेती लगभग सभी राज्यों में की जाती है. इसका अधिक उत्पादन मुख्य रूप से राज्य के मैदानी क्षेत्रों में होता है. इसका करण यह है, कि मैदानी क्षेत्रों में गेहूं अधिकांशतः सिंचित और उपजाऊ भूमि में पैदा किया जाता हैं. किसानों के लिए गहूं की जैविक खेती उत्पादन की वह पद्धति है, जिसमें फसलों के उत्पादन के लिए प्राकृतिक संसाधनों जैसे- गोबर की सड़ी खाद, हरी खाद, जैव उर्वरकों का इस्तेमाल करके फसल की उपज प्राप्त की जाती है. इसका आशय यह है, कि गेहूं की जैविक खेती में संश्लेषित रसायनों, उर्वरकों, रसायनिक कीट और रोग नियंत्रकों और वृद्धि कारक तत्वों का प्रयोग वर्जित होता है. आइए आपको गेहूं की जैविक खेती के बारे में जानकारी देते हैं.

उपयुक्त भूमि

इसकी जैविक खेती सभी प्रकार की भूमि में कर सकते हैं. फसल की अच्छी उत्पादकता के लिए बुलई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती है. इसमें पौध की बढ़वार और जड़ों का विकास अच्छी तरह होता है.

खेत की तैयारी

कम से कम 15 दिन पहले खेत में 30 से 40 टन प्रति हैक्टेयर अच्छी सड़ी गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर बिखे दें. इसके बाद खेत की अच्छी जुताई कर दें और पाटा चलाकर खेत समतल बना लें.

wheat

उन्नत किस्में

गेहूं की जैविक खेती के लिए किसानों को स्थानीय क्षेत्रों की उन्नत किस्मों और देशी किस्मों की बुवाई को अपनाना चाहिए. इससे फसल का उत्पादन अच्छा मिलता है.

बीज मात्रा

बीज की मात्रा समय, मिट्टी में नमी, बुवाई की विधि और किस्मों के दानों पर निर्भर करती है. जल्दी और समय से बुवाई के लिए लगभग 100 से 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज पर्याप्त होता है, तो वहीं देर से बुवाई के लिए 125 से 130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज मात्रा सही रहती है.

बीज उपचार

बुवाई से पहले बीज को जैव उर्वरकों से उपचारित कर लें. बता दें कि 1 किलोग्राम बीज उपचार के लिए 5 से 10 ग्राम ऐजेटोबेक्टर और 5 से 10 ग्राम पी.एस.बी. जीवाणु खाद पर्याप्त होती है.

बुवाई की विधि

बुवाई के समय खेत में नमी का होना चाहिए, साथ ही बुवाई हल द्वारा कूड़ो में 4 से 5 सेंटीमीटर गहराई में करनी चाहिए. ध्यान रहे कि  पंक्तियों की दूरी 19 से 23 सेंटीमीटर की हो. अगर बुवाई में देरी हो, तो पंक्तियों की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें.

खरपतवार रोकथाम

फसल को खरपतवारों से मुक्त रखने के लिए फसल की 2 बार निराई-गुड़ाई करना लाभप्रद होता है. पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के 30 से 40 दिन बाद और दूसरी गुड़ाई फरवरी माह में आवश्यक हो जाती है, क्योंकि तापमान बढ़ने पर फसल के साथ खरपतवारों की वृद्धि भी होती है.

फसल कटाई

जब दाना पक जाए या मुंह से तोड़ने पर कट की आवाज आए, तो फसल की कटाई कर देना चाहिए. इसके बाद फसल सुखाकर मड़ाई करनी चाहिए. किसान मड़ाई श्रेशर से कर सकते है, लेकिन भण्डारण के लिए अनाज को अच्छी तरह सुखाएं.

English Summary: Organic farming of wheat will give better crop production

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