1. खेती-बाड़ी

इस महीने खरबूज की खेती से कमाएं मुनाफ़ा, जानें अच्छी पैदावार लेने का वैज्ञानिक तरीका

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य
Cantaloupe

किसानों के लिए खरबूज एक महत्वपूर्ण फसल है. यह कद्दूवर्गीय फसलों में प्रमुख है, जिसकी खेती यूपी, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश में होती है. किसान इसकी खेती मुख्य रूप से नदियों के किनारे करते हैं. यह एक बेहद स्वादिष्ट फल है, जिसकी मांग गर्मियों में बढ़ जाती है, क्योंकि इसका सेवन गर्मी से राहत दिलाता है. बता दें कि खरबूज में विटामिन सी और शर्करा की काफी मात्रा पाई जाती है, साथ ही यह पेट विकार के लिए भी काफी लाभदायक है. मिठाई सजाने के लिए इसके बीजों का उपयोग होता है. अगर किसान आधुनिक तकनीक और उन्नत किस्मों के साथ इसकी खेती करें, तो इसकी फसल बहुत अच्छी आमदनी दे सकती है. 

उपयुक्त जलवायु

यह एक नकदी फसल है, जिसकी खेती गर्म और शुष्क जलवायु में होती है. इसके बीजों के जमाव और पौधों के विकास के समय तापमान 22-26 डिग्री सेल्सियस उपयुक्त रहता है. शुष्क मौसम और पछुआ हवा चलने से फल अच्छी तरह पक जाते हैं, साथ ही फलों में मिठास भर जाती है.

मिट्टी का चयन

इसकी खेती कई प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है, लेकिन अच्छी फसल के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है.

Melon farming

खेत की तैयारी

सबसे पहले खेत की पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से कर दें. इसके बाद 2-3 जुताई कल्टीवेटर से करें. ध्यान रहे कि हर जुताई के बाद पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरा कर लें. इसके अलावा खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए. इसके लिए खेत को समतल बना लेना चाहिए.

उन्नत किस्में

किसानों को खरबूजे की अच्छी पैदावार के लिए स्थानीय किस्म, उन्नत और अधिक पैदावार देने वाली किस्मों से बुवाई करनी चाहिए. 

बुवाई का समय

किसानों के लिए खरबूज की बुवाई का सही समय आ गया है. मार्च में इसको बोया जा सकता है. जानकारी के लिए बता दें कि मैदानी क्षेत्रों में इसकी बुवाई फरवरी, पहाड़ी क्षेत्रों में अप्रैल-मई, नदियों के कच्छार में नवम्बर-जनवरी के अंतिम सप्ताह और दक्षिण और मध्य भारत में अक्टूबर-नवम्बर में बुवाई कर सकते हैं.

बीज की मात्रा और उपचार

अगर खरबूज की खेती लगभग 1 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कर रहे हैं, तो औसतन आम वैरायटी के लिए 1 से 1.5 किलोग्राम बीजों की जरूरत पड़ती है और हाइब्रिड किस्मों के लिए 350 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है. इनको बुवाई से पहले कैप्टान या थिराम से उपचारित कर लेना चाहिए.

बुवाई की विधि

सबसे पहले लगभग 2-2.5 मी. की दूरी पर नालियां बना लेना चाहिए. अब इसके किनारे पर 60-80 सेंटीमीटर की दूरी पर थाले में 2-3 बीजों लगाना चाहिए. ध्यान दें कि बीजों की बुवाई 1.5-2.0 सेंटीमीटर की गहराई पर करें.

सिंचाई प्रबंधन

इसकी फसल में बीजों के अंकुरण के लिए खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए. इसकी फसल की लगभग 5-6 बार सिंचाई कर देनी चाहिए. इसके पौधों को शुरुआत में हर सप्ताह पानी देने की जरूरत होती है.  पौधों के विकास और फलों के बढ़ने के समय खेत में नमी रखें. इसके अलावा जब फल पूरी तरह बढ़ जाए, तो इसकी सिंचाई को कम कर देना चाहिए. इस तरह फलों में मिठास बढ़ जाती है. इस फसल की सिंचाई बूंद-बूंद तकनीक से करना चाहिए.

निराई-गुड़ाई

खरबूज की फसल की सिंचाई करने के बाद हल्की गुड़ाई कर देना चाहिए. इससे खेत की पपड़ी टूट जाती है और पौधों की जड़ो को हवा मिलने लगती है. गुड़ाई के वक्त पौधों की जड़ों पर हल्की मिट्टी भी चढ़ा देनी चाहिए. |

फलों की तुड़ाई

जब फलों के रंग में परिवर्तन होने लगे, तब समझ जाएं कि फल पककर तैयार होने लगे हैं. इस दौरान उनमें से तेज खुशबू भी आने लगती है. यह समय  खरबूजों की तुड़ाई के लिए सही रहता है. फसल की तुड़ाई सुबह के समय करनी चाहिए.

पैदावार

अगर किसान उन्नत किस्म और आधुनिक तरीके से खरबूजे की खेती करे, तो इसकी फसल से लगभग 150-250 क्विंटल प्रति हैक्टेयर उपज मिल सकती है. इस फसल की अच्छी पैदावार जलवायु, मिट्टी, किस्म, खाद, उर्वरक, सिंचाई और अच्छी देखभाल पर निर्भर होती है.

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English Summary: information on melon farming

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