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Mustard Varieties: सरसों की ये तीन किस्में उत्पादकता के मामले में हैं अव्वल, पैदावार 26 क्विंटल/हेक्टेयर तक, जानें अन्य विशेषताएं

Mustard Varieties: सरसों की तीन उन्नत किस्में एनआरसीडीआर-2, एनआरसीएचबी-506 हाइब्रिड और एनआरसीडीआर-601 किसान को प्रति हेक्टेयर लगभग 26 क्विंटल तक उपज देंगी, जोकि लगभग 137-156 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं. ये सभी किस्में ICAR-डीआरएमआर द्वारा विकसित की गई हैं.

लोकेश निरवाल
सरसों की ये तीन किस्में देती हैं बंपर पैदावार  (Image Source: Pixabay)
सरसों की ये तीन किस्में देती हैं बंपर पैदावार (Image Source: Pixabay)

Mustard Varieties: रबी की तिलहनी फसलों में प्रमुख स्थान सरसों का है. देखा जाए तो सरसों की फसल सीमित सिंचाई की दशा में अधिक लाभदायक मानी जाती है. अगर किसान सरसों की उन्नत किस्में व सही तरीके से खेती करें, तो वह कम समय में ही सरसों की फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. इसी क्रम में आज हम किसानों के लिए सरसों की टॉप तीन किस्मों की जानकारी लेकर आए हैं, जिसकी खेती देश के दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर सहित भारत के विभिन्न राज्यों में सरलता से की जा सकती है. सरसों की ये सभी किस्में 137-156 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं. इसके अलावा, इन उन्नत किस्मों की खेती से किसान प्रति हेक्टेयर लगभग 26 क्विंटल तक उपज प्राप्त कर सकते हैं.

सरसों की जिन तीन किस्मों की हम बात कर रहे हैं, वह एनआरसीडीआर-2, एनआरसीएचबी-506 हाइब्रिड और एनआरसीडीआर-601 हैं. इन किस्मों को ICAR-डीआरएमआर द्वारा विकसित किया गया है. ऐसे में आइए सरसों की इन तीनों उन्नत किस्मों के बारे में विस्तार से जानते हैं-

सरसों की तीन टॉप किस्में/ Top Three Varieties of Mustard

सरसों की एनआरसीडीआर-2 किस्म- सरसों की इस उन्नत किस्म की खेती दिल्ली, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, पंजाब और राजस्थान के किसान आसानी से कर सकते हैं. इसके पौधे 165-212 सेमी लंबे होते हैं और वहीं सरसों की यह किस्म 131-156 दिन मे पूरी तरह से पककर तैयार हो जाती है. NRCDR-2 किस्म से किसान प्रति हेक्टेयर लगभग 26 क्विंटल तक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलवा सरसों की NRCDR-2 किस्म में तेल की मात्रा 36.5- 42.5 प्रतिशत पाई जाती है. साथ ही इस किस्म में सफेद रतुआ, अल्टरनेरिया ब्लाइट, स्क्लेरोटिनिया स्टेम रोट, पाउडरी मिल्ड्यू और एफिड्स का कम प्रकोप होता है.

एनआरसीएचबी-506 हाइब्रिड- सरसों की यह किस्म राजस्थान और उत्तर प्रदेश के क्षेत्र के लिए सबसे उत्तम हैं. इसके पौधे 180-205 सेमी लंबे होते हैं. सरसों की एनआरसीएचबी-506 हाइब्रिड किस्म 127-148 दिन में पक जाती है. किसान इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 25 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा इस किस्म में तेल की मात्रा 38.6- 42.5 प्रतिशत होती है.

ये भी पढ़ें: श्री विधि से करें सरसों की बुवाई, मिलेगी दोगुनी उपज, पढ़ें पूरी डिटेल

सरसों की एनआरसीडीआर-601 किस्म- सरसों की यह उन्नत किस्म दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान के विभिन्न राज्यों में की जाती हैं. यह किस्म प्रति हेक्टेयर 26 क्विंटल तक पैदावार देने में सक्षम है. खेत में सरसों की NRCDR-601 किस्म 137-151 दिन में पक जाती है. इस किस्म के सरसों के पौधों की ऊंचाई 161-210 सेमी होती हैं. सरसों की इस किस्म में सफेद रतुआ, (स्टैग हेड), अल्टरनेरिया ब्लाइट और स्क्लेरोटिनिया रोग नहीं लगते हैं.

English Summary: improved mustard varieties top three mustard varieties NRCDR-2 NRCHB-506 Hybrid and NRCDR 601 will give yield up to 26 quantal per hectare Published on: 01 November 2023, 09:41 AM IST

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