1. खेती-बाड़ी

तोरिया, सरसों व राई की उन्नत किस्में अपनाकर अधिक उत्पादन पायें

भारतीय कृषि में अनाज वाली फसलों के बाद तिलहनी फसलों का देष की अर्थव्यवस्था और मनुष्य के स्वास्थ दोनों ही दृष्टि से विषेष महत्व है. तिलहनी फसल के रुप में उगायी जाने वाली सरसों समूह की तोरिया व पीली सरसों को बहुफसलीय फसल-प्रणाली में तथा राई को रबी फसल के रुप में उगाकर देश व प्रदेश में खाद्य तेलों की उपलब्धता को बढ़ाया जा सकता है. यह कहना है कृषि महाविद्यालय के आनुवंषिकी एवं पादप प्रजनन विभाग की वैज्ञानिक, डा. उषा पंत का.

डा. पंत ने बताया कि उत्तराखण्ड में विद्यमान पर्वतीय, मैदानी, तराई, भावर व घाटी के क्षेत्रों की जलवायु एवं उत्पादन परिस्थितियां भिन्न-भिन्न प्रकार की हैं. अतः इनके अनुरुप प्रजाति का चयन करके राई-सरसों के उत्पादन में आशातीत वृद्धि की जा सकती है. साथ ही उन्नत प्रजाति एवं उसके उत्तम बीज के प्रयोग से लगभग 20-25 प्रतिशत उपज आसानी से बढ़ाई जा सकती है.

उन्होंने तिलहन फसलों की खेती के लिए मैदानी, तराई व भावर क्षेत्रों के लिए तोरिया की किस्म पी.टी.-30, जिसकी उत्पादन क्षमता 14-16 कुन्तल प्रति हैक्टेयर है और पंत तोरिया-508 जिसकी उत्पादन क्षमता 16-19 कुन्तल प्रति हैक्टेयर है को उगाने की सलाह दी. इन दोनों प्रजातियों में तेल की मात्रा 42 प्रतिषत है. पीली सरसों की उन्नत किस्मों के बारे में डा. पंत ने बताया कि विनोय प्रजाति की उत्पादन क्षमता 11-14 कुन्तल प्रति हैक्टेयर व तेल की मात्रा 43 प्रतिशत, पंत पीली सरसों-1 की उत्पादन क्षमता 12-15 कुन्तल प्रति हैक्टेयर व तेल की मात्रा 44 प्रतिषत तथा पंत श्वेता की उत्पादन क्षमता 16-20 कुन्तल प्रति हैक्टेयर व तेल की मात्रा 45 प्रतिशत है. राई की समय से बुवाई हेतु प्रजाति रोहणी, क्रांति व कृष्णा की उत्पादन क्षमता 20-28 कुन्तल प्रति हैक्टेयर तथा पंत राई-20 व पंत राई-21 की उत्पादन क्षमता 25-30 कुन्तल प्रति हैक्टेयर है तथा इन सभी प्रजातियों में तेल की मात्रा 40 से 41 प्रतिशत है.

राई की विलंब से बुवाई हेतु संस्तुत प्रजातियों में डा. पंत ने बताया कि वरदान प्रजाति की उत्पादन क्षमता 12-16 कुन्तल प्रति हैक्टेयर, आर्शीवाद की उत्पादन क्षमता 14-17 कुन्तल प्रति हैक्टेयर तथा एन.आर.सी.एच.बी.-101 की उत्पादन क्षमता 12-15 कुन्तल प्रति हैक्टेयर है. इन तीनों प्रजातियों में तेल की मात्रा 40 प्रतिषत है. पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त तोरिया की उन्नत किस्मों के बारे में बताते हुए उन्होंने पी.टी.-507 जिसकी उत्पादन क्षमता 8-12 कुन्तल प्रति हैक्टेयर व तेल की मात्रा 43 प्रतिशत तथा वी.एल.टी.-3 जिसकी उत्पादन क्षमता 9-11 कुन्तल प्रति हैक्टेयर व तेल की मात्रा 38 प्रतिशत तथा पंत हिल तोरिया-1 जिसकी उत्पादन क्षमता 5-10 कुन्तल प्रति हैक्टेयर व तेल की मात्रा 42 प्रतिशत को बोये जाने का सुझाव दिया. पर्वतीय एवं मैदानी दोनों क्षेत्रों हेतु उपयुक्त पी.टी.-303 की उत्पादन क्षमता पर्वतीय क्षेत्रों हेतु 9-11 कुन्तल प्रति हैक्टेयर व मैदानी क्षेत्रों हेतु 14-18 कुन्तल प्रति हैक्टेयर एवं तेल की मात्रा 42 प्रतिशत के साथ-साथ उत्तरा प्रजाति जिसकी उत्पादन क्षमता 15-18 कुन्तल प्रति हैक्टेयर व तेल की मात्रा 44 प्रतिशत है को बोये जाने के लिये उन्होंने कहा. डा. उषा पंत ने बताया कि इन उन्नत प्रजातियों की उपयुक्तता के आधार पर क्षेत्र एवं परिस्थितियों के लिए उपयुक्त किस्म का चयन कर अक्टूबर के अंत तक बुवाई कर किसान अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

चंद्र मोहन, कृषि जागरण

English Summary: Get more production by adopting advanced varieties of Taria, Mustard and Rye.

Like this article?

Hey! I am . Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News