1. सम्पादकीय

किसान दिवस पर कृषि जागरण का खास प्रोग्राम, आरसीएफ के निदेशक ने किसानों को किया संबोधित

हेमन्त वर्मा
हेमन्त वर्मा
M C Dominic (Editor-in-chief Krishi Jagran Media Group) with K. U. Thankachen (Director Marketing, RCF)

M C Dominic (Editor-in-chief Krishi Jagran Media Group) with K. U. Thankachen (Director Marketing, RCF)

किसान दिवस (Kisan Diwas) के अवसर पर कृषि जागरण द्वारा वर्चुअल प्रोग्राम आयोजित किया गया. इस अवसर पर देश की दिग्गज हस्तियों ने अपने विचार रखे. कृषि जागरण और एग्रीकल्चर वर्ल्ड के प्रधान संपादक श्री एम.सी. डॉमिनिक के अलावा पद्मश्री अवार्डी श्री भरत भूषण त्यागी (प्रगतिशील किसान), श्री विजय सरदाना (आर्थिक और व्यापार नीति विश्लेषक), श्री विनोद कुमार गौड़ (अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड), श्री आशीष अग्रवाल (प्रमुख- एग्री बिजनेस, बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी), श्री K.U. Thankachen (निदेशक विपणन, राष्ट्रीय रसायन और उर्वरक लिमिटेड.), श्री बसंत कुमार (सीनियर मैनेजर, फ़ार्म इक्विपमेंट एंड पावर सोलुफ़ियन बिज़नेस ग्रीव्स कॉटन लिमिटेड), श्री हरि रजागोपाल (VP- Capital Markets and Strategic Initiatives Samunnati) और श्री जुझार सिंह विर्क (Sr. Vice President Marketing, VST Tillers Tractors Limited) ने अपने अमूल्य विचार प्रस्तुत किए.

किसान दिवस पर कृषि जागरण द्वारा वर्चुअल प्रोग्राम में राष्ट्रीय रसायन और उर्वरक लिमिटेड (Rashtriya Chemicals and Fertilizer Ltd.) के निदेशक विपणन श्री K.U. Thankachen ने बताया कि कैसे उर्वरक एवं सूक्ष्म पोषक तत्व द्वारा फसल के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है.

उन्होने कहा कि देश के पांचवे प्रधानमंत्री श्री चौधरी चरण सिंह की जयंती मनाने के लिए हर साल किसान दिवस मनाया जाता है. भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने किसानों के जीवन सुधार करने के लिए विभिन्न नीतियों की शुरुआत की. उन्होंने कई भूमि सुधार कानून (Land reform bill) पेश करके देश के कृषि क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई.  

कृषि की वर्तमान स्थिति (Current situation of Agriculture)

U. Thankachen ने कहा कि भारत की जनसंख्या वर्तमान स्थिति में लगभग 135 करोड़ से ज्यादा है और खाद्यान उत्पादन 29 करोड़ टन के करीब है. देश की जनसंख्या साल 2050 तक 166 करोड़ हो जाने का अनुमान है. इस बढ़ती जनसंख्या के लिए खाद्यान उत्पादन की आवश्यकता 33 करोड़ टन तक की होगी. बढ़ती मांग की आपूर्ति के लिए अधिक खाद्यान उत्पादन के प्रयास किए जा रहे है. फसल के अधिक उत्पादन के लिए किसानों को बदलते समय के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए. इनमें किसान उन्नत किस्म के बीज, समय पर फसल की बुवाई, उर्वरक का उपयोग, कीट-रोग एवं खरपतवार नियंत्रण, समय पर कटाई आदि का उपयोग कर रहे हैं. इसमें उर्वरक सबसे महंगा और महत्वपूर्ण उपादान है. हम सब जानते हैं कि खेती किसानों की आय एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मूल आधार है. अधिक उत्पादन के प्रयास में मृदा स्वास्थ्य पर कुप्रभाव भी देखने को मिला है जिससे भूमि की उर्वरकता कम होती जा रही है. मृदा में लाभकारी सूक्ष्म जीवों की उपस्थिती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. जैविक एवं अजैविक पदार्थों का सन्तुलन बिगड़ने से भूमि अनेकों प्रकार के रसायनों से प्रदूषित होकर धीरे-धीरे बंजर होती जा रही है.

खाद एवं उर्वरक के प्रकार और कृषि में इनका महत्व (Types of fertilizers & manure and their importance in agriculture)

श्री K. U. Thankachen ने कहा कि खाद एवं उर्वरक शब्द का प्रयोग जल के अतिरिक्त उन सभी पदार्थों के लिए किया जाता है जो मिट्टी की उर्वरकता में वृद्धि के साथ पौधों की वृद्धि में भी सहायक होते हैं. उर्वरक के दो मुख्य प्रकार है: एक है ऑर्गेनिक उर्वरक (Organic fertilizers) जैसे गोबर की खाद, वर्मिकम्पोस्ट, विभिन्न प्रकार की खलिया जैसे अरंडी, नीम, महुआ, मूंगफली, मछली के खाद आदि का जिनमें समावेश होता है. खेतों में उगाकार उसी खेत में जोत देने वाली हरी खाद में ढेंचा, बरसीम, सनई, आदि भी Organic fertilizers में आते हैं. इसके अलावा जीवाणु खाद में राइजोबियम, एजोक्टोबेक्टर आदि का समावेश भी होता है. Rashtriya Chemicals and Fertilizer Ltd. की तरफ से स्वस्थ्य भारत अभियान के अंतर्गत जैविक उर्वरक, सिटि कम्पोस्ट तथा जीवाणु उर्वरक बायोला किसानों में लोकप्रिय होता जा रहा है.

दूसरा रासायनिक उर्वरक (Chemical fertilizer) है जो अकार्बनिक पदार्थ होते हैं. इन्हें कारखानों में तैयार किया जाता है. इनमें पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है. इसमें तीन प्रमुख प्रकार के उर्वरक हैं यानी सीधे उर्वरक, संयुक्त उर्वरक और अन्य सूक्ष्म पोषक उर्वरक. सीधे उर्वरक (Straight Fertilizer) में भी तीन प्रकार के उर्वरक पाए जाते हैं- नाइट्रोजन उर्वरक, फास्फेटिक उर्वरक और पोटाश उर्वरक.

नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक जैसे अमोनियम सल्फेट, कैल्शियम नाइट्रेट, सोडियम नाइट्रेट, यूरिया आदि. फोस्फेटिक उर्वरक में सिंगल सुपर फास्फेट, ट्रिपल सुपर फास्फेट तथा पोटेशिक उर्वरक में पोटाश की मात्रा अधिक पाई जाती है, जैसे: एमओपी, पोटेशियम सल्फेट आदि है.

संयुक्त उर्वरक यानी कंपलेक्स फर्टिलाइजर में नत्रजन और फास्फोरस होता है, जैसे: डीएपी (डाई अमोनियम फास्फेट). अन्य उर्वरक जैसे: 15-15-15, 0-10-26, आदि ग्रेड बाजार में उपलब्ध हैं. सूक्ष्म अन्य द्रव्य उर्वरक यानी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स में फेरस सल्फेट, कॉपर सल्फेट, मैग्नीज सल्फेट, अमोनियम मॉलीब्लेड़, आदि प्रकार के उर्वरक उपलब्ध है. इसके अलावा किसानों में लोकप्रिय पानी में 100% घुलनशील उर्वरक यानी water-soluble फर्टिलाइजर जैसे कि आरसीएफ की सुजला, 19-19-19, 13-40-13, 12-61-0, 13-0-45, 0-0-50 आदि. जिस प्रकार मनुष्य को जीवित रहने के लिए विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व की आवश्यकता होती है उसी प्रकार पौधों के संपूर्ण विकास के लिए कम से कम 17 किस्म के पोषक की आवश्यकता रहती है.

निदेशक विपणन (Director Marketing) ने आगे बताया कि इनमें से गैर खनिज तत्व हवा और पानी से स्वयं लेते हैं लेकिन शेष 14 तत्व पौधे जड़ों द्वारा मिट्टी से ही प्राप्त करते हैं. पौधों के पोषक तत्व उन तत्वों को कहते हैं जिनकी आवश्यकता पौधों को उनके जीवन वृद्धि और उपचाय क्रियाओं को चलाने के लिए होती है. पौधें इनको अपनी जड़ों के माध्यम से सीधे मिट्टी से या वातावरण से प्राप्त करते हैं. जिन पोषक तत्वों की पौधों को ज्यादा आवश्यकता होती है उन्हें स्थूल पोषक तत्व कहते हैं. जिन पोषक तत्वों की पौधों को कम मात्रा में जरूरत होती है उन्हें सूक्ष्म पोषक तत्व कहते हैं. प्रत्येक तत्व का पौधे के अंदर अलग-अलग कार्य और महत्व है, जो पौधे की विभिन्न अवस्थाओं में पूर्ण होता है. कोई एक तत्व दूसरे तत्व का पूरक नहीं है या संतुलन बिगड़ने से उत्पादन सीधे प्रभावित होता है. पौधों के पोषक तत्वों को चार समूहों में बांटा जा सकता है एक है गैर खनिज पोषक तत्व जैसे हाइड्रोजन ऑक्सीजन कार्बन दूसरा प्रधान पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश. गौण खनिज तत्वों जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर. सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे जस्ता, लोहा, मेगनीज, निकल, कॉपर, मोलोब्डेनम का समावेश होता है.

पौधों के लिए उचित विकास और भरपूर फसल के लिए यह सारे तत्व मिट्टी में सही और संतुलित मात्रा में हो प्राप्त करना जरूरी है, लेकिन मिट्टी की भौतिक एवं रासायनिक संरचना में विषमताओं के फल स्वरूप यह तत्व अक्सर असंतुलित मात्रा में पाए जाते हैं. लगातार एक ही जगह फसल उगाने एवं सघनता बढ़ाने से धीरे-धीरे मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिससे उपज पर बुरा प्रभाव पड़ता है. इस कमी को पूरा करने के लिए उचित मात्रा में खाद एवं उर्वरक की मात्रा देनी पड़ती है ताकि मिट्टी में पोषक तत्व संतुलन मात्रा में बने रहे.

मिट्टी का परीक्षण कर उर्वरक का संतुलित प्रयोग करें (Make a balanced use of fertilizer by doing soil testing)

कार्बनिक खादों के साथ-साथ रासायनिक उर्वरक के महत्व को अस्वीकार नहीं किया जा सकता. अधिक उपज देने वाली उन्नत किस्म से उनकी क्षमता के अनुरूप उपज प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि फसलों या पौधों में पोषक तत्वों की आवश्यकता को पूरा किया जाए. इसके लिए रासायनिक उर्वरक के अतिरिक्त और कोई स्त्रोत नहीं हो सकता. इनके जरूरत से ज्यादा उद्योग से बहुमूल्य खाद नष्ट होने के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है इसलिए उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए. मृदा परीक्षण यानी खेत की मिट्टी के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों का निरीक्षण करना.

और उसकी उपजाऊ शक्ति का वैज्ञानिक ढंग से मूल्यांकन करना है. इसके जरिए हम मिट्टी में हम पोषक तत्वों की मात्रा और उनकी उपलब्धता का सही मूल्यांकन कर सकते हैं. फसल के लिए आवश्यकता के अनुरूप संतुलित मात्रा में उर्वरक डाल सकते हैं. पोषक तत्वों के अलावा मिट्टी की अम्लीयता या क्षारीयता या पीएच एवं विद्युत चालकता (EC) का पता लगाकर भूमि सुधारक रसायन जैसे कि चूना, जिप्सम की अनिवार्यता का सही मात्रा का निर्धारण भी कर सकते हैं.

सूक्ष्म पोषक तत्वों की फसलों में आवश्यकता और महत्व (The need and importance of micronutrient in crops)

इसके साथ-साथ राष्ट्रीय रसायन और उर्वरक लिमिटेड के निदेशक विपणन ने बताया कि पौधों में पोषक तत्वों की कमी एवं उनके उपयोग की दृष्टि से नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश अधिक महत्वपूर्ण है. अन्य पोषक तत्वों की भांति सूक्ष्म पोषक तत्व फसल एवं उससे प्राप्त होने वाली उपज पर भी प्रभाव डालते हैं. सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता फसल को बहुत कम मात्रा में होती है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इनकी आवश्यकता पौधों को नहीं है. सूक्ष्म पोषक तत्वों की पौधों पर कमी होने पर फसल उत्पादन और गुणवत्ता में प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. मृदा परीक्षण (Soil testing) के आधार पर देश की मृदाओं में सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी का प्रतिशत निकाला गया है जिसमें जस्ता, लोहा, बोरान, मोलिब्डेनम, मेग्नीज, कॉपर की कमी देखी गई है.

राष्ट्रीय रसायन और उर्वरक लिमिटेड. (RCF) द्वारा सूक्ष्म पोषक तत्व देने के लिए माइक्रोला नामक उत्पाद का निर्माण किया गया है, जिसमें यह सभी तत्व मौजूद हैं. इससे उपज वृद्धि में अच्छे परिणाम दिखाई देते हैं. कुछ किसानों में यह धारणा है कि रासायनिक उर्वरक डालने से मिट्टी खराब होती है लेकिन यह सही नहीं है, यदि सही मात्रा एवं सही अनुपात का सही उपयोग किया जाए तो अधिक उपज ली जा सकती है.

अंत में श्री K. U. Thankachen ने कृषि जागरण और एग्रीकल्चर वर्ल्ड के प्रधान संपादक श्री एम.सी. डॉमिनिक और देश के किसानों को किसान दिवस पर फिर से शुभकामना दी.

English Summary: RCF Director Marketing addressed farmers on the occasion of Farmers Day organized by Krishi Jagran

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