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Ganesh chaturthi 2021: जानिए गणेश चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त, और इसका महत्व

स्वाति राव
स्वाति राव

Ganesh Chaturthi

भगवान गणेश को सुख समृद्धि और ज्ञान का देवता माना जाता है. भगवान् गणेश की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है. इसलिए गणेश चतुर्थी का भी विशेष महत्व होता है.  10 दिनों तक गणेश जी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है. ये पर्व खासतौर से महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है. इस लेख में पढ़ें गणेश चतुर्थी की तारीख  और शुभ मुहूर्त और विधि .

गणेश चतुर्थी का महत्व (Significance of Ganesh Chaturthi)

ऐसा माना जाता है भाद्रपद के शुक्ल पक्ष के दिन भगवान् गणेश का जन्म हुआ था इसलिए हर साल यह दिन गणेश भगवान् के जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाता है. श्री गणेश बिघ्नहर्ता हैं. गणपति अपने भक्तों की पुकार जल्दी सुनते हैं.

गणेश चतुर्थी तारीख (Ganesh Chaturthi Date)

हिन्दू पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है.  यह त्यौहार  सभी देवताओं में प्रथम आराध्य भगवान गणेश की पूजा करने और उन्हें प्रसन्न करने का सबसे अच्छा अवसर होता है. इस साल गणेश चतुर्थी 10 सितंबर 2021 को मनाई जा रही है.

गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त (Ganesh Chaturthi Auspicious Time)

10 सितंबर 2021, शुक्रवार को गणेश चतुर्थी पर्व है. इस दिन यदि आप शुभ मुहूर्त में ही गणपति की स्थापना करेंगे, तो ये आपके लिए काफी फलदायी होगा. पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 12:17 बजे से लेकर रात 10 बजे तक रहेगा. आप 10 सितंबर को 12 बजे के बाद कभी भी गणपति की स्थापना और पूजा आदि कर सकते हैं

गणेश चतुर्थी पूजा विधि (Ganesh Chaturthi Puja Method)

गणपति की स्थापना करते समय सबसे पहले चौकी पर जल छिड़कें और इसे शुद्ध करें.

इसके बाद चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर अक्षत छिड़के.

अब भगवान गणेश की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें.

इसके बाद भगवान गणेश को स्नान कराएं.

गणपति की दाईं ओर जल का कलश रखें.

अब हाथ में अक्षत लेकर भगवान गणेश का ध्‍यान करें और उनका आव्हान करें.

इस दौरान गणेश जी के “ ऊं गं गणपतये नम:”  मंत्र का जप जरूर करें.

गणपति स्थापित करने के बाद भगवान को सिंदूर, केसर, हल्दी, चंदन, मौली, जनेऊ, लाल पुष्प, दूर्वा , मोदक, नारियल सहित अन्य सामग्री चढ़ाएं.

गणेश जी को सिंदूर व दूर्वा अर्पित करके 21 लड्डूओं का भोग लगाएं.

गणेशजी की आरती करें और सबके विघ्न दूर करने की प्रार्थना करें या मनचाही प्रार्थना करें.

इनमें से 5 लड्डू गणेश जी को अर्पित करके शेष लड्डू गरीबों या ब्राह्मणों को बाँट दें.

गणेश चतुर्थी की कथा, गणेश चालीसा पढ़ें.

खुद भी प्रसाद ग्रहण करें और प्रसाद वितरण करें.

10 दिनों तक या जितने दिनों के लिए आप गणेशजी की स्थापना कर रहे है उतने दिनों तक रोज गणपतिजी की पूजा और आरती ज़रूर करें.

English Summary: the auspicious time of Ganesh Chaturthi Puja, and its importance

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