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पौधे भी आपस में करते है बात जानिए कैसे

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क्या आप जानते है कि इसानों की तरह पौधे भी आपस में एक-दूसरे से बातचीत कर सकते है. वह हमारी बात को समझ सकते है. पेड़ -पौधों को म्यूजिक सुनना भी पसंद है. वैज्ञानिक शोध में यह बात सामने आई है कि पेड़ फूलों के माध्यम से बातचीत करते है. बता दें कि पौधों को भी संगीत सुनना काफी पसंद होता है, पौधे काफी संवेदनशील होते है और जब कोई उनको प्यार करता है वह उनको महसूस करते है. वह अपनी बात कह सकते है. पौधे न केवल सिर्फ किसी चीज को महसूस करते है बल्कि अपनी बात कहते है. वह हमारी तरह एक्टिव रहते है. पौधे किसी भी तरह से खतरे को भांप कर अपनी रक्षा के उपाय भी करते है. साथ ही अपने साथी पौधों को इसकी सूचना भी देते है.

अपनी रक्षा के लिए आवाज लगाते पौधे

फूल और पौधे कई बार अपनी ही सुगंध के सहारे अपनी रक्षा के लिए मदद मांगते है, जब कोई कीट पत्तियों, डालियो और कीट को खा रहा होता है तो वह अपनी महक के जरिए पौधे अपने मददगार इन्सेकट को आकर्षित करते है. ये महक से आकर्षित होकरपौधे के पास आ जाते है और उसको नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खा जाते है. जैसे अगर हम तबांकू के पौधे की बात करें तो यह पौधा सलाइवा की मदद से हॉर्नवर्म के कैटरपिलर को पहचान लेते है और बाद में यह केमिकल सिग्नल को छोड़ता है.

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खतरा देख सुरक्षा बढ़ते

पौधे अपने आसपास के केमिकल सिग्नल्स को समझ सकते है. कई बार तो दूसरे पौधों पर भी खतरा मंडराता रहता है, उसके बाद पौधे उन सिग्नल को देख अपनी सुरक्षा बढ़ा देते है, क्योंकि उनको पता चल जाता है कि कोई भूखा इन्सेक्ट आसपास ही मंडरा रहा है.

एक दूसरे से मुकाबला करते पौधे

सारे पौधे सूरज की रोशनी, अपने पोजीशन के लिए आसपास के पौधों के साथ धकका-मुक्की भी करते है, यह एक अलग बात है कि ऐसा वह अपने तरीके से करते है. इन्ही में एक झगढ़ालु प्लांट है नैपवीड. नैपवीड की जड़े एक खास किस्म का केमिकल रिलीज करती है जो कि उसे मिट्टी से पोषक तत्वों को प्राप्त करने मे मदद करती है.साथ ही वो केमिकल नैपवीड अपने आसपास की जग को हथिया लेता है. यह न स्वार्थी और बदमाश पौधा होता है. लेकिन कई तरह के प्लांट स्मार्ट भी होते है. इस केमिकल के खिलाफ वह सुरक्षा कवच भी बना लेते है. ल्यूपिन की जड़े ऑक्लेजिक एसिड को निकालती है जो नैपवीड के द्वारा रिलीज किए गए जाने वाले नुकसानदायक केमिकल के खिलाफ बैरिकेड बना देती है.

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