1. विविध

छठ महापर्व को मनाने की पीछे की मान्यता व पूजा विधि

सिनेमा में जिस तरह से हर एक कला समाहित होती है. ठीक उसी तरह से छठ महापर्व में सभी विज्ञान समाहित हैं. इस पर्व की शुरुआत सफाई अभियान से होती है, फिर खान-पान की विविधता, इस पर्व में जहां एक ओर कद्दू-भात की सादगी होती है तो वहीं दूसरी ओर खीर, ठेकुआ, चावल के लड्डू, गुड़ की मिठाइयों की विविधता होती है. प्रकति से जुड़ा यह महापर्व अमीरी-गरीबी के भेद से परे सामूहिकता का उत्सव है. इस पर्व में जहां निज कल्याण की कामना होती है तो वैश्विक कल्याण की भावना भी होती  है. इस पर्व की शुरुआत इस वर्ष नहाय-खाय के साथ रविवार को चार दिवसीय पर्व के रूप में हुई है. इस महापर्व का अनुष्ठान करने वाले सभी व्रती नहाय-खाय के साथ ही गृहस्थ जीवन से विरत हो जाते है और छठ मैया की पूजा में दिन-रात गुजारते हैं. इस पर्व का सोमवार को खरना था. जिसे इस व्रत का  सबसे कठिन चरण माना जाता है. इस दिन छठ का उपवास करने वाले सभी व्रती निर्जला उपवास रखते हैं और शाम में पूजा के बाद खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते है. परंपरा के मुताबिक, ज़्यादातर  व्रती खीर बनाने में गुड़ का इस्तेमाल करते हैं. खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती दोबारा उपवास शुरू करते है. इस महापर्व का 13 नवंबर यानि मंगलवार को पहला अर्घ्य सूर्य देवता को दिया जाएगा. उसके बाद बुधवार सुबह उगते हुए सूर्य देवता को अर्घ्य देने के साथ ही इस पर्व की पूजा संपन्न हो जाएगी.

इस महापर्व को मनाने की पीछे की मान्यता

हिन्दू धर्म के अनुसार, लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटने के बाद छठे दिन भगवान राम और माता सीता ने छठ मनाया था. इस मौके पर भगवान राम और माता सीता ने व्रत रखा था. इस छठ महापर्व को लेकर यह भी मान्यता है कि वन में महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में निवास के दौरान भी माता सीता व्रत रखती थीं. ऐसा भी माना जाता है कि सूर्य पुत्र कर्ण भी धूमधाम से छठ मानते थे. वह अंग देश (वर्तमान में भागलपुर) के राजा थे. साल-दर-साल छठ पूजा करते हुए कर्ण ने काफी शक्तियां हासिल कर ली थीं.

विवेक राय, कृषि जागरण

English Summary: Recognition and worship method behind celebrating Chhath Mahaparv

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