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अलग-अलग तरह के फूलों को इकट्ठा करके बनाई फ्लोवर टी तिजान

Kashmiri Kahana

मानसून में बारिश के दौरान लोग गर्म या खौलती चाय पीने की तलब रखते है. साथ ही कई लोग कैफीन से बचने के लिए ग्रीन चाय और लेमन चाय को लेना पसंद करते है. ऐसे में राजस्थान के जोधपुर में रहने वाली रेखा साबू इस तरह के मौसम में फ्लोवर से बनी टी को लेना पसंद करती है. उनके मुताबिक फूलों के इस तिजान यानी कहवा में कई प्रकार के कहवा में की तरह के फ्लेवर्स है. रेखा ने फ्लॉवर्स की महक को जानने के बाद  उनके फायदें को तलाशने की पूरी कोशिश की है. रेखा ने इसके लिए बेंगलूरू, ऊटी, थाईलैंड और टर्की के बगानों में विजिट करके करीब 35 तरह के फूलों को परखा है और 12 तरह के फूलों को चुना है. इन सारे फूलों के एक्सट्रैक्ट को कहवा में बदलने के लिए कई तरह के एक्सपेरिमेंट किए है.

इंटरनेट से जाना फूलों की सारी जानकारी

रेखा कहती है कि उन्होंने इंटरनेट के माध्यम के सहारे बोटेनिकल और अन्य एंगल से इन फूलों के बेनिफिट को जाना है. उन्होंने बताया कि किस तरह से आयुर्वेद की स्टडी को शुरू कर दिया है. छोटी-मोटी बीमारियों के लिए घर पर ही फूलों का तिजना बनना शुरू कर दिया है. क बार लैमन ग्रास और जिंजर तिजान से बच्चों का बुखार कम होते देखा तो उनका काम मे इंट्रेस्ट बढ़ने लगा. अपनी रूचि को बढ़ाने के लिए साबू ने थाईलैंड.,टर्की सहित देश के विभिन्न शहरों के बागानों में विजिट किया और वहां से फूलों के लिए कॉन्टेक्ट भी किया है. वह पंखुड़ियों को कलेक्ट करके उसमें हर्बल्स, स्पाइसेज, फ्लॉवर्स और 32 प्रकार के इंटीग्रेड्स उसमें मिलाए है.

kahwa

प्रोडक्ट से कई फायदें

रेखा साबू ने बताया कि मैंने जब शुरू में यह तिजना बनाया तो इसके फायदे को फूड कॉपरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से टेस्ट करवाया गया है. लेबोरट्री टेस्ट के साथ  स्टरलाइज भी बनाया है. इस कहवा में अनिद्रा, माइग्रेन, फीवर, टमी फेड वर्न, हैडके, शरीरक क्षमता में मजबूती समेत कई तरह के उपचार शामिल है. इसमें कैमोमाइल और जैस्मीन के जरिए नींद ना आने की समस्या का समाधान होता है तो लेमन ग्रास और जिंजर तिजान से फीवर, विटामिन ए से भूरपूर पी ब्लू फ्लॉवर से स्किन, हेयर और आइज प्रबॉल्म, रोज से लेडीज और पीयर मिंट से टमी फेट और माइग्रेन जैसी बीमारियों से आराम मिलता है. इसमें सेफ्रोन, दालचीनी, लौंग, जावित्री, आटीचोक के अलावा कई तरह के मसाले मिक्स मिलते है.

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