क्यों बन रहा है ईयर फोन मौत का कारण, जानिए महत्वपूर्ण बातें

आज के आधुनिक जीवनशैली में हेडफोन इंसान की जरुरतमंद चीज़ों में से एक बनता जा रहा है। वैसे इसे इंसान की ज़रूरत कहें या आदत ये तो इंसान के उपर निर्भर करता है कि वो इसे किस प्रकार से उपयोग करना चाहते हैं। कई बार इसे लापरवाही से इसतेमाल करना भी घातक साबित होता है। आए दिन हमें कई सड़क हादसों के बारे में सुनने को मिलता है जिसका प्रमुख कारण कान में ईयरफोन0 लगाना होता है। हाल ही में हमने एक ऐसे ही घटना के बारे में उत्तर प्रदेश के कुशिनगर में सुना था जिसमें ड्राईवर ने कानों में ईयरफोन लगा रखा था जिसके वजह से सड़क हादसा हुआ और कई मासूम बच्चों की दुर्घटना में मौत हो गई।   

कान में ईयरफोन लगाने कि चलन की बात करें तो ये युवाओं तक ही सिमीत नहीं है बल्कि हर वर्ग के लोगों के लिए यह अब आम बात हो गई है। कान में इयरफोन लगाने से कई बार हादसे हुए हैं इसमें कई बार सामने वाले जिसकी गलती नहीं होती है वो भी हादसे का शिकार हो जाते हैं। इन हादसों का कारण होता है सामने से आ रहे वयक्ति के करण संतुलन का बिगड़ना। ये हादसे सिर्फ सड़क तक ही सीमित नही हैं कई बार लोग ईयरफोन लगाने की वजह से ट्रेन की भी चपेट में आ जाते हैं। ये तो कुछ हादसों से जुड़ी बातें थीं लेकिन इन हादसों को कुछ बातों का ध्यान रखकर दूर भी किया जा सकता है।  

सड़क पर आप एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका में रहें। संगीत सुनना या फोन पर बतियाना आपका व्यक्तिगत मामला है इसे सार्वजनिक कर दूसरों की जान से खेलने का आपको कोई हक नहीं।

अगर आप संगीत सुनने के बहुत ज्यादा शौकिन हैं और ईयर फोन पर संगीत सुनना आपको अच्छा लगता है तो भूल से भी 2 घंटे से अधि‍क समय तक तेज आवाज को न सुनें। यह आपके कानों को बड़ी क्षति पहुंचा सकता है।

ईयर फोन में कम से कम ध्वनि रखने पर भी तेज़ आवाज आती है तो कोशिश करें की कम से कम ध्वनि में ही संगीत को सुनें।

सड़क पर ईयर फोन का इस्तेमाल करना आपके लिए तो हानिकारक है ही, साथ ही सड़क पर चल रहे ये अन्य लोगों के लिए भी हानीकारक हो सकता है तो एक जिम्मेदार नागरिक बनें और अपने कर्तव्यों का पालन करें। 

यदी आप लंबे समय तक ईयर फोन का इस्तेमाल करते हैं तो आपकी कान की नसें थक जाती हैं और इसका ज्यादा देर तक इस्तेमाल करने से नर्वफटीग का खतरा बढ़ जाता है।

ईयर फोन के इस्तेमाल करने से सिर्फ हादसों का ही डर नहीं है बल्कि इससे कई तरह के इंफेक्शन का भी खतरा होता है। यदि हम दूसरों के द्वारा इस्तेमाल किया गया ईयर फोन का इस्तेमाल करते हैं तो कई तरह के बैक्टीरियल इंफेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है।

हर रोज 4 से 5 युवा मरीज इस रोग से ग्रस्त आते हैं, जिनका एक ही कारण मोबाइल फोन के इस्तेमाल से हियरिंग लॉस होना होता है। ऑडियोमिट्री के जरिए ऊंचा सुनने की जांच में 25 से 30 प्रतिशत मरीज इस बीमारी से ग्रसित हैं। नसें डैमेज होने के कारण इसका उपचार संभव नहीं है।

यदि आपको सड़क पर कोई ईयर फोन इस्तेमाल करता हुआ दिखता है तो उसे ईयर फोन के दुर्लभ परिनामों के बारे में जागरुक करें।

ईयर फोन लगाने से आसपास हो रही हलचल या ध्वनि का पता नहीं चलता है जिसके कारण हादसे हो जाते हैं।

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