सरकार की नाक के नीचे गुथ डाली भ्रष्टाचार की माला, जैविक खाद की खरीद में भारी घोटाला

मर रहे देश में किसान और अमीरी का है बोल-बाला!

तुम्हें किसी की क्या परवाह ऐ हुकुम के इक्के,

तुम बस करते जाओ घोटाले पर घोटाला

उपर्युक्त लिखी बातों से शायद इतना तो आप समझ ही गए होंगे की ये खबर घोटाले से जुड़ा हुआ है। तो हम भी आप को कहे देते हैं की आप बिल्कुल सही समझ रहे हैं। वैसे हमारे देश में घोटालों की कहानी या खबर कोई नई नहीं है। आजादी के बाद से हमारे देश में न जाने कितने घोटाले हो चुके हैं, कुछ ऐसे जिनके बारे में हमें जानकारी है और कुछ ऐसे जिनके बारे में किसी को भी जानकारी नहीं है। खैर वो तो जांच का विषय है, हमें इससे क्या ?

हमें तो बस इस बात से मतलबा है की हमारे किसानों के साथ ठग न हो। किसानों के लिए व्यवस्था इतनी दुरुस्त होनी चाहिए की हमारे किसानों को ठगने से पहले कोई हजार बार सोचे।

चलिए खबर पर आते हैं, तो खबर ये है की हरियाणा में बिते वर्ष 2014-15 और वर्ष 2015-16 में कषि विभाग द्वारा जैविक खाद की खरीद में भारी घोटाला किया गया है। जैविक खाद की यह खरीद कृषि विभाग ने बीज निगम, भूमि सुधार निगम और हैफेड के जरिए की थी। यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने इसकी जांच की। जिसके बाद मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के पुलिस महानिरीक्षक ने प्रथम दृष्ट्या जांच सही पाने पर पंचकूला पुलिस को धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करवा दिया है। झज्जर के रामकंवार ने इसकी शिकायत की थी जिसके बाद इसकी जांच की गई। यह घोटाला ऐसा है, की कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए घटिया जैविक खाद के नमूने पास किए गए।

जांच में पाया गया है कि विभाग को सप्लाई किया गया खाद जैविक खाद न होकर दर्जे में हलका सिटी कम्पोस्ट था। कृषि विभाग व हैफेड के अधिकारियों ने फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर 1985 का उललंघन करके सप्लायर फर्म को घटिया खाद के बदले अच्छे दर्जे के खाद की दरों पर भुगतान किया। इस तरह से राज्य सरकार को बड़ी वित्तीय हानि पहुंचाई गई।

बता दें की इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा-13 और जालसाजी व धोखाधड़ी की अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।  

 

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