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जलसंकट की वजह से गुजरात में प्याज की बुवाई में 80 % गिरावट आई

बीते कई महीनों से गुजरात में जल संकट पैदा हो गया है जिसके कारण वहां की कई तरह की फल सब्जियों की खेती प्रभावित हो गई है. जिसका सीधा असर प्याज की खेती पर देखने को मिला है और इसकी बुवाई में 80 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है. अगर राज्य के कृषि विभाग की बात करें तो बुवाई कम होने की वजह से अब सूबे में प्याज के दाम आसमान छूने लगे है. इसकी एक वजह भारत-पाकिस्तान के बीच हुए पिछले महीनों तनाव भी है,क्योंकि वहां पर बड़े व्यापक बड़े पैमाने पर गुजरात समेत कई राज्यों से प्याज पहुंचता था लेकिन गुजरात के सब्जी व्यापारियों ने इस बात का एलान कर दिया था कि वे पाकिस्तान को सब्जियां नहीं बेचेंगे. बता दे कि खासतौर पर यहां का टमाटर पाकिस्तान जाता था.

गुजरात में गहराया जल संकट

पिछले कुछ महीनों से राज्य में प्याज की खेती कम हो गई है, इसके पीछे की मुख्य वजह गुजरात में पानी की कमी होना है. पानी के नहीं होने के चलते किसानों ने प्याज की बुवाई घटा दी जिसका सीधा प्रभाव उत्पादन और बाजार पर पड़ा है. वहीं बुवाई कम होने कि वजह से प्याज के दाम भी इस बार काबू के बाहर हो सकते है. इसका सीधा असर आम जनमानस पर पड़ सकता है.

बुवाई की लागत नहीं हुई वसूल

गुजरात के किसानों ने महरुला और अमरेली में बड़ी संख्या में इस सीजन में प्याज का विकल्प इसीलिए नहीं चुना, क्योंकि पिछले साल भी उनकी बुवाई की लागत वसूल नहीं हो पाई थी. इससे उनको भारी नुकसान हुआ था, कई किसानों को प्याज के दाम एक रूपये से दो रूपये मिले थें.

पड़ोसी राज्यों से चुनौती

किसानों का कहना है कि पिछले साल मिले खराब फसलों के दामों ने उनको प्याज की फसल बुवाई करने से डरा दिया है.  किसान आज राष्ट्रीय स्तर पर गतिशीलता की ओर इशारा कर रहे है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे राज्य कम कीमत और उच्च गुणवत्ता के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रहे है. इस प्रकार किसानों का कहना है कि थोक बाजार में महुवा में जुलाई से अगस्त तक प्याज  2.5 रूपये से 6 रूपये प्रतिकिलो ग्राम के हिसाब से प्याज मिलता है. जो कि वर्तमान में बढ़कर 20 रूपये प्रति किलोग्राम तक हो गया है. बता दें कि भारत में महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और राजस्थान के बाद गुजरात पांचवा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है.



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