महाराष्ट्र में गन्ना किसानों ने चीनी मिल कार्यालयों में लगाई आग

पश्चिमी महाराष्ट्र में गन्ना किसानों द्वारा जारी आंदोलन शुक्रवार को हिंसक हो गया. आंदोलनकर्ताओं ने सांगली में दो सहकारी चीनी मिलों के कार्यालय को आग के हवाले कर दिया। समस्या का कोई समाधान न मिलता देख किसान नेता और सांसद राजू शेट्टी ने रविवार को चक्का जाम का आह्वान किया है.

वर्ष 2018-19 के क्रशिंग सीजन की शुरूआत के बाद से ही चीनी के कटोरे माने जाने वाले पश्चिमी महाराष्ट्र के किसान बेहतर भुगतान के लिए आंदोलन कर रहे हैं. स्वाभिमानी शेतकारी सगंठन (एसएसएस) के प्रमुख शेट्टी ने 9 .5 प्रतिशत की मूल वसूली के आधार पर 2,950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान की पहली किश्त की मांग की थी. इस साल, गन्ना का निष्पक्ष और लाभकारी मूल्य 2,750 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था. इसके लिए 9.5 प्रतिशत की पूर्व दर की बजाय 10 प्रतिशत की आधार वसूली दर निर्धारित की गई थी.

कोल्हापुर जिले के लिए 12.50 प्रतिशत की औसत वसूली के आधार पर 3,817 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पहली किस्त का भुगतान होगा. हालांकि, मिल मालिकों ने किसानो की मांगों को पूरा करने में असमर्थता जाहिर की है और लगातार जारी हड़ताल को देखते हुए मिलों के परिचालन को अस्थाई रूप से रोकने का फैसला किया है.

कथित रूप से किसानों ने उत्तेजित होकर शुक्रवार को राजारांबू सहकारी चीनी मिल और वसंतदादा पाटिल सहकारी चीनी मिल के विभागीय कृषि कार्यालयों को जला दिया था. इससे पहले, किसानो ने क्षेत्र के कई हिस्सों में गन्ने की कटाई और खेत से उसके परिवहन पर रोक लगा दी है. राज्य में जारी हड़ताल के मद्देनजर, इस क्षेत्र की अधिकांश मिल मालिकों ने पहले ही अपने क्रशिंग ऑपरेशंस को निलंबित करने का फैसला किया था. दिवाली के चलते अधिकांश कटाई मजदूर काम नहीं कर रहे थे. यह भी मिलों के परिचालन के बंद होने की एक वजह बताई जा रही है. 20 अक्टूबर से शुरू होने वाले मौजूदा क्रशिंग सीज़न में अब तक महज 50 मिलों में ही परिचालन कार्य शुरू हो पाया है.

गौरतलब है कि किसानों का यह आंदोलन मुख्य रूप से सांगली-कोल्हापुर क्षेत्र में केंद्रित है. सूखा तथा सफेद कीटडिंभ के हमले के प्रकोप के चलते अन्य हिस्सों में गन्ने की खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ था. नतीजतन वहाँ के किसानों को गन्ने की फसल, जल्दी काटने के लिए मजबूर होना पड़ा था. पुणे और मराठवाड़ा के संगठन नेताओं ने कहा कि वे गन्ने की फसल में हुए नुकसान को देखते हुए सड़कों पर नहीं उतरे हैं. कोल्हापुर और सांगली में किसानों को उपरोक्त समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा है इसलिए वहां कीमतों में बढोत्तरी की माँग के लिए आंदोलन ने जोर पकड़ा है.

मिल मालिकों ने संगठन की मांगों को अव्यवहारिक बताते हुए इसके समाधान के लिए राज्य के राजस्व और कोल्हापुर के सरंक्षक मंत्री 'चंद्रकांत पाटिल' से संपर्क किया है. पाटिल ने मिल मालिकों को आश्वासन दिया है कि वे संकट के हल के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलेंगे। इस संबंध में मिल मालिकों के साथ आज एक बैठक तय की गई है. हालाँकि, संगठन के सदस्यों को बैठक में नहीं बुलाया गया है.

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