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अगर एग्रीकल्चर की डिग्री नहीं है तो लाइसेंस होगा रद !

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जिस तरह मेडिकल स्टोर खोलने के लिए फार्मासिस्ट का डिप्लोमा करना अनिवार्य है उसी तरह अब कृषि और किसान कल्याण विभाग ने अब फसलों में होने वाली बीमारियों से सम्बंधित कीटनाशक दवाओं के साथ खाद और बीज विक्रेताओं के लिए डीएईएसआई (डिप्लोमा इन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन सर्विस फार इनपुट डीलर्स प्रोग्राम) का एक वर्ष का डिप्लोमा या फिर बीएससी एग्रीकल्चर की डिग्री का होना अनिवार्य कर दिया है. अगर आप बिना किसी डिग्री के इसे बेचते है तो आपका लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा.

मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, पानीपत जिले में बीजों और कीटनाशकों की दवा की बिक्री और खाद बिक्री का लाइसेंस लगभग 300 से 500 लोगों ने लिया है. जिसमें से कुल 150  विक्रेता ही पूरी तरह से सक्रिय रूप से काम कर रहे है. लेकिन इस क्षेत्र में कई ऐसे लोग भी है जो अभी ग्रेजुएट नहीं है. तो इस पर विभाग ने कठोरता पूर्वक फैसला लेते हुए बिना डिप्लोमा वाले विक्रेतों का लाइसेंस आगे रिन्यू नहीं करने के साथ-साथ दुकान बंद करने के भी आदेश दिये है, जिसके चलते अब 60 प्रतिशत विक्रेताओं ने दुकान बंद होने के डर से कुछ विक्रेताओं ने डिप्लोमा को लेकर आवेदन कर पढ़ना शुरू कर दिया है तो 60 प्रतिशत लोगों ने डिप्लोमा कर विभाग के पास जमा भी करा दिया है.

डिप्लोमा या बीएससी एग्रीकल्चर होना जरूरी

उप कृषि निदेशक, डॉ. वीरेंद्र देव आर्य (पानीपत) के मुताबिक इसके लिए विक्रेता को किसी अच्छी मान्यता प्राप्त संस्थान से डीएईएसआई (DAESI ) का एक वर्ष का डिप्लोमा या फिर ग्रेजुएट (केमेस्ट्री) या एग्रीकल्चर में बीएससी की डिग्री होना अनिवार्य है. जिन खाद, बीज और दवा विक्रेताओं के पास बिना डिग्री या डिप्लोमा के लाइसेंस है वे 31 दिसंबर, 2020 से पहले आवेदन कर ये डिप्लोमा कर ले वरना वर्ष 2021 में उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा.



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