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किसान समूहों द्वारा किया जाए विशिष्ट पर्वतीय फसलों का उत्पादन- डा. के.के. पॉल

पंतनगर। उत्तराखण्ड के पर्वतीय संस्थानों के विषेष परिस्थितिकी क्षेत्रों में पैदा होने वाली विशिष्ट फसलों को वृहद स्तर पर किसानों के समूहों द्वारा उत्पादित किया जाए तो यह उनके लिए वरदान हो सकता है। यह बात आज उत्तराखण्ड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति,  डा. के.के. पॉल, ने पंतनगर विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कही। विश्वविद्यालय आडिटोरियम, गांधी हॉल,  में आयोजित इस समारोह में प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सुबोध उनियाल तथा स्थानीय विधायक, श्री राजेष शुक्ला भी मंचासीन थे।

राज्यपाल ने इस दीक्षांत समारोह में उपाधि व पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ उन्हें षिक्षा देने व प्रषिक्षित करने वालों को भी बधाई दी। पर्ततीय क्षेत्रों की फसलों की कम उत्पादकता को चिंताजनक बताते हुए उन्होंने पर्वतीय कृषि के विकास को प्राथमिकता देने के लिए वैज्ञानिकों से कहा। डा. पॉल ने कहा कि कृषि को लाभप्रद बनाना व किसानों को कृषि से जोड़े रखना इस 130 करोड़ की जनसंख्या वाले देश की खाद्य सुरक्षा के लिए आवष्यक है तथा इसमें पंतनगर विश्वविद्यालय की भूमिका महत्वपूर्ण है, जिसे भावी पर्यावरण व मृदा उर्वरता में गिरावट के अनुमान के अनुसार आगे की रणनीति बनानी होगी।

कृषि विश्वविद्यालयों से उन्होंने किसानों को धान की पुआल के निस्तारण का विकल्प देने की अपेक्षा की, ताकि इसे जलाने से हो रहे पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सके। कुलाधिपति ने पर्वतों के जंगलों के संरक्षण एवं प्रवर्धन; किसानों के श्रम को कम करने वाले उपकरणों के विकास; पर्वतीय फलों खाद्यान्नों व औषधीय फसलों के अधिक उत्पादन; तथा पशु व मत्स्य पालन के साथ समन्वित खेती की तकनीकों के विकास एवं किसानों को इनकी उपलब्धता की ओर ध्यान देने के अतिरिक्त पंतनगर विश्वविद्यालय से अपने राष्ट्रीय दायित्वों के साथ-साथ पर्वतीय कृषि के विकास के लिए समर्पित होने को भी कहा।

डा. पॉल ने विश्वविद्यालय द्वारा कृषि हेतु 9 बिंदुओं को चिन्हित किया, जिनमें विभिन्न कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन की तकनीक; किसानों द्वारा समूह में उत्पादन हेतु फसलों का चिन्हीकरण; कम उपयोग में लाई गई स्थानीय पौष्टिक फसलों का व्यवसायीकरण; जैविक खेती; स्थानीय पशुओं का संरक्षण; वनीकरण का यांत्रीकरण; हिमालयी क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों का सर्वे व डेटाबेस तैयार करना, कम जल का प्रयोग करने वाली फसलों की प्रजातियों का विकास, पर्वतीय गाय ‘बद्री’ के दुग्ध की गुणवत्ता व उत्पादन का विष्लेषण; तथा बीज, शहद इत्यादि हेतु सचल लघु संसाधन इकाई की स्थापना, सम्मिलित हैं। कुलाधिपति ने विद्यार्थियों के उपाधि, पदक व दीक्षा देने के साथ-साथ लगातार सीखते रहने व ज्ञान को अद्यतन रखते हुए आगे बढ़ते रहने को कहा।

कृषि मंत्री उनियाल ने इस दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। अपने सम्बोधन में उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैविक कृषि अधिनियम लाने जा रही है, ताकि किसानों को उनके विभिन्न उत्पादन का अधिक मूल्य मिल सके। उन्होंने विश्वविद्यालय से भी विभिन्न जैविक उत्पादों के उत्पादन, मूल्य संवर्धन व विपणन पर अनुसंधान हेतु एक जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रषिक्षण केन्द्र की स्थापना किये जाने के लिए कहा। साथ ही उत्तराखण्ड के विशिष्ट उत्पादों के मूल्य संवर्धन हेतु एक कृषि उत्पाद अनुसंधान एंव प्रषिक्षण केन्द्र की स्थापना के लिए भी कहा, ताकि प्रदेश के युवाओं एवं छोटे उद्यमियों को विभिन्न प्रकार की लघु औद्योगिक इकाईयों को विकसित करने में सहायता मिल सके। उनियाल ने विभिन्न सुझाव देते हुए उन पर विश्वविद्यालय द्वारा कार्य कर किसान की आय बढ़ाने के लिए भी कहा। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना के साथ उनसे अपने ज्ञान का प्रयोग प्रदेश में कृषि औद्यानिकी को सुदृढ़ करने व किसानों व प्रदेश की आय व आर्थिकी को मजबूत करने के लिए कहा। 

कुलपति, प्रो ए.के. मिश्रा ने सभी अतिथियों व विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा षिक्षण, शोध व प्रसार के क्षेत्रों में पिछले एक वर्ष में प्राप्त की गयी उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय, विद्यार्थियों व संकाय सदस्यों की विभिन्न उपलब्धियों के साथ ही पेटेंट के लिए दायर 66 आवेदन व करंजा तेल पर मिले पेटेंट के बारे में भी जिक्र किया। इसके अतिरिक्त 102वें किसान मेले में          65.00 लाख रूपये के बीजों की बिक्री की उन्होंने जानकारी दी। प्रदेश के 9 जिलों के 9 गांवों को गोद लेकर उन्हें स्मार्ट ग्राम के रूप में विकसित करने की योजना की जानकारी भी कुलपति ने दी। विश्वविद्यालय द्वारा किसानों की आय दुगनी करने के लिये बनायी गयी कार्य योजना को उत्तराखण्ड सरकार को दिये जाने के बारे में डा. मिश्रा ने बताया। अंत में उन्होंने सभी उपाधि प्राप्तकर्ताओं को दीक्षा दी। 

इस दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति, डा. के.के. पॉल, ने 1261 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। साथ ही 41 विद्यार्थियों को विभिन्न पदक प्रदान किये गये, जिनमें 14 विद्यार्थियों को कुलपति स्वर्ण पदक, 15 विद्यार्थियों को कुलपति रजत पदक तथा 12 विद्यार्थियों को कुलपति कांस्य पदक प्रदान किये गये। सर्वोत्तम स्नातक विद्यार्थी को दिया जाने वाला कुलाधिपति स्वर्ण पदक, कविता बिष्ट को दिया गया। इनके अतिरिक्त 6 विद्यार्थियों को विभिन्न अवार्ड प्रदान किये गये, जिनमें एक विद्यार्थी को श्री पूरन आनन्द अदलखा स्वर्ण पदक अवार्ड, एक विद्यार्थी को श्रीमती सरस्वती पण्डा स्वर्ण पदक अवार्ड, ,एक विद्यार्थी को श्रीमती नागम्मा शान्ताबाई अवार्ड, एक विद्यार्थी को डा. राम षिरोमणी तिवारी अवार्ड तथा दो विद्यार्थियों को चैधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार सम्मिलित हैं।

कुलसचिव, डा. ए.पी. शर्मा ने समारोह का संचालन किया एवं अंत में धन्यवाद दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रबन्ध परिषद् एवं विद्वत परिषद् के सदस्यों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों के संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी तथा प्रदेश सरकार एवं जिला प्रषासन के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।



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