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प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर काशी के किसानों के लिए ख़ास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्म दिवस के अवसर पर अपने संसदीय क्षेत्र काशी की विकास के लिए कई योजनाओं की आधारशिला रखी है|प्रधानमंत्री द्वारा काशी और यहाँ के सभी गांव के विकास के लिए कई तरह की योजनाओं की शुरुआत की है |इन सभी योजनाओं में लगभग 534 करोड़ रुपये की लागत की राशि लगने का अनुमान है |प्रधानमंत्री ने शहर के विकास और कई जगहों के पुनरुथान के लिए भी कई योजनाओं की शुरुआत की है |

मुख्य रूप से कृषि के अनुसन्धान और किसानों के लिए भी  प्रधानमंत्री  ने कई योजनाओं की घोषणा की है प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा की  किसानों और ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍थाओं को गति देने का काम भी बीते चार वर्षों से तेज हुआ है। राजा तालाब में बने पेरिशेबल कारगो केंद्र का जुलाई में ही लोकार्पण किया गया। ये कारगो सेंटर वाराणसी और आसपास के किसानों की फसलों को न केवल खराब होने से बचा रहा है, बल्कि आय बढ़ाने में भी मदद कर रहा है। यहां सिर्फ आलू, टमाटर समेत दूसरे फल-सब्जियों के स्टोरेज की सुविधा यहां है, बल्कि रेलवे स्‍टेशन से भी ये सटा हुआ है। इससे फल-सब्जियों को दूसरे शहरों तक भेजने में आसानी रहती है।

इस कारगों सेंटर के अलावा अब international rice research centre भी का काम करीब-करीब समाप्ति पर है। भविष्य में काशी धान की उन्नत किस्मों के संरक्षण में भी अग्रिम भूमिका निभाने वाला है।वाराणसी के किसान भाई-बहनों को खेती के अतिरिक्‍त दूसरे व्‍यवसायों से भी आय हो सके, इसकी भी व्‍यवस्‍था जारी है। किसानों को खेती के साथ-साथ पशुपालन और मधुमक्‍खी पालन के लिए भी प्रोत्‍साहन दिया जा रहा है।

किसानों को मधुमक्खियों से भरे बॉक्‍स आज यहां दिए गए। उसके पीछे  यही मकसद है कि मधुमक्‍खी होना न सिर्फ हमारी उपज बढ़ाने को बढ़ोत्‍तरी करती हैं, बल्कि शहद के रूप में अतिरिक्‍त आय का भी स्रोत है। आपको ये जानकर खुशी होगी कि आज देश रिकॉर्ड मात्रा में अनाज पैदा करने के साथ-साथ रिकॉर्ड मात्रा में शहद भी पैदा कर रहा है।

बनारस और पूर्वी भारत बुनकरों, शिल्‍पकारों, मिट्टी को सोना बनाने वाले कलाकारों की धरती है। वाराणसी के हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प उद्योग को तकनीकी सहायता देने और कारीगरों को नए बाजारों से जोड़ने के लिए  

ट्रेड फैसीलेषण सेंटरों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा बुनकरों को अच्छे उत्पादन की सुविधा के लिए 9 स्थानों पर common facilitation centre भी बनाए गए हैं। अब बुनकर भाई-बहनों को वाप मशीन दी जा रही है, इससे बुनकरों का काम और आसान हो जाएगा।

बुनकर ही नहीं, मिट्टी के बर्तन और मिट्टी से कलाकृतियां बनाने वाले  को भी तकनीकी ताकत दी जा रही है। आज यहां इस कार्यक्रम में कई भाई-बहनों को इलेक्ट्रिक चार्ज दिए गए हैं। इसके अलावा मिट्टी गूंथने और सुखाने की आधुनिक मशीनें उन्हें दी जा रही हैं।इससे यहां आपके श्रम की बचत होगी, वहीं कम समय में अच्छी क्वालिटी  के बर्तन या फिर सजावटी सामान बनाए जा सकेंगे। प्रधानमंत्री के इस कदम से किसानों के साथ साथ गांव और सम्पूर्ण काशी की दशा बदलने वाली है कियुँकि जिस प्रकार से स्वच्छ भारत और सबका साथ और सबका विकास जैसे क़दमों से

प्रधानमंत्री ने लोगों के दिलों में अपनी अमिट पहचान कायम की है इससे काशी का भी भविष्य विश्वपटल पर बदलने वाला है 



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