नई दिल्ली, 5 जून, 2026। कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), उजवा, दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन किया गया। साथ ही भारत सरकार के "खेत बचाओ अभियान" के अंतर्गत किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल संरक्षण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करने हेतु विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नाबार्ड, दिल्ली के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) नबीन कुमार राय ने विश्व पर्यावरण दिवस के महत्व एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के कारण पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। उन्होंने किसानों एवं आम नागरिकों से अपने घरों तथा आसपास हरियाली बढ़ाने और कम से कम एक वृक्ष लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक है, बल्कि स्थानीय जलवायु में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राय ने भारत सरकार के "खेत बचाओ अभियान" के महत्व पर चर्चा करते हुए किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नाबार्ड द्वारा संचालित विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं एवं सहायता कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं एवं सुझावों को नाबार्ड गंभीरता से संबंधित विभागों एवं सरकार तक पहुंचाने का कार्य करता है। उन्होंने भविष्य में भी किसानों को हर संभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र, उजवा के अध्यक्ष डॉ. डी. के. राणा ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण तथा किसानों के लिए संचालित विभिन्न कृषि विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण ही भविष्य की खाद्य एवं पर्यावरणीय सुरक्षा का आधार है।
गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. रितु सिंह ने महिला किसानों को फल एवं सब्जियों के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण तथा कृषि आधारित उद्यमिता के विभिन्न अवसरों की जानकारी दी, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
तकनीकी सत्र में बागवानी विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार ने मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन, जैविक एवं संतुलित पोषण तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों को नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश (एन.पी.के.) के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों एवं जैव उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी।
कृषि प्रसार विशेषज्ञ कैलाश ने गिरते भू-जल स्तर तथा असंतुलित उर्वरक उपयोग के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए किसानों को जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों तथा कम लागत वाली टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को मिट्टी एवं सिंचाई जल की नियमित जांच, जैविक खादों के उपयोग, फसल विविधीकरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व से अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों द्वारा खेतों में जाकर मिट्टी के नमूने लेने की वैज्ञानिक विधि का प्रदर्शन भी किया गया।
मती शीना कपूर, प्रबंधक, नाबार्ड, कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प करने का आहवान किया
कार्यक्रम के अंत में नाबार्ड के मनीष कुमार शरण, जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम), नाबार्ड ने सभी अतिथियों, किसानों, महिला किसानों, स्वयं सहायता समूहों तथा कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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