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कांग्रेस का बड़ा वादा, सरकार बनने पर किसानों का कर्ज माफ

झारखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक पार्टीयों ने अपनी कमर कस ली है. इस बीच कांग्रेस ने अपने वादों का पिटारा भी खोल दिया है. दरअसल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने विधानसभा चुनाव को लेकर अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है. कांग्रेस ने इसमें वादा किया है कि अगर वह सत्ता में आई, तो किसानों के दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाएगा, साथ ही भीड़ हिंसा के खिलाफ कानून बनाया जाएगा. कांग्रेस के घोषणा पत्र में वन उत्पादों के उचित मूल्य दिलाने की भी बात कही गई है. कांग्रेस पार्टी ने वादा किया है कि वह कृषि आधारित कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत करेगी. जिसका फायदा भूमिहीन किसानों, मजदूरों और महिलाओं को होगा. इसके अलावा कांग्रेस ने रांची में मेट्रो लाइन, 10 हजार रुपये से कम आय वाले परिवारों की लड़कियों को मुफ्त साइकिल देने का वादा किया है. साथ ही कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल पर वैट घटाने, हर ग्राम सभा में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही कई अन्य वादे किए हैं.

कांग्रेस के प्रभारी आरपीएन सिंह का कहना है कि उनकी सरकार किसानों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराएगी, साथ ही संस्थागत ऋण प्राणाली को आसान बनाएगी. इसके अलावा प्रभावी किसान फसल बीमा योजना लागू की जाएगी और कीट पंतगों और प्राकृतिक आपदा से फसल को नुकसान होने पर उचित मुआवजा भी दिया जाएगा. उनकी सरकार किसानों को उचित कीमत पर आधुनिक कृषि उपकरण और उर्वरक उपलब्ध करवाएगी. इतना ही नहीं पार्टी ने धान के एमएसपी को 2,500 रुपये प्रति क्विंटल करने और फलों और सब्जियों के लिए अलग से एमएसपी बनाने का भरोसा दिलाया है. आपको बता दें कि झारखंड में विधानसभा की 81 सीटों पर 30 नवंबर से 20 दिसंबर तक चुनाव होंगे. इससे पहले भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना चलाई गई. जिसमें करीब 12 लाख किसानों के खाते में राशि देने का ऐलान किया गया.

उल्लेखनीय है कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरुदण्ड है. जहां एक ओर यह रोजगार देती है. तो दूसरी ओर जीडीपी में इसका महत्वपूर्ण योगदान है. झारखंड कृषि बजट 2017-18  की बात की जाए, तो झारखंड में कुल कृषि भूमि के 80 प्रतिशत हिस्सों में एकफसलीय खेती होती है. इसमें भी केवल धान. बाकि 20 प्रतिशत में सब्जी. जानकारी के मुताबिक, इस वक्त झारखंड में किसानों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं को मिलाकर करीब 133 योजनाएं चलाई जा रही हैं.



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