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सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए हाइड्रोजेल बनी संजीवनी

आज के समय में पानी की कमी की वजह से किसानों के लिए परेशानियां बढ़ती जा रही है. जिस कारण भविष्य में खेती करना मुश्किल होता जा रहा है और भूखमरी, गरीबी बढ़ती जा रही है. इन्ही समस्याओं से निजात दिलाने के लिए आईसीएआर द्वारा एक हाइड्रोजेल तैयार की गई है जो सूखाग्रस्त क्षेत्रों में खेती करने में मददगार साबित हो रही है.

इसका प्रयोग ऐसे स्थानों पर किया जाता है जहां पानी की कमी होती है या जहां सिंचाई के लिए उपलब्ध साधन नहीं मिल पाते क्योंकि पानी की कमी की वजह से किसानों को पानी खरीदना पड़ता है और इसमें लगात भी बहुत अधिक लगती है. ऐसे में यह हाइड्रोजेल किसानों के लिए काफी फायदेमंद रहेगी.

हाइड्रोजेल एक ऐसी जेल है जो पानी में मिलते ही ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी को अपने अंदर तक सोख लेती है. यह पौधों की जड़ों के पास रहती है क्योंकि जड़ों में ही पानी की सबसे ज्यादा कमी रहती है. इसका उपयोग आप 3 -4  बार कर सकते है. इससे आपके खेतों को कोई नुकसान नहीं होता. आपको एक एकड़ में 2 -3 किलो हाइड्रोजेल की ही आवश्यकता पड़ती है. यह 40 -50 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी ख़राब नहीं होती.

सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए यह किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है इसलिए जो किसान इसे मंगवाना चाहते है वो सीधा कृषि विज्ञान केंद्र या फिर कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा से भी सम्पर्क कर सकते हैं.

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मनीशा शर्मा, कृषि जागरण 



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