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दालों में लगी जोरदार आग, अरहर-उड़द 100 रूपये के पार

किशन
किशन

गर्मी के सीजन में अरदहर की दाल में जोरदार आग लगी हुई है.दरअसल इन दिनों अरहर दाल के खुदरा दाम सौ रूपये के पार पहुंच गए है. दरअसल पिछले एक डेढ़ दो महीने में थोक महंगाई में आई तेजी से यह उछाल आया है. अगर आने वाले दिनों में मानसून सामान्य नहीं रहता है तो आने वाले दिनों में दालों विशेषकर की अरहर की दाल का भाव काफी ज्यादा आसमान छूते दिख सकता है. फिलहाल अरहर की दाल बाजार और मॉल में 100 से 120 रूपये किलो के आसपास बिक रही है. मंडी विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले दो महीनों के अंदर इसमें तेजी देखने को मिली है. दाल बाजार में दाल पटका 7600 से 8200 रूपये प्रति क्विंटल तक मिल रही है. मानसून की आशंका को देखते हुए पिछले कुछ दिनों से थोक में दाम तो गिरे है लेकिन खुदरा में दाम ऊपर बने हुए है. विशेषज्ञों की मानें तो अंतराष्ट्रीय स्तर पर दालों का दाम ऊंचा है.

किसानों ने की है कम बुवाई

दरअसल पिछले कुछ सालों से दालों के रकबे में नरमी रहने के कारण किसानों ने कम रकबे में दालों की बुवाई की है. रकबे के हिसाब से उत्पादन भी कम ही रहा है. साथ ही कई जगह फसलों में कीड़ा लग जाने से फसल चौपट हो गई है. ससे अरहर की रबी और खरीफ दोनों फसलों का उत्पादन पहले से ज्यादा प्रभावित हुआ है. दिसंबर-जनवरी की महाराष्ट्र और कर्नाटक में पैदावार तो काफी खराब ही रही है. वही यूपी, बिहार, झारखंड और एमपी में भी मानसून उम्मीद के अनुसार नहीं रहा है. इसीलिए इसका असर पड़ा है.

मानसून सामान्य नहीं रहा तो उछाल आएगा

अगर हम विशेषज्ञों की बात सुनें तो उनके अनुसार इस साल मानसून सामान्य नहीं रहता है तो लगातार दूसरे साल फसल चक्र के बुरे तौर से प्रभावित होने की आशंका है. इसका सीधा असर आने वाले दाल उत्पादन पर तो पड़ेगा ही साथ ही अरहर समेत कई अन्य दालों में तेजी का रूख रहेगा. बता दें कि महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्य इस समय पानी का भीषण संकट झेल रहे है ऐसे में अगर राज्य सरकारों ने सही वक्त पर कोई कदम नहीं उठाया तो फिर वही स्थिति आ सकती है जब अरहर की दाल के भाव 200 रूपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे.

सात माह के उच्चतम स्तर पर रहेगी महंगाई

गर्मी के मौसम में सब्जियों, दालों के दाम में तेज उछाल से खुदरा महंगाई मई में तीन का आंकड़ा पार कर सकती है। 3.1 फीसदी के साथ इसके सात माह के उच्चतम स्तर पर रहने की संभावना है, जो अप्रैल में 2.92 फीसदी रही थी। हालांकि यह आरबीआई के चार फीसदी के लक्ष्य से काफी कम है और पहली छमाही तक चिंता की बात नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च से लगातार इसके दाम बढ़ रहे है.

English Summary: Heavy fire in the pulp

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