News

महिलाओं का ग्रीन गैंग : इनकी लाठी के सामने नेता और दबंग सब फ़ैल

महिलाओं का ग्रीन गैंग : इनकी लाठी के सामने नेता और दबंग सब फेल

जब किसी महिला पर कोई अत्याचार होता है वो या तो शांत बैठकर सबकुछ सहन कर जाती है या फिर लक्ष्मीबाई या फूलनदेवी बनकर अपने अपमान का बदला लेती है. ऐसा कुछ हुआ था ग्रीन गैंग की मुखिया अंगूरी देवी के साथ. जहाँ से ग्रीन गैंग की शुरुआत हुई. जब भी महिलाओं को न्याय दिलाने की बात होती है तो ग्रीन गैंग याद आती हैं. यह गैंग महिलाओं को न्याय दिलाने में जरा भी पीछे नहीं हटता है. इस गैंग की एक ख़ास ड्रेस है हरी साडी. हरे रंग की साड़ी में ये महिलाएं जहां भी पहुंचती हैं, समझो वहां की महिलाओं को न्याय मिलना पक्का है, जहां पर आसानी से न्याय नहीं मिलता ये महिलाएं लाठी चलाने से भी नहीं झिझकती हैं. यह अंगूरी दहाड़िया की महिलाओं का ग्रुप 'ग्रीन गैंग'.

कन्नौज जिले के तिर्वा कस्बे में रहने वाली अंगूरी दहाड़िया वर्ष 2010 से इस संगठन को चला रही है. यह उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में चल रहा है और इससे वर्तमान समय में 14 हजार 252 महिलाएं जुड़ी हुई है. ग्रीन गैंग को शुरू करने के बारे में अंगूरी का कहना है कि , "मेरी शादी एक बहुत गरीब परिवार में हुई थी. घर की स्थिति आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी मेरे पति भी मेरे बीमार रहते थे. घर चलाने के लिए अंगूरी ने साड़ी , जूते, शीशे के डिब्बे बनाना का काम शुरू किया. उसी काम से अंगूरी  बच्चों का पालन-पोषण करती थी और उसी पैसे से अपने पति का इलाज भी कराया."

अंगूरी ने कस्बे के पंडित जी से किश्तों में प्लाट लिया. दिन-रात मेहनत करके अंगूरी ने उस मकान की किश्तों को पूरा किया. लेकिन प्लाट मालिक ने हमें कमजोर और गरीब देखकर बेईमानी कर ली, उसके कहने पर मैने बैनामा नहीं कराया था, बाद में उसने मुझे और मेरे बच्चों को मारकर भगा दिया, मकान पर कब्जा कर लिया.’

अपनी मेहनत के प्लाट को गवाने के बाद अंगूरी के ने कई जगह सिफारिश लगायी लेकिन किसी ने उनकी फ़रियाद नहीं सुनी. अंगूरी देवी जब सड़क पर आ गयी तो उन्होंने तब सोचा कि अंगूरी  फूलनदेवी बनूंगी और उसका सर्वनाश करूंगी. लेकिन बच्चों का भविष्य खराब न हो इसके अंगूरी ने अपना ये विचार बदल दिया. और ठान लिया जो मेरे साथ हुआ वो अंगूरी  किसी और के नहीं होने दूंगी. उसके बाद अंगूरी ने एक महिला गैंग तैयार किया जिसका नाम रखा ग्रीन गैंग.

इस संगठन को तैयार करने में उनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. उन्होंने गाँव-गाँव जाकर अंगूरी  लोगों को अपने साथ हुए अन्याय के बारे में बताती थी लोग सुनते थे. लेकिन जब अंगूरी  यह कहती थी कि अपनी पत्नी को मेरे साथ जोड़ो अंगूरी  यह लड़ाई लड़ना चाहती हूं. तो वो लोग पूरी बात सुनने के बाद यही कहते थे कि बहन जी आपको आपका संगठन मुबारक हो अंगूरी  अपनी पत्नी को घर से बाहर नहीं निकलने दूंगाहर जगह से निराशा लगने के बाद भी अंगूरी ने हार नहीं मानी. वो गाँव-गाँव भटकती रही और साथ हुए अन्याय के बारे में लोगों को बताती रही. अंगूरी देवी जब दूसरों के घरों में जाने लगी जिनके साथ उत्पीड़न हो रहा था. तब उन्हीं घरों से महिलाएं निकलना शुरू हुई और महिलाओं का समूह बनना शुरू हो गया. आज अंगूरी  इसी संगठन से डॉन, माफिया, नेता, अधिकारी शासन प्रशासन हर व्यक्ति से सच की लड़ाई लड़ रही हैं.

जब कोई अंगूरी के पास अपनी समस्या लेकर आता है. तो वो उनकी समस्या सुनती हैं और सच को जानने के लिए अपनी टीम भेजती हैं गाँव जाकर सर्वे कराती हैं. इस रिपोर्ट के आधार पर उनकी टीम पीड़ित महिला के साथ जाकर टीम इन्साफ दिलाती हैं.

जब अंगूरी देवी गैंग के साथ लेकर पहुंचती हैं तब वहां न तो नेता का फोन काम करता है और न दंबग का पैसा काम करता है. वहीं होता है जो सच्चाई होती है वही काम करती हैं और तुरंत मुकदमा दर्ज हो जाता है.

अंगूरी का ग्रीन गैंग सिर्फ कब्जा दिलाने के लिए ही लोगों की मदद नहीं करता बल्कि किसी के भी साथ हो रहे उत्पीड़न को लेकर लड़ाई लड़ता है. ग्रीन गैंग से जुड़ने के बाद महिलाओं में आए बदलाव के बारे में अंगूरी कहती हैं, "जब अंगूरी  किसी मामले को लेकर थाने जाती थी और गाँव में प्रशासन जाता था पुलिस जाती थी तो वो महिलाएं डर की वजह से अपना गेट बंद कर लेती थी, बात नहीं करती थी, डरती थी. अब वहीं महिलाएं जब थाने पहुंचती है और दूसरों के हक के लिए पुलिस और प्रशासन से लड़ाई लड़ती है."

इस संगठन को चलाने के लिए अंगूरी के परिवार ने उनका पूरा साथ दिया, लेकिन उनके संगठन से जुड़ी गाँवों की महिलाओं बहुत दिक्कतों को सामना करना पड़ा. महिलाओं के साथ होने वाली टिप्पणियों के बारे में अंगूरी बताती हैं, "जब गाँव की महिलाएं घर से बाहर निकलती थी तो महिलाओं से कहते है कि कहो भई चाची आज कहां बाजेगी, किस पर बाजेगी, कहां जा रही हो, बड़ी बतमीजी करते थे. उनके पतियों ने भी मना किया. लेकिन अंगूरी ने उन महिलाओं को समझाया और आज बेफ्रिक होकर महिलाएं निकलती है और उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है."

 

एक महिला के साथ हुए हादसे के बारे में अंगूरी बताती हैं, "एक गाँव में एक दबंग के सात बेटे थे और एक गरीब घर में दो ही लोग है. आए दिन वो दंबग उसको परेशान करते थे मारते पीटते थे. वो महिला जो हमसे जुड़ गई. और जब उस दबंग के घर 50 महिला लाठी लेकर उसके दरवाजे पर खड़ी हो गई और अंगूरी ने बोला कि तू कितना बड़ा गुंडा है जैसे चाहे वैसे लड़ ले आकर के तेरे पास अगर 10 लाठियां है तो मेरे पास 14 हजार लाठियां है. अगर तू मुकदमा करेगा तो उसमें तेरे बाप और बाबा कि कमाई खर्च होगी. लेकिन अगर हम संगठन से मुकदमा करेंगे और हमारे ऊपर तू मुकदमा करेगा तो हम एक अंगोछा बिछा करके और संगठन से एक-एक रुपया डालकर लड़ाई लड़ लूंगी और तेरे बाप की खेती बिकवा दूंगी."

गरीबों के लिए हक की लड़ाई लड़ने वाली अंगूरी जेल भी गई है. "अंगूरी  पांच बार जेल गई हूं सिर्फ जनता के लिए. जब गरीब की बात प्रशासन नहीं सुनता है तो हम भी कानून तोड़ देते है. जब संगठन की महिलाओं को पता चलता है कि अंगूरी  जेल में हूं तो सभी महिलाएं थाने पंहुच जाती है और बोलती है हमारी गलती है हमको भी अंदर करो. तब उनको मुझे छोड़ना ही पड़ता है. कभी ऐसा नहीं हुआ कि अंगूरी  तीन से ज्यादा जेल में रूकी हूं." अंगूरी बताती हैं.

संगठन मे सभी महिलाएं हरे रंग की साड़ी पहनती हैँ. जिनकी साड़ी में लाल पट्टी होती है वो पदाधिकारी महिलाएं है. अंगूरी अपने संगठन को आगे बढ़ाने के बारे में बताती हैं, "पार्टी चलाना आसान है लेकिन एक संगठन चलाना उतना ही मुश्किल है अंगूरी  बहुत सी परेशानी से जूझ रही हूं क्योंकि पैसे का कोई साधन नहीं है. सभी महिलाओं के परिवार में बच्चे है. तो अब अंगूरी ने सोचा हैं कि अंगूरी  राजनीति में जाऊं और तब इस संगठन पर पैसा लगाकर मदद कर सकूं.

वर्ष 2014 में हुई एक घटना घटी रमज़ान का महीना चल रहा था. मुस्लिम समुदाय के लोग आठ दिन से कस्बे में पानी और ट्रांसफार्मर फूंकने की मांग को लेकर धरना कर रहे थे. जबकि इस समस्या से अंगूरी  जेई को इसके विषय में अवगत करा चुकी थी. अंगूरी  भी उस धरने में गई और जेई को बोला कि अगर आप नहीं रखवा पा रहे हैं तो बता दीजिए अंगूरी  अपनी महिलाओं को लेकर लखनऊ जाती हूं और अपनी समस्या रखती हूं. तो जेई ने अंगूरी से बद्तमीजी की. अंगूरी ने जेई को दो झापड़ मारे. पेटीकोट पहनाया, बिंदी लगाई और चूड़ी पहनाई और वहीं बिठा दिया."इसके बाद एसडीओ आए वो भी बद्तमीजी करने लगे. तो उनके ऊपर भी जूता चला दिया. फिर अंगूरी के ऊपर छह मुकदमे लगाए गए.इसके बाद भी वो नही डरी और अपने कर्तव्य पर दृढ रही

कैसे जोडती है महिलाओं को संगठन से

अपने संगठन से महिलाओं को जोड़ने के लिए अंगूरी  ट्रेनों में सफर करती हैं. जब ट्रेनों में बैठते है तो कई जिलों के लोगों से मिलते है आपस में बातचीत करते है. ड्रेस में रहते हैं तो लोग खुद पूछने लगते हैं कि मैडम ये कौन सी संस्था हैं तो अंगूरी  अपनी बात बताने के लिए शुरू हो जाती हूं. अंगूरी  अपना पूरा काम भी बताती हूं. इस तरह इस संगठन से लोग जुड़ते हैं.

इस दौरान उन लोगों के नंबर ले लेती हैं. उनसे कहती हैं कि दो दिन आपके घर की रोटी खाएंगे गाँव में हमारी 20 महिलाओं की मीटिंग करवा दीजिए. संगठन से जुड़े या न जुड़े वो मेरे ऊपर है. जब 20-30 महिलाओं की मीटिंग करो तो पांच छह महिलाएं निकल ही आती है. जो महिलाएं निकल आती है उनको अंगूरी  पदाधिकारी बना देती हैं. उनको काम बताती हूं. कोई दिक्कत हो उसके लिए उनको फोन करने के लिए बोलती है. 



Share your comments