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गांव-गांव, शहर-शहर: एटलस साइकिल

वो देश की ठीक आजादी का समय था जब देश में चारों ओर विकास की दरकार थी। उस समय कच्चे रास्ते थे। गांवों से शहरों की ओर पलायन करने के लिए लोग पैदल, बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी के जरिए अपनी मंजिल तय किया करते थे। घोड़ागाड़ी भी बड़े घरानों के पास हुआ करती थी लेकिन देश की आजादी के बाद देशवासियों की आवागमन की परेशानी को स्वर्गीय जयदेव कपूर ने समझा। वर्ष 1951 में उन्होंने एटलस साइकिल की नींव रखी। अपने पहले प्रयास में देशभर को एटलस ने 12,000 साइकिलें प्रदान कीं। वर्ष 1965 में एटलस देश की सबसे बड़ी साइकिल निर्माता कंपनी बनी। तब से लेकर अब तक कंपनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एटलस साइकिल्स की इसी प्रगति के विषय में कृषि जागरण ने कंपनी के सीनियर वाईस प्रेसिडेंट राहुल कपूर से बात की। इस कंपनी की कहानी उन्हीं की जुबानी...

जैसा मैंने आपको बताया कि एटलस की शुरुआत आज से 67 साल पहले हुई थी। जब देश को आवागमन के लिए किसी वाहन की बहुत ज्यादा जरुरत थी। इसकी शुरुआत में हमारे ग्रेट ग्रैंडफादर का बहुत बड़ा योगदान रहा। हमने शुरुआत में एटलस गोल्डलाइन देश को मुहैया कराई। वह 50 से 80 का दौर था। इस साइकिल की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती गई लेकिन जैसे-जैसे समय बदलता गया तो लोगों की जरूरतें भी बदलती गईं। एटलस भी अपने ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से उनको उत्पाद मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध हो गई। धीरे-धीरे मोटरसाइकिल का प्रचलन भी इस दौरान बढ़ा। गोल्डलाइन के कुछ समय बाद ब्लैक साइकिल का दौर आया तो हमने उसकी भी मांग पूरी की और अपने ग्राहकों को ब्लैक साइकिल उपलब्ध करवाईं। मोटरसाइकिल का दौर बढ़ने के बाद साइकिल की मांग में थोड़ी कमी आई जबकि गाँवों में साइकिल का एक बड़ा बाजार है।

एकदम से आया बड़ा बदलाव

ग्रामीण इलाकों में जहां साइकिल की एक बड़ी मार्किट होती है उसी ने अब धीरे-धीरे शहरों की ओर रुख किया। शहरों में औद्योगिकीकरण के कारण बढ़ते हुए प्रदूषण से शहरों में रहने वालों की सेहत पर बुरा असर पड़ने लगा और लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने लगे। ऐसे में एटलस की इस साधारण साइकिल ने एक स्पोट्र्स और फिटनेस साइकिल का रूप ले लिया। शहरों में स्पोट्र्स साइकिल की बढ़ती मांग को देखते हुए एटलस साइकिल ने अपने ग्राहकों को स्पोट्र्स बाइक उपलब्ध कराना शुरू किया। आज मैं कह सकता हूं कि देश में लगातार इसका क्रेज बढ़ता जा रहा है। खासकर युवाओं से बुजुर्गों तक सभी की पसंद स्पोट्र्स साइकिल बन चुकी है।

आज एटलस हर महीने लगभग 2,00,000 साइकिल का उत्पादन करती है। मैं आपको बताना चाहूंगा कि पिछले 10 सालों में साइकिल इंडस्ट्री की हालत कुछ ठीक नहीं रही है लेकिन फिर भी हमने पिछले कुछ दशकों में तरक्की की है। आज यह कंपनी भारत की अग्रणी साइकिल निर्माता कंपनी बन चुकी है। एटलस लगभग देश के सभी राज्यों में अपनी शाखाएं फैलाए हुए है। कंपनी ने अपने 60 से अधिक आउटलेट देशभर में स्थापित किए हुए हैं।

विचार

मेरा मानना है कि जिस तरह से साइकिल इंडस्ट्री में बदलाव आए हैं इसे मानवजीवन में बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा सकता है। अब साइकिल का क्रेज बढ़ता जा रहा है। ऐसे में मार्केट में 6,000 से लेकर 1 लाख रूपए मूल्य तक की साइकिल मौजूद हैं। साइकिल के बढ़ते प्रचलन से पर्यावरण को फायदा पहुंचेगा। साइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार को चाहिए कि पर्यटन स्थलों पर अधिक रेंटल साइकिल स्थल बनाए जाएं। यही नहीं शहरों में भी जगह-जगह रेंटल साइकिल स्थल बनाए जाने चाहिए। इससे ईको-सिस्टम भी मजबूत होगा। साथ ही साथ देश को एक नई दिशा मिलेगी।

साइकिल इंडस्ट्री: एक नजर में

भारत में साइकिल इंडस्ट्री का इतिहास बहुत पुराना है। लगभग 6 दशकों पुराने भारत में साइकिल उद्योग के इतिहास में बड़े बदलाव देखने को मिले। साइकिल की उत्पत्ति से लेकर इसको बनाने व इसकी डिजाईन, गुणवत्ता, आधुनिक तकनीकी में काफी बदलाव आए। 80 और 90 के दशक में ब्लैक साइकिल की मांग 90 प्रतिशत तक थी लेकिन उसके बाद जैसे-जैसे लोगों की सोच में बदलाव आए वैसे ही मांग में भी परिवर्तन आने लगा। फिर हमने इस जरुरत को समझकर चीन, जापान, और इंग्लैंड जैसे देशों का दौरा किया। वहां पर साइकिल की नई तकनीकों और गुणवत्ता को समझा। वहां पर वेंडर्स से मिले। इसके बाद फैक्ट्री विजिट कर विदेशों में साइकिल बनाने व इसको चलाने में इस्तेमाल की जाने वाली नई तकनीकों को देश में लेकर आने का फैसला किया। उसी के अनुरूप हमने साइकिल को डिजाईन किया।

भविष्य की साइकिल -कार्बन साइकिल

शुरुआत से लेकर अब तक साइकिल्स में न जाने कितनी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया और समय के साथ इसमें नित्य नए बदलाव आते रहे। साइकिल्स के हजारों मॉडल सामने आए हैं। स्पोट्र्स साइकिल या फिर अलॉय साइकिल आज की जरुरत ही नहीं बल्कि युवा पीढ़ी की पहली पसंद भी बन चुकी हैं। यदि देखा जाए तो कार्बन साइकिल भविष्य में देश की जरुरत है। अब हम कह सकते हैं कि कार्बन साइकिल भारत का भविष्य है। आने वाले समय में भारत में यह भविष्य की जरूरत है।

ग्रामीण बाजार

कहते हैं कि असली भारत सिर्फ गांवों में बसता है। साइकिल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हमने गांवों में ही देखा है इसलिए हमने इसका ध्यान रखा। आज एटलस एकमात्र ऐसी कंपनी है जो गांव में लगभग 60 से 70 प्रतिशत तक अपनी मार्किट का ख्याल रखती है जबकि दूसरी कंपनियां सिर्फ 40 प्रतिशत तक ही ग्रामीण मार्किट पर अपना ध्यान केन्द्रित किए हुए हैं।

ईको फ्रेंडली सर्विस जरुरी है

जब मैंने चीन, जापान और इंग्लैंड जैसे देशों का दौरा किया तब यह पता चला कि वहां पर किस तरह से पर्यटक स्थलों पर ईको फ्रेंडली सेवा के तहत साइकिल्स की रेंटल सर्विस को काफी बढ़ावा दिया गया है। भारत में भी इस तरह की सेवाओं की आवश्यकता है। हालांकि कुछ स्थानों पर यह लागू है तो वहां पर यह सेवा ढंग से सुचारू नहीं है। हमें इस तरह की ईको फ्रेंडली सेवा को शुरू करने की जरुरत है। इसके लिए पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता है।

उत्पाद गुणवत्ता

गुणवत्ता के मामले में एटलस का नाम ही काफी है। हमने दूसरे देशों की एडवांस तकनीक अपनाकर अपने देश में विकसित किया। हम अपने ग्राहकों को जो उत्पाद देते हैं वह टिकाऊ और अधिक गुणवत्ता वाले उत्पाद हैं। हमारा पूरा ध्यान प्रोडक्ट की गुणवत्ता को निखारने पर ही केन्द्रित रहता है।

कंपनी की तरक्की में ग्राहकों का बड़ा हाथ

आज एटलस जिस भी मुकाम पर है वो सिर्फ अपने ग्राहकों के विश्वास की बदौलत है। हमारे ग्राहकों ने एटलस पर विश्वास किया यह हमारे लिए बहुत गर्व की बात है। उसके बाद हमारे डीलर्स व डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कंपनी को आगे बढ़ने में अहम भूमिका निभाई है।

कृषि जागरण

नई दिल्ली

 



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